क्या एनडीए सरकार बिहार को विकास की दिशा में ले जा रही है?: संजय सरावगी
सारांश
Key Takeaways
- सात निश्चय-3 के तहत नागरिकों के जीवन को सरल बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुशासन पर जोर दिया है।
- सरकारी अधिकारी आम जनता के साथ अच्छा व्यवहार करें।
- जी राम जी योजना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ा है।
पटना, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस पत्र पर सहमति जताई है, जिसमें सीएम ने दावा किया कि एनडीए सरकार नागरिकों के जीवन को सरल बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है।
सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि 20 नवंबर 2025 को राज्य में नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद हमने राज्य को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करने के लिए सात निश्चय-3 के कार्यक्रमों को लागू किया है। सात निश्चय-3 के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों को कम कर उनके जीवन को और भी सरल बनाना है। इस दिशा में हम लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा देखा गया है कि आम लोग जब अपनी समस्याओं को लेकर सरकारी कार्यालय पहुंचते हैं तो अधिकारी उपस्थित नहीं रहते हैं, जिससे उन्हें असुविधा होती है। इसे देखते हुए अब राज्य के आमजन को सरकारी कार्यालयों से संबंधित कार्यों में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसके लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
नीतीश कुमार के इस पत्र पर पटना में बिहार भाजपा के प्रमुख संजय सरावगी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि सुशासन की सरकार में लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार विकास की ओर बढ़ रहा है, और विकास दर अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है। सीएम नीतीश कुमार द्वारा जारी पत्र अच्छी बात है। प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे आम जनता के साथ अच्छा व्यवहार करें। जनता की समस्याओं को सुलझाने के साथ ही सरकारी अधिकारियों की जनता के प्रति जवाबदेही भी है।
विकसित भारत-जी राम जी योजना को लेकर संजय सरावगी ने विपक्ष के हंगामे पर कहा कि इसमें अधिक कार्य की गारंटी दी गई है। मनरेगा में 100 दिनों का काम मिलता था, जबकि जी राम जी में 125 दिन के रोजगार की गारंटी है। इस योजना में 40 प्रतिशत राज्यों की हिस्सेदारी, 100 प्रतिशत जवाबदेही और निगरानी, खेती के पीक सीजन में 60 दिन का ब्रेक, तकनीक का कवच और साप्ताहिक भुगतान मनरेगा की इन खामियों को सुधारते हुए जी राम जी लाई गई है, जो मजदूरों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त और सुदृढ़ बनाएगी। स्पष्ट है कि विपक्ष की समस्या इस योजना से नहीं, बल्कि इसमें जुड़े राम नाम से है।