नारा लोकेश और सुवेंदु अधिकारी की कोलकाता में मुलाकात, पटचित्र स्क्रॉल व शोलापिथ नौका भेंट
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश के बीच 18 जून 2026 को कोलकाता में एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई, जिसका उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊर्जा देना था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री अधिकारी ने नारा लोकेश को बंगाल की पारंपरिक कला और शिल्प से जुड़े दो विशेष उपहार — षड्भुज-मूर्ति पटचित्र स्क्रॉल और हस्तनिर्मित शोलापिथ नौका — भेंट किए।
उपहारों का सांस्कृतिक महत्व
मुख्यमंत्री द्वारा भेंट किए गए षड्भुज-मूर्ति पटचित्र में श्री चैतन्य महाप्रभु के छह भुजाओं वाले दिव्य स्वरूप को चित्रित किया गया है। इस कलाकृति में भगवान राम, भगवान कृष्ण और श्री चैतन्य महाप्रभु के स्वरूपों का अद्भुत समन्वय है। ऊपरी भुजाओं में धनुष-बाण भगवान राम का प्रतीक हैं, मध्य भुजाओं में बांसुरी भगवान कृष्ण का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि निचली भुजाओं में संन्यास-दंड और कमंडल श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रेम और भक्ति के संदेश को व्यक्त करते हैं।
इस कलाकृति का निर्माण पश्चिम मेदिनीपुर जिले के पिंगला स्थित नाया गांव की प्रसिद्ध लोक कलाकार स्वर्ण लता चित्रकार ने किया है। वे पारंपरिक पटुआ परिवार से आती हैं और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर सदियों पुरानी पटचित्र कला को जीवित रख रही हैं। उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी और स्वीडन सहित अनेक देशों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है।
शोलापिथ नौका — दो राज्यों के प्राचीन संबंधों का प्रतीक
दूसरा उपहार शोलापिथ से निर्मित एक विशेष नौका थी। शोलापिथ पश्चिम बंगाल की पर्यावरण अनुकूल पारंपरिक हस्तशिल्प कला है, जिसे जल क्षेत्रों में पाए जाने वाले एक विशेष पौधे से तैयार किया जाता है। यह पूर्णतः हस्तनिर्मित कला है और इसे जीआई टैग (GI Tag) भी प्राप्त है, जो इसकी विशिष्टता और प्रामाणिकता को संरक्षित करता है।
बताया गया कि यह शोलापिथ नौका पश्चिम बंगाल के तमलुक और आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के बीच लगभग 2,000 वर्ष पुराने समुद्री और व्यापारिक संबंधों का प्रतीक है — एक ऐसा इतिहास जो दोनों राज्यों को सदियों से जोड़ता आया है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना आवश्यक है। उन्होंने इन उपहारों के माध्यम से पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के बीच ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी कहा कि दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं और इस प्रकार के प्रयास इन्हें और प्रगाढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान की दिशा में पहल
कार्यक्रम के दौरान दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक सहयोग और आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। गौरतलब है कि स्वर्ण लता चित्रकार जैसी ग्रामीण महिला कलाकारों की अंतरराष्ट्रीय पहचान ने बंगाल की लोक कला को वैश्विक मंच पर स्थापित किया है। इस मुलाकात को बंगाल की लोक कला और पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक सार्थक कदम बताया गया। आने वाले समय में दोनों राज्यों के बीच इसी तरह के और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की उम्मीद जताई जा रही है।