28 जुलाई 2026
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केजीएमयू की मांग: हाजी हरमन शाह मजार का अवैध बिजली कनेक्शन रद्द हो, एनओसी के बिना कनेक्शन पर उठे सवाल

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केजीएमयू की मांग: हाजी हरमन शाह मजार का अवैध बिजली कनेक्शन रद्द हो, एनओसी के बिना कनेक्शन पर उठे सवाल

सारांश

लखनऊ में केजीएमयू और हाजी हरमन शाह मजार के बीच भूमि विवाद अब बिजली कनेक्शन पर आ टिका है। विश्वविद्यालय का आरोप है कि उसकी एनओसी के बिना और गलत दस्तावेजों पर घरेलू कनेक्शन जारी हुआ — जबकि उच्च न्यायालय दो बार भूमि पर केजीएमयू का स्वामित्व पुष्ट कर चुका है।

मुख्य बातें

केजीएमयू ने हाजी हरमन शाह मजार का घरेलू बिजली कनेक्शन रद्द करने की माँग की है।
मजार के चारों ओर करीब 20 हजार वर्ग फीट भूमि पर केजीएमयू का स्वामित्व उच्च न्यायालय द्वारा दो बार पुष्ट किया जा चुका है।
24 जुलाई को केजीएमयू की एनओसी के बिना और कमर्शियल के बजाय घरेलू कनेक्शन जारी होने पर आपत्ति दर्ज की गई।
बिजली विभाग के जेई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके; पुलिस को बुलाकर कनेक्शन पर रोक लगाई गई।
केजीएमयू ने सभी सक्षम अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर कानूनी कार्रवाई की माँग की है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ ने हाजी हरमन शाह मजार को दिए गए घरेलू बिजली कनेक्शन को तत्काल रद्द करने की मांग की है। विश्वविद्यालय का आरोप है कि यह कनेक्शन केजीएमयू की भूमि पर बिना उसकी अनापत्ति (एनओसी) के और गलत दस्तावेजों के आधार पर जारी किया गया। 28 जुलाई को सामने आए इस विवाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को सूचित कर कनेक्शन पर रोक लगवा दी है।

मजार और भूमि विवाद की पृष्ठभूमि

केजीएमयू के प्रवक्ता केके सिंह ने बताया कि हाजी हरमन शाह मजार करीब ढाई हजार वर्ग फीट क्षेत्र में बनी है। इसके चारों ओर लगभग 20 हजार वर्ग फीट भूमि केजीएमयू की है, जिस पर लंबे समय से अनाधिकृत कब्जा था।

उन्होंने बताया कि करीब ढाई साल पहले यह कब्जा हटाकर भूमि को विश्वविद्यालय के नियंत्रण में लिया गया। मजार से जुड़े पक्षों ने स्वामित्व पाने के लिए दो बार उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, किंतु दोनों बार न्यायालय ने अर्जी निरस्त कर दी। इससे उस भूमि का स्वामित्व अविवादित रूप से केजीएमयू का सिद्ध हो चुका है।

24 जुलाई को कनेक्शन जोड़े जाने पर उठे सवाल

केके सिंह ने बताया कि 24 जुलाई को नोडल अधिकारी के रूप में उन्हें सूचना मिली कि मजार परिसर में बिजली का कनेक्शन जोड़ा जा रहा है। विश्वविद्यालय ने अपने पीआरओ को भेजा, जिन्हें मजार की देखरेख करने वाले पक्ष ने एक पत्र दिया और बताया कि कनेक्शन मिल चुका है।

जाँच में दो प्रमुख आपत्तियाँ सामने आईं — पहली, केजीएमयू की स्वामित्व वाली भूमि पर कनेक्शन के लिए विश्वविद्यालय से एनओसी नहीं ली गई; दूसरी, व्यावसायिक उपयोग वाले स्थान के लिए कमर्शियल के बजाय घरेलू कनेक्शन जारी किया गया।

पुलिस और बिजली विभाग को दी गई सूचना

केजीएमयू प्रशासन ने तत्काल पुलिस को सूचित किया और बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) से संपर्क किया। प्रवक्ता के अनुसार, जेई कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद पुलिस को बुलाकर कनेक्शन पर रोक लगाई गई और सभी सक्षम अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई।

आगे क्या होगा

केजीएमयू ने बिजली विभाग से कनेक्शन रद्द करने और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग की है। यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब विश्वविद्यालय परिसर में अतिक्रमण और भूमि विवाद पहले से चर्चा में हैं। मामले की आगे की जाँच और कार्रवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केजीएमयू और हाजी हरमन शाह मजार के बीच विवाद क्या है?
केजीएमयू का आरोप है कि मजार परिसर के चारों ओर लगभग 20 हजार वर्ग फीट भूमि पर लंबे समय से अनाधिकृत कब्जा था, जिसे ढाई साल पहले हटाया गया। उच्च न्यायालय ने दो बार मजार पक्ष की याचिका निरस्त कर केजीएमयू का स्वामित्व पुष्ट किया है।
बिजली कनेक्शन पर केजीएमयू को क्या आपत्ति है?
केजीएमयू को दो आपत्तियाँ हैं — पहली, विश्वविद्यालय की भूमि पर कनेक्शन के लिए उससे एनओसी नहीं ली गई; दूसरी, व्यावसायिक स्थल के लिए कमर्शियल की जगह घरेलू कनेक्शन जारी किया गया। विश्वविद्यालय का कहना है कि दस्तावेज़ भी गलत थे।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
24 जुलाई को कनेक्शन की जानकारी मिलने पर केजीएमयू ने पुलिस को सूचित किया और बिजली विभाग के जेई से संपर्क किया। जेई के असंतोषजनक जवाब के बाद पुलिस बुलाकर कनेक्शन पर रोक लगाई गई और सभी सक्षम अधिकारियों को शिकायत दी गई।
उच्च न्यायालय ने इस भूमि के बारे में क्या फैसला दिया है?
मजार से जुड़े पक्षों ने भूमि स्वामित्व के लिए दो बार उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, लेकिन दोनों बार न्यायालय ने अर्जी निरस्त कर दी। इससे विवादित भूमि पर केजीएमयू का स्वामित्व अविवादित रूप से स्थापित है।
केजीएमयू आगे क्या कदम उठाएगा?
केजीएमयू ने बिजली कनेक्शन रद्द करने और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत भेज दी है और मामले में आगे की कार्रवाई प्रतीक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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