14 अगस्त 2026
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केरल में 'माई पुलिस स्टेशन' पहल लॉन्च: 484 थानों में 8 सहायता डेस्क, युवा SHO की नियुक्ति

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केरल में 'माई पुलिस स्टेशन' पहल लॉन्च: 484 थानों में 8 सहायता डेस्क, युवा SHO की नियुक्ति

सारांश

केरल सरकार ने 'माई पुलिस स्टेशन' पहल से राज्य के 484 थानों को नागरिक-केंद्रित बनाने की शुरुआत की है — 8 सहायता डेस्क, CCTV निगरानी और 63 महिला SHO की नियुक्ति के साथ। यह केवल ढाँचागत बदलाव नहीं, बल्कि पुलिस के व्यवहार और जवाबदेही में आमूल परिवर्तन का प्रयास है।

मुख्य बातें

सतीशन ने 14 अगस्त 2026 को तिरुवनंतपुरम के पेरूरकडा थाने से 'माई पुलिस स्टेशन' पहल की शुरुआत की।
केरल के 484 पुलिस थानों में 8 विशेष सहायता डेस्क स्थापित किए जाएंगे, जिनमें महिला, बाल, ट्रांसजेंडर, दिव्यांग और साइबर अपराध डेस्क शामिल हैं।
63 महिला सब-इंस्पेक्टरों सहित युवा सब-इंस्पेक्टरों को SHO के रूप में नियुक्त किया जा रहा है।
सभी थानों में CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं; पुलिस हिरासत में मौतों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध।
पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
भारत का पहला महिला पुलिस स्टेशन केरल के कोझिकोड में स्थापित हुआ था — इसी विरासत को यह पहल आगे बढ़ाती है।

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 14 अगस्त 2026 को तिरुवनंतपुरम के पेरूरकडा पुलिस स्टेशन से 'माई पुलिस स्टेशन' पहल की औपचारिक शुरुआत की, जिसके तहत राज्य के 484 पुलिस थानों को नागरिक-अनुकूल, तकनीक-आधारित और जवाबदेह केंद्रों में बदला जाएगा। इस पहल का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आम नागरिक बिना किसी भय या संकोच के थाने में अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।

पहल में क्या शामिल है

इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पुलिस थाने में 8 विशेष सहायता डेस्क स्थापित किए जाएंगे — शिकायत डेस्क, महिला सहायता डेस्क, बाल सहायता डेस्क, वरिष्ठ नागरिक डेस्क, ट्रांसजेंडर सहायता डेस्क, दिव्यांग डेस्क, साइबर अपराध सहायता डेस्क और कानूनी सहायता डेस्क।

इसके अतिरिक्त थानों में ऑनलाइन सेवाएँ, आवेदन सहायता, आरटीआई से जुड़ी जानकारी और एफआईआर की प्रतियाँ प्राप्त करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे पहले ही लगाए जा चुके हैं।

नेतृत्व में बड़ा बदलाव: युवा SHO की तैनाती

इस पहल के साथ-साथ 14 अगस्त से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव भी लागू किया गया है — युवा सब-इंस्पेक्टरों को स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। इनमें 63 महिला सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं, जो पहली बार SHO की भूमिका में कार्यभार संभालेंगी।

यह ऐसे समय में आया है जब केरल पुलिस पर हिरासत में हुई मौतों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

सरकार की प्रतिक्रिया और दृष्टिकोण

उद्घाटन समारोह में गृह मंत्री रमेश चेन्निथला, स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन (स्थानीय विधायक) और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

चेन्निथला ने कहा, 'केरल में पुलिस थानों का रंग भले ही एक जैसा हो जाए, लेकिन असली बदलाव उनके काम करने के तरीके में होना चाहिए।' उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के गिरफ्तारी और पुलिस प्रक्रियाओं संबंधी निर्देशों के कड़ाई से पालन पर भी जोर दिया।

गौरतलब है कि चेन्निथला ने राज्य के प्रमुख मादक पदार्थ विरोधी अभियान 'ऑपरेशन तूफान' का उल्लेख करते हुए कहा कि जनभागीदारी से बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ

यह पहल ऐसे समय में आई है जब केरल पुलिस तकनीकी और सामाजिक बदलावों के साथ खुद को ढालती रही है। इस अवसर पर यह भी स्मरण किया गया कि भारत का पहला महिला पुलिस स्टेशन केरल के कोझिकोड में स्थापित किया गया था — एक ऐसी विरासत जिसे यह नई पहल और आगे ले जाने का प्रयास करती है।

पुलिसकर्मियों का मानसिक स्वास्थ्य भी एजेंडे पर

चेन्निथला ने यह भी घोषणा की कि सरकार पुलिस कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर विशेष ध्यान देगी। अधिकारियों में आत्महत्या की प्रवृत्ति रोकने के उद्देश्य से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री सतीशन के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य एक ऐसी पुलिस व्यवस्था तैयार करना है जो जनता के अनुकूल, तकनीक-आधारित, जवाबदेह और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरे — और 'माई पुलिस स्टेशन' इस दिशा में पहला ठोस कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन है — केरल में पुलिस हिरासत में मौतों की घटनाएँ बताती हैं कि ढाँचागत सुधार और सांस्कृतिक बदलाव में फ़र्क होता है। 8 डेस्क और CCTV लगाना दृश्यमान कदम हैं, परंतु जब तक शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और जवाबदेही तंत्र को स्वतंत्र रूप से मापा नहीं जाएगा, यह पहल 'रीब्रांडिंग' से आगे नहीं जाएगी। 63 महिला SHO की नियुक्ति सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह देखना होगा कि उन्हें संसाधन और स्वायत्तता दोनों मिलती हैं या नहीं।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'माई पुलिस स्टेशन' पहल क्या है?
यह केरल सरकार की एक पहल है जिसके तहत राज्य के 484 पुलिस थानों को नागरिक-अनुकूल और तकनीक-आधारित केंद्रों में बदला जाएगा। इसकी शुरुआत 14 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने तिरुवनंतपुरम के पेरूरकडा थाने से की।
इस पहल के तहत थानों में कौन-कौन से डेस्क होंगे?
प्रत्येक थाने में 8 सहायता डेस्क स्थापित किए जाएंगे — शिकायत, महिला, बाल, वरिष्ठ नागरिक, ट्रांसजेंडर, दिव्यांग, साइबर अपराध और कानूनी सहायता डेस्क। इसके अलावा ऑनलाइन सेवाएँ, RTI जानकारी और FIR की प्रतियाँ प्राप्त करने की सुविधा भी मिलेगी।
केरल पुलिस में महिला SHO की नियुक्ति क्यों अहम है?
इस पहल के साथ 63 महिला सब-इंस्पेक्टरों को पहली बार SHO के रूप में नियुक्त किया जा रहा है, जो थाना प्रबंधन में महिला नेतृत्व की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह भारत के पहले महिला पुलिस स्टेशन की स्थापना की केरल की विरासत को आगे बढ़ाता है।
पुलिस हिरासत में मौतों पर सरकार का क्या रुख है?
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने स्पष्ट किया कि सरकार भविष्य में हिरासत में मौतों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी थानों में CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के कड़ाई से पालन पर जोर दिया गया है।
इस पहल से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
नागरिक अब बिना भय या झिझक के थाने में शिकायत दर्ज करा सकेंगे और विशेष डेस्क के माध्यम से तत्काल सहायता पा सकेंगे। ऑनलाइन सेवाएँ, RTI सहायता और FIR की प्रतियाँ आसानी से उपलब्ध होने से पारदर्शिता और पहुँच दोनों बढ़ेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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