पश्चिम बंगाल में किशोर गर्भावस्था सबसे बड़ी चुनौती: स्वास्थ्य मंत्री मुखर्जी, घर-घर अभियान शुरू
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरदवत मुखर्जी ने स्वीकार किया है कि राज्य में किशोरावस्था में गर्भावस्था सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है और इस मामले में पश्चिम बंगाल देश की सूची में सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि इसे जड़ से समाप्त करने के लिए सरकार सामुदायिक स्तर पर व्यापक अभियान चला रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार सत्ता में 100 दिन पूरे करने की तैयारी में है।
किशोर गर्भावस्था: मंत्री की स्वीकारोक्ति और चिंता
स्वास्थ्य मंत्री मुखर्जी ने कहा, 'किशोरावस्था में गर्भावस्था सबसे बड़ी चिंता का विषय है। दुर्भाग्य से बंगाल इस सूची में सबसे ऊपर है। यह एक गंभीर समस्या है।' उन्होंने यह भी बताया कि कुछ विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में यह समस्या अधिक केंद्रित है — मुर्शिदाबाद उनमें प्रमुख है — और कुछ इलाकों में यह एक विशेष समुदाय तक सीमित पाई गई है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस समस्या का समाधान रातोंरात संभव नहीं है, लेकिन सरकार ने बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। उन्होंने बाल संरक्षण नीति को इस दिशा में एक सहायक कदम बताया।
घर-घर अभियान और सामुदायिक डॉक्टरों की भूमिका
डॉ. मुखर्जी ने बताया कि सरकार स्थानीय सामुदायिक डॉक्टरों को प्रभावित परिवारों तक पहुँचाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा, 'यह घर-घर जाकर चलाया जा रहा अभियान है। इसे जड़ से खत्म करना होगा।' यह पहल जागरूकता और परामर्श दोनों पर केंद्रित है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
100 दिन की उपलब्धियाँ: सीमा सुरक्षा और भूमि हस्तांतरण
नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार की 100 दिनों की प्रमुख उपलब्धियों में बांग्लादेश से लगती बिना बाड़ वाली सीमाओं पर कांटेदार तार लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को लगभग पूरा करना शामिल है।
राज्य भूमि और भू-राजस्व विभाग के आँकड़ों के अनुसार, नौ सीमावर्ती जिलों में BSF को 767 एकड़ से अधिक भूमि पहले ही सौंपी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, राज्य मंत्रिमंडल ने लगभग 362 एकड़ भूमि के हस्तांतरण को भी मंजूरी दी है, जिससे BSF को दी गई भूमि की कुल मात्रा 1,100 एकड़ से अधिक हो गई है।
इसके अलावा, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में सशस्त्र सीमा बल (SSB) को 44 एकड़ से अधिक भूमि और दार्जिलिंग में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) बटालियन मुख्यालय को 110 एकड़ भूमि दी गई है।
बुनियादी ढाँचा और उद्योग: अन्य प्रमुख घोषणाएँ
सचिवालय सूत्रों के अनुसार, सरकार की अन्य उपलब्धियों में सेवक-रंगपो ब्रॉड गेज रेल परियोजना, पश्चिम मेदिनीपुर में 100 बिस्तरों वाले ESI अस्पताल और अन्य बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए भूमि का त्वरित आवंटन शामिल है। साथ ही, पहले 100 दिनों के भीतर राज्य में बंद पड़ी 16 जूट मिलों को फिर से खोलने का लक्ष्य भी सरकार की प्राथमिकताओं में है।
आगामी दिनों में विभिन्न परियोजनाओं में किए गए निवेश और उनसे अनुमानित रोज़गार सृजन का विस्तृत ब्यौरा भी सार्वजनिक किया जाएगा।