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किरेन रिजिजू का विपक्ष पर पलटवार: '60 किमी चीन घुसा' वाला दावा झूठ, सेना का मनोबल न तोड़ें

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किरेन रिजिजू का विपक्ष पर पलटवार: '60 किमी चीन घुसा' वाला दावा झूठ, सेना का मनोबल न तोड़ें

सारांश

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के '60 किमी चीन घुसा' वाले दावे को तथ्यहीन करार दिया। उन्होंने कांग्रेस की सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर नीति को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि 2014 के बाद मोदी सरकार ने यह खामी दूर की। सेना को राजनीति में घसीटने पर भी उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई।

मुख्य बातें

किरेन रिजिजू ने 19 अगस्त को विपक्ष के '60 किलोमीटर चीनी घुसपैठ' के दावे को सिरे से नकारा।
उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर सीमांकन आज तक पूरा नहीं हुआ — यह पुराना मुद्दा है।
तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के.
एंटनी की नीति के तहत कांग्रेस सरकार ने सीमावर्ती इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं किया, जबकि चीन करता रहा।
2014 के बाद मोदी सरकार ने नीति बदली; 2019 में ताकसिंग तक सड़क संपर्क पूरा हुआ।
लोंगजू के आगे घाटी क्षेत्र में चीनी पीएलए के ढाँचे हैं; रिजिजू के अनुसार चीन ने वहाँ 1959 में कब्ज़ा किया था।
सेना के जनरल के लिए 'सड़क छाप' जैसी भाषा पर रिजिजू ने कांग्रेस नेताओं से माफ़ी माँगने की अपील की।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 19 अगस्त को नई दिल्ली में विपक्षी दलों के उस दावे को सिरे से खारिज किया, जिसमें कहा जा रहा है कि चीन भारतीय सीमा के अंदर 60 किलोमीटर तक घुस आया है। रिजिजू ने कहा कि इस तरह का झूठ फैलाने से देश के सुरक्षाबलों का मनोबल कमज़ोर होता है और यह राष्ट्रीय हित के विरुद्ध है।

मुख्य बयान और विपक्ष पर आरोप

रिजिजू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर कई स्थानों पर सीमांकन अब तक पूरी तरह नहीं हुआ है — न सीमा स्तंभ हैं, न ज़मीन पर स्पष्ट चिह्नांकन। उन्होंने कहा, 'यह कोई नया मुद्दा नहीं है', और इसे राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाना गलत है। उनके अनुसार, वीडियो शेयर करके सनसनी फैलाना और '60 किलोमीटर घुसपैठ' जैसे दावे करना तथ्यहीन है।

कांग्रेस सरकार पर ऐतिहासिक जिम्मेदारी का आरोप

रिजिजू ने बताया कि तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने संसद में स्वीकार किया था कि कांग्रेस सरकार की नीति सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा विकसित न करने की थी। इसी दौरान चीन ने अपनी तरफ सड़कें और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना जारी रखा। उन्होंने कहा कि इस नीतिगत चूक का खामियाज़ा भारत को उठाना पड़ा।

2014 के बाद बदली नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रगति

मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद सीमावर्ती इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने बताया कि वे स्वयं अंतिम सीमा बिंदु के पास स्थित एक गाँव में गए हैं और वहाँ सेना व सुरक्षाबलों से मिले हैं। ताकसिंग तक सड़क संपर्क को मज़बूत किया गया और वर्ष 2019 में वहाँ सड़क निर्माण का काम पूरा हुआ। रिजिजू के अनुसार, आज़ादी के बाद कई दशकों तक इन इलाकों में पर्याप्त सड़कें नहीं थीं।

लोंगजू क्षेत्र और पुराने विवाद की पृष्ठभूमि

रिजिजू ने लोंगजू से आगे एक घाटी क्षेत्र का उल्लेख किया, जहाँ चीनी पीएलए के कुछ ढाँचे और गाँव जैसी इमारतें बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि भारत के अनुसार, उस ज़मीन पर चीन ने वर्ष 1959 में कब्ज़ा किया था और 1962 में अपनी स्थिति मज़बूत की। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उस सीमा बिंदु पर भारत की भी पोस्ट मौजूद है और वर्तमान में उस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सामान्य आवाजाही बंद है। आईटीबीपी की पेट्रोलिंग पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ हुई है।

सेना को राजनीति में न घसीटें — रिजिजू की चेतावनी

रिजिजू ने कहा कि सेना देश की रक्षा करती है और उसे राजनीतिक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए। उन्होंने सेना के जनरल के लिए 'सड़क छाप' जैसे शब्दों के इस्तेमाल को बेहद आपत्तिजनक करार दिया और कांग्रेस नेताओं से इस भाषा पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। आलोचकों का कहना है कि सीमा विवाद पर बयानबाज़ी दोनों तरफ से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रही है और इस पर संयमित चर्चा ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उन असली सवालों को पूरी तरह नहीं सुलझाता जो अरुणाचल के सीमावर्ती गाँवों के निवासी उठा रहे हैं। सीमांकन न होने की बात स्वीकार करना और साथ में विपक्ष को 'झूठा' कहना — यह दोनों एक साथ चलते हैं, लेकिन ज़मीनी चिंताओं को खारिज नहीं करते। 1959 और 1962 की घटनाओं का उल्लेख करना ज़रूरी है, पर यह भी ध्यान देने योग्य है कि दशकों तक सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर की उपेक्षा केवल एक सरकार की देन नहीं थी। असली ज़रूरत है कि सीमा विवाद पर पारदर्शी संसदीय बहस हो — न कि केवल आरोप-प्रत्यारोप।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरेन रिजिजू ने '60 किलोमीटर चीन घुसा' के दावे पर क्या कहा?
रिजिजू ने इस दावे को पूरी तरह गलत और तथ्यहीन बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें फैलाने से सुरक्षाबलों का मनोबल कमज़ोर होता है और यह राष्ट्रीय हित के विरुद्ध है।
अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा विवाद की असली समस्या क्या है?
रिजिजू के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन के बीच बहुत लंबी सीमा है जिसका कई इलाकों में अब तक स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ है — न सीमा स्तंभ हैं, न ज़मीन पर चिह्नांकन। यह पुरानी और जटिल समस्या है।
कांग्रेस सरकार की सीमा नीति पर रिजिजू ने क्या आरोप लगाए?
रिजिजू ने कहा कि तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने संसद में स्वीकार किया था कि कांग्रेस सरकार की नीति सीमावर्ती क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर न बनाने की थी। इसी दौरान चीन अपनी तरफ सड़कें और ढाँचे खड़े करता रहा।
2014 के बाद सीमा पर क्या बदला?
रिजिजू के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद सीमावर्ती इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को प्राथमिकता दी गई। ताकसिंग तक सड़क संपर्क मज़बूत किया गया और 2019 में वहाँ सड़क निर्माण पूरा हुआ।
लोंगजू क्षेत्र को लेकर क्या विवाद है?
रिजिजू ने बताया कि लोंगजू से आगे घाटी क्षेत्र में चीनी पीएलए के ढाँचे और गाँव जैसी इमारतें हैं। भारत के अनुसार चीन ने यहाँ 1959 में कब्ज़ा किया और 1962 में स्थिति मज़बूत की; वर्तमान में इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सामान्य आवाजाही बंद है।
राष्ट्र प्रेस
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