केजीएमयू की मांग: हाजी हरमन शाह मजार का अवैध बिजली कनेक्शन रद्द हो, एनओसी के बिना कनेक्शन पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ ने हाजी हरमन शाह मजार को दिए गए घरेलू बिजली कनेक्शन को तत्काल रद्द करने की मांग की है। विश्वविद्यालय का आरोप है कि यह कनेक्शन केजीएमयू की भूमि पर बिना उसकी अनापत्ति (एनओसी) के और गलत दस्तावेजों के आधार पर जारी किया गया। 28 जुलाई को सामने आए इस विवाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को सूचित कर कनेक्शन पर रोक लगवा दी है।
मजार और भूमि विवाद की पृष्ठभूमि
केजीएमयू के प्रवक्ता केके सिंह ने बताया कि हाजी हरमन शाह मजार करीब ढाई हजार वर्ग फीट क्षेत्र में बनी है। इसके चारों ओर लगभग 20 हजार वर्ग फीट भूमि केजीएमयू की है, जिस पर लंबे समय से अनाधिकृत कब्जा था।
उन्होंने बताया कि करीब ढाई साल पहले यह कब्जा हटाकर भूमि को विश्वविद्यालय के नियंत्रण में लिया गया। मजार से जुड़े पक्षों ने स्वामित्व पाने के लिए दो बार उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, किंतु दोनों बार न्यायालय ने अर्जी निरस्त कर दी। इससे उस भूमि का स्वामित्व अविवादित रूप से केजीएमयू का सिद्ध हो चुका है।
24 जुलाई को कनेक्शन जोड़े जाने पर उठे सवाल
केके सिंह ने बताया कि 24 जुलाई को नोडल अधिकारी के रूप में उन्हें सूचना मिली कि मजार परिसर में बिजली का कनेक्शन जोड़ा जा रहा है। विश्वविद्यालय ने अपने पीआरओ को भेजा, जिन्हें मजार की देखरेख करने वाले पक्ष ने एक पत्र दिया और बताया कि कनेक्शन मिल चुका है।
जाँच में दो प्रमुख आपत्तियाँ सामने आईं — पहली, केजीएमयू की स्वामित्व वाली भूमि पर कनेक्शन के लिए विश्वविद्यालय से एनओसी नहीं ली गई; दूसरी, व्यावसायिक उपयोग वाले स्थान के लिए कमर्शियल के बजाय घरेलू कनेक्शन जारी किया गया।
पुलिस और बिजली विभाग को दी गई सूचना
केजीएमयू प्रशासन ने तत्काल पुलिस को सूचित किया और बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) से संपर्क किया। प्रवक्ता के अनुसार, जेई कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद पुलिस को बुलाकर कनेक्शन पर रोक लगाई गई और सभी सक्षम अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई।
आगे क्या होगा
केजीएमयू ने बिजली विभाग से कनेक्शन रद्द करने और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग की है। यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब विश्वविद्यालय परिसर में अतिक्रमण और भूमि विवाद पहले से चर्चा में हैं। मामले की आगे की जाँच और कार्रवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।