केरल में 'माई पुलिस स्टेशन' सुधार लागू: 419 थानों में SI बनेंगे SHO, 63 स्टेशनों की कमान महिलाओं को
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार ने 6 अगस्त 2026 को राज्य के पुलिसिंग ढाँचे में व्यापक बदलाव की घोषणा की, जिसके तहत 484 लॉ एंड ऑर्डर पुलिस स्टेशनों में से 419 में सर्कल इंस्पेक्टर की जगह सब-इंस्पेक्टर को स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) नियुक्त किया जाएगा। इसके साथ ही स्वतंत्रता दिवस से 'माई पुलिस स्टेशन' नामक नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग कार्यक्रम की शुरुआत होगी। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इसे लोकतांत्रिक पुलिसिंग के एक नए युग की शुरुआत बताया।
सुधार की मुख्य संरचना
नई व्यवस्था में 419 थानों में सब-इंस्पेक्टर SHO की भूमिका निभाएँगे, जबकि 64 रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण थानों की जिम्मेदारी सर्कल इंस्पेक्टरों के पास ही बनी रहेगी। मुल्लापेरियार पुलिस स्टेशन अपनी विशेष रणनीतिक अहमियत के कारण डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) के अधिकार क्षेत्र में रहेगा। यह निर्णय पिछली सरकार के उस फैसले को पलटता है जिसमें SHO की जिम्मेदारी सर्कल इंस्पेक्टरों को सौंपी गई थी।
निगरानी के लिए 200 नए पुलिस सर्कल गठित किए जाएँगे, जहाँ सर्कल इंस्पेक्टर नवनियुक्त SHO को मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण देंगे।
महिला नेतृत्व को बढ़ावा
इस सुधार की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि पहली बार 63 पुलिस स्टेशनों की कमान महिला सब-इंस्पेक्टरों को सौंपी जाएगी। यह राज्य पुलिस में महिला नेतृत्व को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
हिरासत अपराध और जनसेवा पर जोर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए पुलिसिंग मॉडल का एक प्रमुख उद्देश्य हिरासत में होने वाले अपराधों — जिनमें हिरासत में मौत और यातना शामिल हैं — को पूरी तरह समाप्त करना है। सरकार ने 'थर्ड-डिग्री' तरीकों को लोकतांत्रिक समाज में गैर-कानूनी, अमानवीय और अस्वीकार्य करार दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पुलिस हिरासत में होने वाली घटनाओं को लेकर न्यायिक और नागरिक समाज की जाँच तेज हुई है।
नागरिक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए थानों में समयबद्ध, सम्मानजनक और कुशल सेवा सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया है।
प्रशिक्षण और सामुदायिक पुलिसिंग
नवनियुक्त SHO, थाना कर्मचारियों और पर्यवेक्षी अधिकारियों को चरणबद्ध ओरिएंटेशन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें जनसंपर्क, नेतृत्व और प्रौद्योगिकी-आधारित पुलिसिंग पर विशेष ध्यान होगा। साइबर अपराध — विशेष रूप से लोन-ऐप फ्रॉड और ऑनलाइन वित्तीय घोटालों — से निपटने पर भी प्रशिक्षण में जोर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि सरकार दो दशक पुराने 'जनमैत्री सुरक्षा प्रोजेक्ट' को पुनर्जीवित करने की भी योजना बना रही है, यह मानते हुए कि पिछले कुछ वर्षों में सामुदायिक पुलिसिंग काफी हद तक औपचारिक और यांत्रिक हो गई थी।
जवाबदेही तंत्र और आगे की राह
इस सुधार के तहत एक स्वतंत्र फीडबैक प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिसमें रेंज DIG प्रत्येक थाने से जनता की मासिक प्रतिक्रिया एकत्र और समीक्षा करेंगे। ADGP (कानून-व्यवस्था) राज्य पुलिस प्रमुख की देखरेख में पूरी परियोजना का समन्वय करेंगे और सरकार को मासिक प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे। यदि इस पहल को पूरी निष्ठा और सही भावना के साथ लागू किया गया, तो यह केरल पुलिस में संरचनात्मक और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर दूरगामी बदलाव ला सकती है।