क्या प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा नेताओं ने लाचित बोरफुकन की जयंती पर श्रद्धांजलि दी?

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क्या प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा नेताओं ने लाचित बोरफुकन की जयंती पर श्रद्धांजलि दी?

सारांश

आज लचित बोरफुकन की जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। यह अवसर न केवल वीरता का सम्मान है, बल्कि असम की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का भी प्रतीक है।

मुख्य बातें

लचित बोरफुकन का योगदान असम की संस्कृति को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण था।
उनकी वीरता और नेतृत्व हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
भाजपा नेताओं ने एकजुट होकर उनके योगदान को सम्मानित किया।

नई दिल्ली, 24 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। अजेय योद्धा और सराइघाट युद्ध के महानायक वीर लचित बोरफुकन की जयंती आज मनाई जा रही है। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई प्रमुख नेताओं ने इस महान अहोम सेनापति को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "हम साहस, देशभक्ति और सच्ची लीडरशिप के प्रतीक लाचित बोरफुकन को याद करते हैं। उनकी बहादुरी पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने असम की संस्कृति को बचाने में अहम भूमिका निभाई।"

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लचित बोरफुकन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, "उनकी अटूट देशभक्ति, कभी न हारने वाली बहादुरी और बेमिसाल मिलिट्री लीडरशिप ने न सिर्फ असम और हमारे बाकी नॉर्थ-ईस्ट को मुगलों के हमले से बचाया, बल्कि इस इलाके की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखा। उनका जीवन हमेशा देशभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।"

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा, "लाचित बोरफुकन अटूट साहस और पक्के इरादे की निशानी हैं, एक ऐसे कमांडर जिन्होंने बेमिसाल बहादुरी से अपने लोगों के सम्मान और इज्जत की रक्षा की। ‘लाचित दिवस’ पर, मैं उनके बेमिसाल साहस और बहादुरी को सलाम करता हूं। उनकी विरासत हम सभी में प्रेरणा जगाती रहती है।"

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लिखा, "अपने शौर्य व साहस से उन्होंने सिद्ध किया कि स्वाभिमान और एकता के सामने कोई साम्राज्य नहीं टिकता। लचित बोरफुकन जी असम और पूर्वोत्तर के साथ ही सम्पूर्ण भारत के गौरव हैं। उनका संघर्ष करोड़ों देशवासियों को प्रेरणा देता है।"

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने लिखा, "उनकी वीरता और नेतृत्व की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, हम उनके नाम पर पुलिस अकादमी, मेमोरियल, स्कूल पाठ्यक्रम, और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण संस्थान स्थापित कर रहे हैं। उनकी वीरता की विरासत आज भी हमारी पीढ़ियों को प्रेरित करती है। लचित दिवस पर हम उन वीर को नमन करते हैं जिन्होंने राष्ट्र को झुकने नहीं दिया।"

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, "मुगल आक्रांताओं के दमन के विरुद्ध अद्भुत साहस और दूरदर्शी रणनीति से मातृभूमि और संस्कृति की रक्षा करने वाले महान सेनानायक लचित बोरफुकन को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। आपका जीवन और त्याग ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के आदर्श को सजीव करता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि लचित बोरफुकन का योगदान न केवल असम के लिए, बल्कि सम्पूर्ण भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है। आज की चर्चा हमें एकजुटता और देशभक्ति का पाठ पढ़ाती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लचित बोरफुकन कौन थे?
लचित बोरफुकन एक महान अहोम सेनापति थे जिन्होंने मुगलों के खिलाफ असम की रक्षा की।
लचित दिवस कब मनाया जाता है?
लचित दिवस हर साल 24 नवंबर को मनाया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने लचित बोरफुकन के बारे में क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने लचित बोरफुकन को साहस और देशभक्ति का प्रतीक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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