किम जोंग-उन ने वियतनाम राष्ट्रीय दिवस पर तो लाम को पत्र भेजा, द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने 2 सितंबर को वियतनाम के 81वें राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर वियतनामी राष्ट्रपति तो लाम को एक विशेष पत्र भेजा, जिसमें दोनों देशों के बीच पारंपरिक मित्रता और सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) द्वारा जारी इस पत्र को प्योंगयांग-हनोई संबंधों के पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
किम के संदेश में क्या था
किम जोंग-उन ने अपने पत्र में कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि दोनों देशों के बीच पारंपरिक मित्रता और सहयोग आने वाले वर्षों में और सुदृढ़ होगा। उन्होंने इस संदेश को अक्टूबर 2025 में प्योंगयांग में राष्ट्रपति तो लाम के साथ हुई मुलाकात के दौरान बनी सहमति की भावना के अनुरूप बताया। गौरतलब है कि यह पत्र केवल शिष्टाचार का प्रतीक नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा है।
पिछले एक वर्ष में बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता
अक्टूबर 2025 में राष्ट्रपति तो लाम की उत्तर कोरिया यात्रा इस द्विपक्षीय पुनरुद्धार में निर्णायक मोड़ साबित हुई — यह 18 वर्षों में किसी शीर्ष वियतनामी नेता की पहली उत्तर कोरिया यात्रा थी। इसके बाद से संपर्क में उल्लेखनीय तेज़ी आई है।
इस वर्ष मई में वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई चुंग ने उत्तर कोरिया का दौरा किया और अपनी उत्तर कोरियाई समकक्ष चो सोन-हुई के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इसके पश्चात जून में दोनों देशों के सुरक्षा मंत्रियों की प्योंगयांग में बैठक हुई, जिसमें सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग विस्तार पर चर्चा हुई।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
उत्तर कोरिया और वियतनाम के संबंधों की जड़ें दशकों पुरानी हैं। दोनों देशों के बीच वैचारिक समानताएँ और ऐतिहासिक राजनीतिक संबंध रहे हैं, हालाँकि बीते वर्षों में द्विपक्षीय संपर्क अपेक्षाकृत सीमित हो गया था। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया वैश्विक अलगाव के बीच अपने सहयोगी देशों के साथ संबंध पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा है।
आगे क्या होगा
अब प्योंगयांग और हनोई दोनों इस रिश्ते को नए सिरे से प्राथमिकता देते दिख रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्र में और ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। राष्ट्रीय दिवस पर भेजा गया किम का यह पत्र उस दिशा में एक स्पष्ट राजनयिक संकेत है।