खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर पटना कोर्ट का फैसला सुरक्षित, गिरफ्तारी की तलवार बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
पटना के चर्चित कोचिंग संचालक फैसल खान उर्फ खान सर की मुश्किलें 8 जून 2026 को और गहरी हो गईं, जब पटना सिविल कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। कोचिंग सेंटर विवाद मामले में पुलिस की एक टीम उनकी गिरफ्तारी के लिए सक्रिय है।
मुख्य घटनाक्रम
खान सर के अधिवक्ता अरविंद कुमार महुआर ने पटना सिविल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, जिस पर दोपहर 12:30 बजे सुनवाई हुई। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए संकेत दिया कि निर्णय उसी दिन या अगले दिन सुनाया जा सकता है। महुआर ने बताया कि मामले में विस्तृत सुनवाई मंगलवार को निर्धारित है।
एफआईआर और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
विवाद की शुरुआत कोचिंग सेंटर पर हुए कथित हमले से हुई, जिसकी शिकायत खान सर ने स्वयं दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने अन्य कोचिंग संचालक रौशन कुमार को गिरफ्तार किया। हालांकि, खान सर ने फायरिंग का दावा किया था, जाँच के निष्कर्षों और बरामद हथियारों के आधार पर पुलिस ने खान सर सहित दो अन्य लोगों के विरुद्ध उकसाने और आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की।
महुआर के अनुसार, ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर और अन्य पर खान सर के स्टाफ द्वारा पहले केस दर्ज कराया गया, जिसके बाद पलटवार में खान सर पर भी मामला दर्ज हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों पक्षों के बीच कोचिंग उद्योग में प्रतिस्पर्धा को लेकर तनाव पहले से बना हुआ था।
कोचिंग और अस्पताल पर कार्रवाई का खतरा
पुलिस ने खान सर के कोचिंग सेंटर और अस्पताल को सुरक्षा मानकों का पालन न करने पर नोटिस जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, तय समयसीमा में मानकों को पूरा न करने पर दोनों संस्थानों को सील किया जा सकता है।
आम जनता और छात्रों पर असर
खान सर बिहार में लाखों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय शिक्षक हैं। उनके कोचिंग सेंटर पर कार्रवाई की स्थिति में हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पटना में कोचिंग संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा चरम पर है।
क्या होगा आगे
कोर्ट का फैसला आने तक खान सर की गिरफ्तारी पर अनिश्चितता बनी रहेगी। यदि अग्रिम जमानत नामंजूर होती है, तो पुलिस उन्हें तत्काल हिरासत में ले सकती है। मंगलवार की विस्तृत सुनवाई में मामले की दिशा और स्पष्ट होने की संभावना है।