16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

केरल में सतीशन सरकार का ऐलान: स्कूली छात्राओं को मिलेगा मासिक धर्म अवकाश, महिला-अनुकूल राज्य बनाने का संकल्प

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
केरल में सतीशन सरकार का ऐलान: स्कूली छात्राओं को मिलेगा मासिक धर्म अवकाश, महिला-अनुकूल राज्य बनाने का संकल्प

सारांश

केरल की नई यूडीएफ सरकार ने पहले ही नीतिगत संबोधन में स्कूली छात्राओं को मासिक धर्म अवकाश, महिला श्रमिकों को समान वेतन और छह माह मातृत्व अवकाश देने का वादा किया। 'मासिक धर्म गरिमा' और 'अनाथ मुक्त केरल' जैसी पहलें मुख्यमंत्री सतीशन की सामाजिक प्राथमिकताओं की झलक देती हैं।

मुख्य बातें

सतीशन की यूडीएफ सरकार ने 29 मई 2026 को पहले नीतिगत संबोधन में महिला-केंद्रित घोषणाएँ कीं।
स्कूली छात्राओं को हर महीने तीन दिन तक ' मासिक धर्म अवकाश ' देने का प्रस्ताव; पढ़ाई के लिए सप्ताहांत में कैच-अप कक्षाएं ।
असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों को छह महीने का मातृत्व अवकाश और कार्यस्थलों पर समान वेतन का वादा।
50 से अधिक कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों में डे-केयर सेंटर और क्रेच अनिवार्य किए जाएंगे।
' बेसहारा और अनाथ मुक्त केरल ' पहल — केरल को भारत का पहला अनाथ-मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य।

केरल में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली कांग्रेस-नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार ने 29 मई 2026 को महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। सबसे चर्चित प्रस्ताव यह रहा कि स्कूली छात्राओं को हर महीने तीन दिन तक 'मासिक धर्म अवकाश' दिया जाएगा। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विधानसभा में अपने पहले नीतिगत संबोधन के दौरान इन घोषणाओं की औपचारिक जानकारी दी।

मासिक धर्म गरिमा पहल: क्या है योजना

'मासिक धर्म गरिमा' नामक इस व्यापक पहल का उद्देश्य स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों को लड़कियों तथा महिलाओं के लिए अधिक संवेदनशील और सुविधाजनक बनाना है। सरकार के अनुसार, अवकाश के दौरान छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए सप्ताहांत में विशेष 'कैच-अप' कक्षाएं भी आयोजित की जाएंगी। यह प्रस्ताव नई सरकार के पहले विधायी सत्र की सबसे उल्लेखनीय सामाजिक घोषणाओं में से एक माना जा रहा है।

महिला श्रमिकों के लिए व्यापक कल्याण उपाय

नीतिगत संबोधन में कार्यस्थलों पर महिलाओं को समान वेतन देने के उपायों का वादा किया गया। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के लिए विशेष कल्याणकारी सुविधाएँ और औपचारिक रोज़गार व्यवस्था से बाहर काम करने वाली महिला श्रमिकों को छह महीने का मातृत्व अवकाश देने का भी प्रस्ताव रखा गया। सरकार ने प्रमुख शहरों में सार्वजनिक शौचालय सुविधाएँ बढ़ाने और महिलाओं के लिए सैनिटरी नैपकिन, जूते-चप्पल तथा अन्य ज़रूरी सामान उपलब्ध कराने की योजनाओं की भी घोषणा की।

'बेसहारा और अनाथ मुक्त केरल' की महत्वाकांक्षी पहल

सरकार ने 'बेसहारा और अनाथ मुक्त केरल' नामक एक अभियान शुरू करने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य केरल को भारत का पहला अनाथ-मुक्त राज्य बनाना है। किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों से प्रेरित यह कार्यक्रम संस्थागत देखभाल की जगह समुदाय आधारित देखभाल पर ज़ोर देता है। इसके तहत बड़े पैमाने पर गोद लेने का अभियान चलाने और प्रशिक्षित पालक परिवारों का नेटवर्क तैयार करने का प्रस्ताव है।

कार्यस्थलों पर डे-केयर और क्रेच अनिवार्य

नीतिगत संबोधन में मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत बाल देखभाल नियमों को सख्ती से लागू करने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसके अनुसार सार्वजनिक कार्यालयों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, आईटी पार्कों और 50 से अधिक कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों में सुरक्षित डे-केयर सेंटर और शिशु गृह (क्रेच) अनिवार्य किए जाएंगे। यह घोषणा कार्यरत माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखी जा रही है।

आगे की राह

सरकार ने केरल को देश का सबसे अधिक महिला-अनुकूल राज्य बनाने का संकल्प लिया है। यह घोषणाएँ नई यूडीएफ सरकार की प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत देती हैं — अब देखना यह होगा कि इन नीतिगत वादों को ज़मीन पर उतारने के लिए विधायी और बजटीय ढाँचा किस रूप में सामने आता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। मासिक धर्म अवकाश का विचार सराहनीय है, पर यह सुनिश्चित करना कि 'कैच-अप कक्षाएं' वास्तव में उपलब्ध हों और छात्राओं पर अतिरिक्त बोझ न बनें — यह सरकार के लिए पहली चुनौती होगी। असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को छह माह मातृत्व अवकाश का वादा महत्वाकांक्षी है, क्योंकि इस वर्ग तक सरकारी योजनाएँ ऐतिहासिक रूप से कम पहुँची हैं। 'अनाथ मुक्त केरल' जैसी पहल के लिए पर्याप्त पालक परिवारों और संसाधनों की उपलब्धता एक बड़ा प्रश्न है, जिसका उत्तर आने वाले बजट और विधायी ढाँचे में मिलेगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में मासिक धर्म अवकाश योजना क्या है?
केरल की यूडीएफ सरकार ने 'मासिक धर्म गरिमा' पहल के तहत स्कूली छात्राओं को हर महीने तीन दिन तक मासिक धर्म अवकाश देने का प्रस्ताव रखा है। पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए सप्ताहांत में विशेष कैच-अप कक्षाएं भी आयोजित की जाएंगी।
यह घोषणा किसने और कब की?
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने 29 मई 2026 को विधानसभा में अपने पहले नीतिगत संबोधन के दौरान यह घोषणा की। यह मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार के पहले विधायी सत्र की प्रमुख नीतिगत घोषणा थी।
असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए क्या घोषणाएँ हुई हैं?
सरकार ने औपचारिक रोज़गार व्यवस्था से बाहर काम करने वाली महिला श्रमिकों को छह महीने का मातृत्व अवकाश देने का वादा किया है। इसके अलावा कार्यस्थलों पर समान वेतन और असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए विशेष कल्याणकारी सुविधाओं का भी प्रस्ताव है।
'बेसहारा और अनाथ मुक्त केरल' पहल क्या है?
यह सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका लक्ष्य केरल को भारत का पहला अनाथ-मुक्त राज्य बनाना है। किशोर न्याय अधिनियम से प्रेरित इस कार्यक्रम में संस्थागत देखभाल की जगह समुदाय आधारित देखभाल, बड़े पैमाने पर गोद लेने का अभियान और प्रशिक्षित पालक परिवारों का नेटवर्क तैयार करना शामिल है।
कार्यस्थलों पर डे-केयर और क्रेच संबंधी नए नियम क्या हैं?
मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत 50 से अधिक कर्मचारियों वाले सार्वजनिक कार्यालयों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आईटी पार्कों में सुरक्षित डे-केयर सेंटर और शिशु गृह (क्रेच) अनिवार्य किए जाएंगे। यह नियम कार्यरत माताओं को बाल देखभाल की सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले