3 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नारा लोकेश और सुवेंदु अधिकारी की कोलकाता में मुलाकात, पटचित्र स्क्रॉल व शोलापिथ नौका भेंट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नारा लोकेश और सुवेंदु अधिकारी की कोलकाता में मुलाकात, पटचित्र स्क्रॉल व शोलापिथ नौका भेंट

सारांश

कोलकाता में हुई इस मुलाकात में सुवेंदु अधिकारी ने नारा लोकेश को षड्भुज-मूर्ति पटचित्र और GI-टैग शोलापिथ नौका भेंट कर पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के बीच 2,000 वर्ष पुराने समुद्री व सांस्कृतिक संबंधों को नई पहचान दी।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश की 18 जून 2026 को कोलकाता में मुलाकात हुई।
CM अधिकारी ने दो विशेष उपहार भेंट किए — षड्भुज-मूर्ति पटचित्र स्क्रॉल और हस्तनिर्मित शोलापिथ नौका ।
पटचित्र का निर्माण पश्चिम मेदिनीपुर के नाया गांव की कलाकार स्वर्ण लता चित्रकार ने किया; उन्होंने 6 देशों में कला प्रदर्शन किया है।
शोलापिथ शिल्प को जीआई टैग (GI Tag) प्राप्त है और यह पूर्णतः हस्तनिर्मित है।
शोलापिथ नौका तमलुक और मछलीपट्टनम के बीच लगभग 2,000 वर्ष पुराने समुद्री-व्यापारिक संबंधों का प्रतीक है।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश के बीच 18 जून 2026 को कोलकाता में एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई, जिसका उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊर्जा देना था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री अधिकारी ने नारा लोकेश को बंगाल की पारंपरिक कला और शिल्प से जुड़े दो विशेष उपहार — षड्भुज-मूर्ति पटचित्र स्क्रॉल और हस्तनिर्मित शोलापिथ नौका — भेंट किए।

उपहारों का सांस्कृतिक महत्व

मुख्यमंत्री द्वारा भेंट किए गए षड्भुज-मूर्ति पटचित्र में श्री चैतन्य महाप्रभु के छह भुजाओं वाले दिव्य स्वरूप को चित्रित किया गया है। इस कलाकृति में भगवान राम, भगवान कृष्ण और श्री चैतन्य महाप्रभु के स्वरूपों का अद्भुत समन्वय है। ऊपरी भुजाओं में धनुष-बाण भगवान राम का प्रतीक हैं, मध्य भुजाओं में बांसुरी भगवान कृष्ण का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि निचली भुजाओं में संन्यास-दंड और कमंडल श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रेम और भक्ति के संदेश को व्यक्त करते हैं।

इस कलाकृति का निर्माण पश्चिम मेदिनीपुर जिले के पिंगला स्थित नाया गांव की प्रसिद्ध लोक कलाकार स्वर्ण लता चित्रकार ने किया है। वे पारंपरिक पटुआ परिवार से आती हैं और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर सदियों पुरानी पटचित्र कला को जीवित रख रही हैं। उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी और स्वीडन सहित अनेक देशों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है।

शोलापिथ नौका — दो राज्यों के प्राचीन संबंधों का प्रतीक

दूसरा उपहार शोलापिथ से निर्मित एक विशेष नौका थी। शोलापिथ पश्चिम बंगाल की पर्यावरण अनुकूल पारंपरिक हस्तशिल्प कला है, जिसे जल क्षेत्रों में पाए जाने वाले एक विशेष पौधे से तैयार किया जाता है। यह पूर्णतः हस्तनिर्मित कला है और इसे जीआई टैग (GI Tag) भी प्राप्त है, जो इसकी विशिष्टता और प्रामाणिकता को संरक्षित करता है।

बताया गया कि यह शोलापिथ नौका पश्चिम बंगाल के तमलुक और आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के बीच लगभग 2,000 वर्ष पुराने समुद्री और व्यापारिक संबंधों का प्रतीक है — एक ऐसा इतिहास जो दोनों राज्यों को सदियों से जोड़ता आया है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना आवश्यक है। उन्होंने इन उपहारों के माध्यम से पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के बीच ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी कहा कि दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं और इस प्रकार के प्रयास इन्हें और प्रगाढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सांस्कृतिक आदान-प्रदान की दिशा में पहल

कार्यक्रम के दौरान दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक सहयोग और आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। गौरतलब है कि स्वर्ण लता चित्रकार जैसी ग्रामीण महिला कलाकारों की अंतरराष्ट्रीय पहचान ने बंगाल की लोक कला को वैश्विक मंच पर स्थापित किया है। इस मुलाकात को बंगाल की लोक कला और पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक सार्थक कदम बताया गया। आने वाले समय में दोनों राज्यों के बीच इसी तरह के और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका राजनीतिक संदर्भ भी उल्लेखनीय है — भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित पश्चिम बंगाल और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) शासित आंध्र प्रदेश, दोनों NDA गठबंधन के सहयोगी हैं, और यह सांस्कृतिक कूटनीति उसी साझेदारी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश है। GI-टैग शिल्प और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी गई लोक कलाकार को उपहार के रूप में चुनना महज संयोग नहीं — यह 'सॉफ्ट पावर' कूटनीति का सुविचारित प्रयोग है। असली परीक्षा यह है कि क्या ऐसी मुलाकातें दोनों राज्यों के बीच ठोस सांस्कृतिक या आर्थिक सहयोग में बदलती हैं, या महज प्रतीकात्मक आदान-प्रदान तक सीमित रहती हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुवेंदु अधिकारी और नारा लोकेश की कोलकाता में मुलाकात क्यों हुई?
यह मुलाकात पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से 18 जून 2026 को कोलकाता में आयोजित की गई। इस दौरान दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक सहयोग और आदान-प्रदान बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
षड्भुज-मूर्ति पटचित्र स्क्रॉल क्या है और इसे किसने बनाया?
षड्भुज-मूर्ति पटचित्र एक पारंपरिक बंगाली लोक चित्रकला है जिसमें श्री चैतन्य महाप्रभु के छह भुजाओं वाले स्वरूप में भगवान राम, कृष्ण और चैतन्य महाप्रभु की छवियों का समन्वय है। इसे पश्चिम मेदिनीपुर के नाया गांव की प्रसिद्ध कलाकार स्वर्ण लता चित्रकार ने प्राकृतिक रंगों से निर्मित किया है, जो अमेरिका और यूरोप के 6 देशों में अपनी कला प्रदर्शित कर चुकी हैं।
शोलापिथ नौका का क्या महत्व है?
शोलापिथ नौका पश्चिम बंगाल के तमलुक और आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के बीच लगभग 2,000 वर्ष पुराने समुद्री और व्यापारिक संबंधों का प्रतीक है। शोलापिथ एक पूर्णतः हस्तनिर्मित, पर्यावरण अनुकूल शिल्पकला है जिसे जीआई टैग (GI Tag) प्राप्त है।
शोलापिथ शिल्प को GI टैग क्यों मिला है?
शोलापिथ पश्चिम बंगाल की एक विशिष्ट पारंपरिक हस्तशिल्प कला है जो जल क्षेत्रों में पाए जाने वाले विशेष पौधे से पूरी तरह हाथ से बनाई जाती है। इसकी भौगोलिक विशिष्टता और प्रामाणिकता के कारण इसे भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त हुआ है, जो इसे नकल से सुरक्षित करता है।
इस मुलाकात से दोनों राज्यों के संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
इस मुलाकात को दोनों राज्यों के बीच ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को औपचारिक रूप देने की दिशा में एक सार्थक पहल माना जा रहा है। कार्यक्रम में भविष्य में और सांस्कृतिक सहयोग कार्यक्रम आयोजित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले