केरल श्रम संहिता नियम: 22 ट्रेड यूनियनों से परामर्श के बाद बनेंगे नए नियम, 10 दिन में रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की अध्यक्षता में 22 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम के सचिवालय में हुई एक महत्त्वपूर्ण बैठक में केरल सरकार ने निर्णय लिया कि लेबर कोड के तहत राज्य के नए नियमों को अंतिम रूप देने से पहले 22 ट्रेड यूनियनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए एक विशेष समिति गठित की गई है, जिसे 10 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपनी होंगी।
बैठक का मुख्य घटनाक्रम
गुरुवार को हुई इस बैठक में श्रम मंत्री बिंदु कृष्णा और 22 ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारी शामिल हुए। सरकार ने स्पष्ट किया कि नियम तैयार करने की प्रक्रिया में सभी हितधारकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
श्रम विभाग के सचिव इस समिति का गठन करेंगे, जिसमें विधि विभाग के अतिरिक्त सचिव भी सदस्य के रूप में होंगे। श्रम विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न ट्रेड यूनियनों के सात प्रतिनिधि भी इसमें शामिल किए जाएंगे।
समिति का कार्यक्षेत्र
विशेष समिति का प्राथमिक काम लेबर कोड के तहत राज्य के नियम तैयार करने के लिए व्यावहारिक सुझाव देना होगा। समिति के सुझावों का मसौदा सभी ट्रेड यूनियनों को भेजा जाएगा — यहाँ तक कि जिन यूनियनों का समिति में कोई प्रतिनिधि नहीं है, उन्हें भी बैठकों में शामिल होकर अपनी राय रखने का अवसर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि सरकार ट्रेड यूनियनों को 2021 में तैयार किए गए मसौदे में संशोधन का सुझाव देने का मौका भी देगी — जो परामर्श की गहराई को दर्शाता है।
केंद्र सरकार से आग्रह
बैठक में यह भी तय हुआ कि लेबर कोड के प्रावधानों को लागू करने के लिए निर्धारित सीमा का मुद्दा केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा और उनसे इस सीमा को कम करने का आग्रह किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य सरकारें केंद्र द्वारा बनाए गए श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन को लेकर अपनी-अपनी नीतियाँ स्पष्ट कर रही हैं।
मुख्यमंत्री का आश्वासन
मुख्यमंत्री सतीशन ने ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि सरकार श्रमिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कानूनी ढाँचे के भीतर रहते हुए ऐसे कदम उठाएगी जिससे लेबर कोड के प्रतिकूल प्रभावों को न्यूनतम किया जा सके।
सतीशन ने यह भी उम्मीद जताई कि केरल द्वारा बनाए गए नियम अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल का काम करेंगे — जो राज्य की महत्त्वाकांक्षा को रेखांकित करता है।
आगे की राह
बैठक में शामिल सभी ट्रेड यूनियनों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि श्रमिकों के हितों की रक्षा प्राथमिकता है। विशेष समिति की रिपोर्ट और यूनियनों के सुझावों पर विचार के बाद ही राज्य के अंतिम नियम तैयार होंगे और प्रकाशित किए जाएंगे। 10 दिनों की समय-सीमा संक्षिप्त है, लेकिन अंतिम निर्णय परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।