रोशन आनंद को पटना सिविल कोर्ट से जमानत, अधिवक्ता का दावा — खान सर ने स्क्रिप्टेड स्टोरी से फंसाया
सारांश
मुख्य बातें
पटना सिविल कोर्ट ने 15 जून 2026 को कोचिंग विवाद मामले में ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रोशन आनंद को जमानत प्रदान कर दी। उनके अधिवक्ता निरंजन कुमार सिंह ने दावा किया कि आरोप कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं थे और उनके मुवक्किल को एक 'स्क्रिप्टेड स्टोरी' के ज़रिये झूठा फंसाया गया।
जमानत का आधार और कानूनी विसंगतियाँ
अधिवक्ता निरंजन कुमार सिंह ने बताया कि जैसे ही उन्होंने इस प्रकरण के रिकॉर्ड का अध्ययन किया, कई गंभीर कानूनी खामियाँ स्पष्ट हो गईं। उनके अनुसार, एक ही घटना और एक ही कारण के आधार पर दो अलग-अलग मामले और धाराएँ लागू की गई हैं, जो विधि-सम्मत नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक जाँच के दौरान वास्तविक परिस्थितियाँ और पुलिस रिपोर्ट में दर्ज विवरण पूरी तरह एकसमान नहीं पाए गए। डिजिटल साक्ष्यों और रिकॉर्डेड सामग्री के आधार पर भी कुछ ऐसे बिंदु सामने आए, जिन्हें उन्होंने अदालत के समक्ष मज़बूती से प्रस्तुत किया।
खान सर पर अधिवक्ता का आरोप
अधिवक्ता निरंजन कुमार सिंह ने कहा, 'खान सर एक बड़े कलाकार हैं जिन्होंने स्क्रिप्टेड स्टोरी के ज़रिये निर्दोष रोशन आनंद को फंसाया। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे जनता प्रभावित हुई।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत रूप से खान सर का सम्मान करते हैं, परंतु जब वास्तविक तथ्य सामने आए तो अदालत ने भी कुछ टिप्पणियाँ कीं।
गौरतलब है कि यह विवाद पटना के कोचिंग क्षेत्र में काफी चर्चित रहा है और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ। अधिवक्ता का कहना है कि मीडिया रिपोर्टों में प्रस्तुत जानकारी कई बार वास्तविक स्थिति से भिन्न प्रतीत हुई।
गौरव अभिषेक के लिए भी जमानत याचिका
अधिवक्ता निरंजन कुमार सिंह ने बताया कि वे गौरव अभिषेक के लिए भी जमानत याचिका दाखिल कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट से राहत मिलेगी, क्योंकि उनके खिलाफ कोई मज़बूत धाराएँ नहीं बनती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि एक ही घटना के लिए बार-बार अलग-अलग केस दर्ज करना कानूनी रूप से उचित नहीं है। इस पर आपत्ति दर्ज करते हुए वे आवश्यकतानुसार उच्च न्यायालय का भी दरवाज़ा खटखटाएंगे।
सीबीआई जाँच और हर्जाने की माँग
अधिवक्ता ने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो वे सीबीआई जाँच की भी माँग करेंगे, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनके अनुसार इस मामले का प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है — इससे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। इसीलिए वे हर्जाने की माँग भी करेंगे।
अधिवक्ता निरंजन कुमार सिंह ने अंत में कहा कि उनका स्पष्ट उद्देश्य है कि सच्चाई सामने आए, निष्पक्ष जाँच हो और जो निर्दोष हैं उन्हें न्याय मिले — तथा जो दोषी हैं उन्हें कानून के अनुसार सज़ा मिले।