क्या कांग्रेस के डीएनए में है अभद्र भाषा? : प्रवीण खंडेलवाल

सारांश
Key Takeaways
- अभद्र भाषा का उपयोग कांग्रेस की पहचान बन रहा है।
- प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के परिणाम सकारात्मक होंगे।
- आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करना आवश्यक है।
- स्वदेशी आह्वान को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
- भारत किसी के दबाव में नहीं आएगा।
नई दिल्ली, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान कांग्रेस और राजद के समर्थकों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई अभद्र टिप्पणी पर भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अभद्र भाषा का उपयोग कांग्रेस के डीएनए का हिस्सा है।
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि कांग्रेस की संस्कृति में अभद्र भाषा कोई नई बात नहीं है, यह कांग्रेस के डीएनए में गहराई तक समाई हुई है और यह धीरे-धीरे हर राज्य में फैलती जा रही है। कांग्रेस नेताओं को यह समझना होगा कि राजनीति में मर्यादा और नैतिकता का पालन बेहद आवश्यक है, लेकिन दुर्भाग्य से कांग्रेस के लोग इस पर ध्यान नहीं देते।
प्रवीण खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के संदर्भ में कहा कि पूरी दुनिया उनकी यात्रा पर नजर रख रही है और निश्चित रूप से, उनकी पिछली यात्राओं के परिणाम सकारात्मक रहे हैं, जिससे भारत का कद बढ़ा है। इस यात्रा के परिणाम भारत के लिए लाभकारी होंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर हमारी स्थिति मजबूत होगी।
खंडेलवाल ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के संघ और स्वदेशी को लेकर दिए गए बयान पर कहा कि प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना की है और इसके लिए यह जरूरी है कि भारत में बने उत्पादों का निर्माण और बिक्री देश में ही हो। प्रधानमंत्री के स्वदेशी आह्वान का न केवल व्यापारियों, बल्कि आम जनता ने भी उत्साहपूर्वक स्वागत किया है।
उन्होंने आगे कहा कि अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) का भारतीय सामान हमारा स्वाभिमान का अभियान पूरे देश में चल रहा है। यही बात संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी कही है कि स्वदेशी की ताकत भारत को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी। भारत किसी के दबाव में नहीं आएगा। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश के हितों के साथ कोई समझौता नहीं होगा। निश्चित रूप से, आने वाले समय में स्वदेशी एक जन आंदोलन बनेगा।
खंडेलवाल ने अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शुरुआती दौर में टैरिफ का असर हमारे कुछ सेक्टर पर पड़ेगा। लेकिन लंबी अवधि में भारत पर टैरिफ का खास असर नहीं पड़ेगा। भारत आत्मनिर्भर है और किसी अन्य देश के दबाव में नहीं आता।