केरल हाई कोर्ट में सबरीमाला सोना चोरी मामले में एसआईटी ने तंत्री की जमानत रद्द करने की अपील की

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केरल हाई कोर्ट में सबरीमाला सोना चोरी मामले में एसआईटी ने तंत्री की जमानत रद्द करने की अपील की

सारांश

कोच्चि में सबरीमाला सोना चोरी मामले में एसआईटी ने तंत्री कांतारार राजीवर की जमानत रद्द करने की याचिका केरल हाई कोर्ट में दायर की। यह मामला चुनावी प्रचार में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

Key Takeaways

  • एसआईटी ने तंत्री कांतारार राजीवर की जमानत रद्द करने की मांग की।
  • जांच में कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मिले हैं।
  • यह मामला विधानसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दा बन गया है।

कोच्चि, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को केरल हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर सबरीमाला में कथित सोने की चोरी से जुड़े दूसरे मामले में तंत्री कांतारार राजीवर की जमानत रद्द करने की मांग की।

कोर्ट ने इन दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करने का निर्णय लिया है, जिसमें द्वारपालक प्लांक मामले की पूर्व याचिका भी शामिल है। पहली याचिका द्वारपालक प्लांक मामले से संबंधित थी, जिसमें कस्टडी के ४१वें दिन जमानत मिल गई थी।

एसआईटी ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए कहा है कि निचली अदालत ने जमानत देने से मना करने के लिए आवश्यक सामग्री का सही ढंग से मूल्यांकन नहीं किया। एसआईटी के अनुसार, तंत्री ने कथित साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उसे सामान्य व्यक्ति नहीं माना जा सकता।

जांचकर्ताओं का यह भी दावा है कि राजीवर को मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी से जोड़ने वाले कई डिजिटल और गवाहों के सबूत हैं। एसआईटी ने यह भी कहा कि सबरीमाला से पवित्र वस्तुओं को संभालने और उनकी मरम्मत की प्रक्रियाओं की जानकारी राजीवर की गहरी संलिप्तता को दर्शाती है।

मंदिर की कीमती वस्तुओं के परिवहन और रखरखाव में उसकी कथित भूमिका को एक गंभीर आपराधिक साजिश का हिस्सा माना जा रहा है। हाई कोर्ट पहले ही द्वारपालक प्लांक मामले में याचिका पर विचार कर रहा था, लेकिन एसआईटी ने अब उससे जुड़े कट्टिलापल्ली मामले में भी एक नई याचिका दायर की है, जिसमें उस मामले में भी जमानत रद्द करने का अनुरोध किया गया है।

एसआईटी का कहना है कि निचली अदालत ने जांच के आवश्यक पहलुओं को नजरअंदाज किया, जिसमें आरोपियों के बीच तालमेल की सीमा भी शामिल है। उन्होंने हाई कोर्ट से सबूतों की पूरी जाँच करने और दी गई जमानत रद्द करने का अनुरोध किया, यह बताते हुए कि आरोपों की गंभीरता और मौजूद सामग्री कस्टडी जारी रखने का समर्थन करती है। अब दोनों याचिकाएँ एक साथ जोड़ी गई हैं, इसलिए हाई कोर्ट का आने वाला फैसला सबरीमाला सोने की चोरी की चल रही जांच में एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में देखा जा रहा है।

एसआईटी द्वारा दायर की गई दो अलग-अलग चार्जशीट में १३ आरोपियों के नाम हैं और अब तक १० व्यक्ति जमानत पर बाहर हैं। चल रहे विधानसभा चुनाव प्रचार में सबरीमाला चोरी का मामला कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के खिलाफ सीपीआई-एम के नेतृत्व वाले वामपंथियों का एक प्रमुख प्रचार मुद्दा बना हुआ है।

Point of View

बल्कि यह केरल की राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एसआईटी की कार्रवाई से साफ है कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। जमानत रद्द करने की मांग के पीछे कई महत्वपूर्ण सबूत हैं, जिन पर गौर किया जाना चाहिए।
NationPress
25/03/2026

Frequently Asked Questions

एसआईटी ने क्यों जमानत रद्द करने की याचिका दायर की?
एसआईटी का कहना है कि निचली अदालत ने आवश्यक सबूतों की सही जांच नहीं की और तंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण है।
इस मामले में कितने आरोपी हैं?
एसआईटी द्वारा दायर की गई चार्जशीट में कुल १३ आरोपियों के नाम हैं।
इस मामले का राजनीतिक प्रभाव क्या है?
यह मामला विधानसभा चुनाव प्रचार में एक प्रमुख मुद्दा बन गया है, जो विभिन्न राजनीतिक धाराओं के बीच विवाद उत्पन्न कर सकता है।
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