केरल में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की तैयारी, श्रम मंत्री ने मसौदा रिपोर्ट CM सतीशन को सौंपी
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को राज्य स्तर पर लागू करने की प्रक्रिया में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने और बोनस सहित अन्य कल्याणकारी लाभों का दायरा व्यापक करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। श्रम मंत्री बिंदु कृष्णा ने 4 नवंबर 2026 को प्रमुख सिफारिशों वाली मसौदा रिपोर्ट मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन को तिरुवनंतपुरम में सौंपी। यह रिपोर्ट ट्रेड यूनियनों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ 10 दिनों की गहन चर्चा के बाद तैयार की गई है।
मजदूरी गणना की नई इकाई
रिपोर्ट की सबसे अहम सिफारिश न्यूनतम मजदूरी की गणना के आधार में बदलाव से जुड़ी है। वर्तमान में मजदूरी की गणना तीन सदस्यों की पारिवारिक इकाई के आधार पर की जाती है। समिति ने इसे बढ़ाकर पाँच सदस्य करने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें श्रमिक के माता-पिता को भी शामिल करने की सिफारिश है। यह बदलाव मजदूरी की गणना का आधार विस्तृत करेगा और श्रमिकों को अधिक वेतन दिलाने का रास्ता खोल सकता है।
बोनस और कल्याण लाभों का विस्तार
रिपोर्ट में अधिकाधिक श्रमिकों को बोनस और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं के दायरे में लाने का सुझाव दिया गया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कार्यबल का बड़ा हिस्सा श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले लाभों से वंचित न रहे। गौरतलब है कि केंद्र के श्रम संहिता ढाँचे के तहत कई राज्यों में बोनस की पात्रता सीमा और गणना-पद्धति को लेकर असमंजस बना हुआ है।
महिला श्रमिकों और खतरनाक कार्यों पर विशेष ध्यान
श्रमिकों की सुरक्षा को सिफारिशों में प्राथमिकता दी गई है। खतरनाक और जोखिमपूर्ण कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए मुफ्त चिकित्सा जाँच की व्यवस्था का प्रस्ताव है। रात की पाली में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान लागू करने की भी सिफारिश की गई है, ताकि रोज़गार के अवसर बनाए रखते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
समिति का गठन और समीक्षा प्रक्रिया
इन सिफारिशों को तैयार करने के लिए 22 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक विशेष समिति गठित की गई थी। श्रम आयुक्त को समिति का संयोजक बनाया गया था। इसमें विधि विभाग के अतिरिक्त सचिव, विभिन्न ट्रेड यूनियनों के सात प्रतिनिधि और श्रम विभाग के अधिकारी शामिल थे। समिति ने इससे पहले न्यायमूर्ति गोपाल गौड़ा समिति द्वारा की गई समीक्षा और उसकी कानूनी सिफारिशों को भी ध्यान में रखा।
तालाबंदी और आगे की राह
ताज़ा रिपोर्ट में तालाबंदी (लॉकआउट) और छंटनी (लेऑफ) से जुड़े प्रावधानों में संशोधन का भी सुझाव दिया गया है, जिससे राज्य सरकार को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप के अधिक अधिकार मिल सकें। अब राज्य सरकार इन सिफारिशों की समीक्षा करेगी, जिसके बाद श्रम संहिताओं के तहत राज्य नियम बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रिपोर्ट में स्पष्ट जोर दिया गया है कि नए नियमों में श्रमिकों के मौजूदा अधिकार और सुरक्षा उपाय पूर्णतः संरक्षित रहने चाहिए।