खान सर की अग्रिम जमानत याचिका: पटना कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, 10 जुलाई को आएगा आदेश
सारांश
मुख्य बातें
पटना की जिला एवं सत्र न्यायालय ने 8 जुलाई 2026 को मशहूर कोचिंग शिक्षक फैसल खान, जिन्हें खान सर के नाम से जाना जाता है, की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। यह मामला एक अन्य कोचिंग संचालक रोशन आनंद के साथ हुए विवाद से जुड़ा है। अदालत का फैसला 10 जुलाई को सुनाए जाने की उम्मीद है।
मुख्य घटनाक्रम
यह सुनवाई डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रूपेश देव की अदालत में हुई। बुधवार को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने मामले के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत दलीलें पेश कीं। इससे पहले मंगलवार को भी लगभग 40 मिनट तक बहस हुई थी, लेकिन सुनवाई पूरी न हो सकने के कारण अदालत ने बुधवार का दिन तय किया था।
खान सर के अधिवक्ता रजत सिंह ने बताया कि सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें खान सर के एक बॉडीगार्ड के पास मौजूद हथियार के लाइसेंस का मसला भी शामिल था। उन्होंने यह भी बताया कि न्यायाधीश ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि यह प्रकरण काफी समय से लंबित है और शीघ्र निपटारा आवश्यक है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला 2 जून को पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र में हुई एक घटना से उपजा है, जिसमें खान सर और 'ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी' के संचालक रोशन आनंद के बीच टकराव हुआ था। आरोपों के अनुसार, इस घटना में एक सुरक्षा गार्ड के साथ मारपीट की गई और तोड़-फोड़ भी हुई।
खान सर ने आनंद पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया था। घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुआ, जिसके बाद विवाद ने कानूनी रूप ले लिया। इसी के चलते खान सर और उनके दो बॉडीगार्ड्स ने अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दायर की।
अदालती प्रक्रिया
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बुधवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षा जगत से जुड़े कानूनी विवाद सार्वजनिक बहस का केंद्र बनते जा रहे हैं। गौरतलब है कि खान सर बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले सबसे चर्चित शिक्षकों में से एक हैं और उनके लाखों छात्र हैं।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें 10 जुलाई पर टिकी हैं, जब अदालत अग्रिम जमानत याचिका पर अपना आदेश सुनाएगी। यदि याचिका स्वीकार होती है तो खान सर और उनके बॉडीगार्ड्स को गिरफ्तारी से अस्थायी संरक्षण मिलेगा; अस्वीकृति की स्थिति में कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।