खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर 20 जून को सुनवाई, रौशन आनंद के वकील का आरोप — तथ्य छिपाए गए
सारांश
मुख्य बातें
पटना के चर्चित शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर और उनके दो निजी गार्डों से जुड़े मामले में 20 जून को पटना की अदालत में निर्णायक सुनवाई होने वाली है। इस सुनवाई में खान सर की अग्रिम जमानत याचिका और दोनों गार्डों की नियमित जमानत याचिकाओं पर एक साथ विचार किया जाएगा। मामले में यह तथ्य भी उभरा है कि पुलिस द्वारा जब्त हथियारों में से एक गार्ड के पिता के नाम पर पंजीकृत है।
रौशन आनंद पक्ष की अदालती तैयारी
ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद की ओर से खान सर को मिली अंतरिम राहत का विरोध किया जाएगा। रौशन आनंद के अधिवक्ता निरंजन कुमार सिंह ने कहा कि उनकी टीम विस्तृत तैयारी के साथ अपना पक्ष प्रस्तुत करेगी और उन्हें उम्मीद है कि खान सर को मिली अंतरिम राहत समाप्त हो सकती है।
तथ्य छिपाने का आरोप
अधिवक्ता निरंजन कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि अदालत से अंतरिम राहत प्राप्त करने के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया और न्यायालय को गुमराह किया गया। उन्होंने दावा किया कि पूरा मामला सोशल मीडिया, सीसीटीवी फुटेज तथा वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से सार्वजनिक हो चुका है। सिंह ने कहा कि न्यायपालिका पर उन्हें पूरा भरोसा है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर राहत निरस्त होने की संभावना है।
संगठित षड्यंत्र का दावा
रौशन आनंद के वकील ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में संगठित तरीके से घटनाओं को अंजाम दिया गया और कथित तौर पर बाद में एक अन्य एफआईआर दर्ज कर घटनाक्रम को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत का प्रावधान उन व्यक्तियों के लिए है जिन्हें गलत तरीके से फंसाया गया हो और जिनका कोई आपराधिक इतिहास न हो — और उनके अनुसार यह स्थिति इस मामले में लागू नहीं होती।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
अधिवक्ता सिंह ने पुलिस के दोहरे रवैये पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि एक ओर रौशन आनंद के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की गई, जबकि दूसरी ओर खान सर के खिलाफ दर्ज शिकायतों पर वैसी सक्रियता नहीं दिखाई गई। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसियों को निष्पक्ष रूप से सभी पक्षों की जाँच करनी चाहिए और इस मुद्दे को भी अदालत के समक्ष उठाया जाएगा।
आगे क्या होगा
20 जून की सुनवाई इस मामले में निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। अदालत द्वारा अंतरिम राहत बरकरार रखी जाती है या निरस्त की जाती है — यह दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।