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केरल पुलिस की नई पहल: हर महीने के चौथे शनिवार को 'प्रशंसा दिवस', बेहतरीन अधिकारियों और नागरिकों को मिलेगा सम्मान

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केरल पुलिस की नई पहल: हर महीने के चौथे शनिवार को 'प्रशंसा दिवस', बेहतरीन अधिकारियों और नागरिकों को मिलेगा सम्मान

सारांश

केरल पुलिस ने हर महीने के चौथे शनिवार को 'प्रशंसा दिवस' मनाने की घोषणा की है, जिसमें बेहतरीन सेवा देने वाले पुलिसकर्मियों और सार्वजनिक सुरक्षा में योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित किया जाएगा। यह पहल पुलिस-जन संबंधों को मज़बूत करने और जनभागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ठोस संस्थागत कदम है।

मुख्य बातें

केरल पुलिस ने राज्य के सभी जिलों में हर महीने के चौथे शनिवार को 'प्रशंसा दिवस' मनाने की घोषणा की है।
बेहतरीन आचरण, बहादुरी, जांच कौशल या असाधारण समर्पण दिखाने वाले पुलिसकर्मी और सार्वजनिक सुरक्षा में योगदान देने वाले नागरिक सम्मान के पात्र होंगे।
लॉ एंड ऑर्डर ADGP पी.
विजयन ने सभी जिला पुलिस प्रमुखों को कार्यक्रम आयोजन के निर्देश दिए हैं।
सम्मान के रूप में प्रशंसा-पत्र , स्मृति-चिह्न या अन्य उचित माध्यम अपनाए जाएँगे।
प्रत्येक जिले को सम्मानित व्यक्तियों का मासिक रिकॉर्ड रखना होगा और रिपोर्ट अगले महीने के पहले दिन से पहले ADGP कार्यालय को सौंपनी होगी।

केरल पुलिस ने तिरुवनंतपुरम से एक नई और सराहनीय पहल की शुरुआत की है, जिसके तहत राज्य के सभी पुलिस जिलों में अब हर महीने के चौथे शनिवार को 'प्रशंसा दिवस' मनाया जाएगा। इस आयोजन में उन पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने असाधारण सेवा, बहादुरी, जांच कौशल या सार्वजनिक सुरक्षा में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। यह पहल पुलिस और नागरिकों के बीच विश्वास और सहयोग की नई संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पहल का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

कानून-व्यवस्था के अतिरिक्त महानिदेशक (ADGP) पी. विजयन ने राज्य के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश जारी किए हैं कि वे जिला या यूनिट मुख्यालयों पर प्रत्येक माह यह कार्यक्रम आयोजित करें। इस पहल का मूल उद्देश्य सराहनीय कार्यों को सार्वजनिक मान्यता देना, पुलिसकर्मियों का मनोबल ऊँचा रखना और पुलिसिंग में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

गौरतलब है कि भारत के कई राज्यों में पुलिस-जन संबंधों को लेकर समय-समय पर चिंताएँ उठती रही हैं। ऐसे में केरल पुलिस की यह संस्थागत पहल उस परंपरागत धारणा को बदलने का प्रयास करती है, जिसमें पुलिस को केवल दंड और नियंत्रण की एजेंसी माना जाता है।

कौन होंगे सम्मान के पात्र

हर महीने के दौरान बेहतरीन सेवा देने वाले पुलिसकर्मी इस सम्मान के लिए चुने जाएँगे। इनमें वे अधिकारी शामिल होंगे जिन्होंने:

बेहतरीन आचरण का प्रदर्शन किया हो, जांच में विशेष कौशल दिखाया हो, बहादुरी के काम किए हों, या ड्यूटी में असाधारण समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया हो। इसके साथ ही, वे आम नागरिक भी सम्मान के पात्र होंगे जिन्होंने सार्वजनिक सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई हो या पुलिस को किसी महत्त्वपूर्ण मामले में बहुमूल्य सहयोग दिया हो।

आयोजन की संरचना और प्रक्रिया

प्रत्येक कार्यक्रम में सम्मान के रूप में प्रशंसा-पत्र, स्मृति-चिह्न या अन्य उचित माध्यम अपनाए जाएँगे। इन आयोजनों में पुलिसकर्मी, उनके सहयोगी और आम जनता की उपस्थिति अपेक्षित है। जिला पुलिस प्रमुखों को इन कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से भाग लेने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, जोनल इंस्पेक्टर जनरल और रेंज डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल से भी यथासंभव इन आयोजनों में शामिल होने का आग्रह किया गया है।

यदि किसी कारणवश चौथे शनिवार को कार्यक्रम न हो सके, तो उसे उसी महीने के भीतर पहले आयोजित करना अनिवार्य होगा।

दस्तावेज़ीकरण और जवाबदेही

निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक जिले को सम्मानित अधिकारियों और नागरिकों का मासिक रिकॉर्ड रखना होगा, साथ ही उस विशेष कार्य या योगदान का विवरण भी संरक्षित करना होगा जिसके लिए सम्मान दिया गया। कार्यक्रमों की रिपोर्ट और तस्वीरें अगले महीने के पहले दिन से पहले लॉ एंड ऑर्डर ADGP कार्यालय को सौंपी जानी चाहिए। यह व्यवस्था पहल की पारदर्शिता और निरंतरता सुनिश्चित करती है।

आगे क्या

यह पहल केरल पुलिस की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा प्रतीत होती है जिसमें पुलिस-जन संबंधों को संस्थागत रूप से मज़बूत किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक सम्मान की संस्कृति न केवल पुलिसकर्मियों को प्रेरित करती है, बल्कि नागरिकों को भी सुरक्षा-तंत्र का सक्रिय हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित करती है। पहले 'प्रशंसा दिवस' के आयोजन और उसके परिणामों पर निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी सफलता केवल आयोजन की नियमितता पर नहीं, बल्कि चयन-प्रक्रिया की निष्पक्षता पर निर्भर करेगी — अगर सम्मान वरिष्ठता या आंतरिक लॉबिंग के आधार पर मिले, तो यह उद्देश्य को खोखला कर देगा। भारत में पुलिस सुधारों की लंबी सूची में अधिकांश पहलें 'नीति पर कागज़' तक सिमट जाती हैं; असली कसौटी यह होगी कि क्या एक साल बाद भी यह कार्यक्रम उतने ही उत्साह से जारी है। नागरिकों को सम्मान में शामिल करना एक स्मार्ट कदम है — सामुदायिक पुलिसिंग के अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि जनता की सहभागिता से अपराध-सूचना तंत्र मज़बूत होता है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल पुलिस का 'प्रशंसा दिवस' क्या है?
यह केरल पुलिस की एक नई मासिक पहल है, जिसके तहत राज्य के सभी पुलिस जिलों में हर महीने के चौथे शनिवार को बेहतरीन सेवा देने वाले पुलिसकर्मियों और सार्वजनिक सुरक्षा में योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित किया जाएगा। इसका उद्देश्य अच्छे कार्यों को सार्वजनिक मान्यता देना और पुलिस-जन संबंधों को मज़बूत करना है।
'प्रशंसा दिवस' पर किन्हें सम्मानित किया जाएगा?
बेहतरीन आचरण, जांच कौशल, बहादुरी या असाधारण समर्पण दिखाने वाले पुलिसकर्मी और ऐसे नागरिक जिन्होंने सार्वजनिक सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया हो या पुलिस को बहुमूल्य सहयोग दिया हो, सम्मान के पात्र होंगे।
यह कार्यक्रम कितनी बार और कहाँ आयोजित होगा?
यह कार्यक्रम हर महीने के चौथे शनिवार को राज्य के सभी जिला या यूनिट मुख्यालयों पर आयोजित किया जाएगा। यदि चौथे शनिवार को संभव न हो, तो उसी महीने के भीतर पहले आयोजित करना अनिवार्य होगा।
इस पहल की निगरानी कैसे होगी?
प्रत्येक जिला सम्मानित अधिकारियों और नागरिकों का मासिक रिकॉर्ड रखेगा। कार्यक्रमों की रिपोर्ट और तस्वीरें अगले महीने के पहले दिन से पहले लॉ एंड ऑर्डर ADGP कार्यालय को सौंपी जाएँगी।
इस पहल से पुलिस और जनता को क्या फायदा होगा?
इस पहल से पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा और उन्हें बेहतर सेवा के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही नागरिकों को सम्मान में शामिल करने से सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा मिलेगा और पुलिस-जन सहयोग की संस्कृति मज़बूत होगी।
राष्ट्र प्रेस
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