SIR, परिसीमन और महिला आरक्षण पर खड़गे PM मोदी से करेंगे सीधी बात, लिखे दो पत्र
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 20 अक्टूबर 2026 को कलबुर्गी में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष विशेष पहचान रजिस्टर (SIR), प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया और महिला आरक्षण लागू करने में हो रही देरी के मुद्दों पर विस्तारपूर्वक अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने बताया कि वे प्रधानमंत्री को इन विषयों पर दो व्यक्तिगत पत्र पहले ही भेज चुके हैं।
खड़गे की तीन प्रमुख चिंताएँ
खड़गे ने कहा कि वे प्रधानमंत्री को SIR के संभावित नुकसान, परिसीमन प्रस्ताव के नकारात्मक प्रभाव और महिला आरक्षण के क्रियान्वयन में हो रही देरी — तीनों मुद्दों पर विस्तार से समझाएंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इन विषयों पर उनकी आपत्तियाँ ठोस और तथ्य-आधारित हैं। दशहरे के अवसर पर खड़गे ने कहा, 'आज दशहरा का पर्व है, मैं आज कोई राजनीतिक बात नहीं करूंगा — कल सभी मुद्दों पर बात करूंगा।'
रिजिजू के पत्र की पृष्ठभूमि
इससे पहले सोमवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने खड़गे को पत्र लिखकर परिसीमन संशोधन विधेयक पर सरकार की ओर से विपक्ष के साथ बातचीत के प्रयासों का ब्यौरा दिया था। रिजिजू के अनुसार, सरकार ने मुख्य विपक्षी दल के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) से कई बार संपर्क किया, लिखित संदेश भेजे और व्यक्तिगत चर्चा भी की।
रिजिजू ने यह भी बताया कि मानसून सत्र के दौरान उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर सहयोग माँगा था। उनके अनुसार, बार-बार अनुरोध के बाद भी कांग्रेस ने बातचीत के लिए कोई तारीख नहीं दी, जिसके बाद सरकार ने अन्य राजनीतिक दलों से संपर्क किया।
दशहरे पर खड़गे का संदेश और कर्नाटक में उत्सव
खड़गे ने दशहरा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है और कर्नाटक में इसका विशेष महत्व है। उन्होंने चिंता जताई कि इस वर्ष बारिश औसत से 40 प्रतिशत से भी कम हुई है, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कल्याण-कर्नाटक क्षेत्र, खासकर गुलबर्गा में दशहरे का बड़ा आयोजन होना चाहिए और वे इस संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे। उनका लक्ष्य एक ऐसा कार्यक्रम आयोजित करना है जो पूरे कर्नाटक को एकजुट करे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की स्थिति
गौरतलब है कि SIR, परिसीमन और महिला आरक्षण — तीनों मुद्दे वर्तमान में राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं। महिला आरक्षण अधिनियम संसद से पारित हो चुका है, लेकिन इसे परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू किया जाएगा — यही बिंदु विपक्ष की मुख्य आपत्ति का केंद्र है। दक्षिण भारत के राज्यों में परिसीमन को लेकर यह चिंता और गहरी है कि जनसंख्या वृद्धि के आधार पर नई सीट-संख्या निर्धारण से उनका संसदीय प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। खड़गे और प्रधानमंत्री के बीच होने वाली यह बातचीत इन जटिल मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के रुख को और स्पष्ट करेगी।