लखीमपुर खीरी हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की पारिवारिक कार्यक्रम में जाने की अर्जी ठुकराई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 6 अगस्त 2026 को 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के आरोपी आशीष मिश्रा की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति माँगी थी। अदालत ने मौजूदा जमानत शर्तों में किसी भी प्रकार की ढील देने से इनकार कर दिया।
क्या था आशीष मिश्रा का आवेदन
आशीष मिश्रा के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि जमानत की सख्त शर्तें उनके मुवक्किल को पारिवारिक आयोजनों में भाग लेने से रोक रही हैं — यहाँ तक कि अपनी बेटियों के जन्मदिन समारोह में भी वे शामिल नहीं हो पा रहे। इस आधार पर शर्तों में शिथिलता देने की माँग की गई थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया।
प्रशांत भूषण की आपत्ति और मुख्य न्यायाधीश का निर्देश
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ट्रायल प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि अभियोजन पक्ष महत्त्वपूर्ण गवाहों और प्रत्यक्षदर्शियों को गवाह सूची से हटा रहा है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि ऐसी शिकायतें पहले ट्रायल कोर्ट के समक्ष रखी जानी चाहिए — उसके बाद ही इन्हें सर्वोच्च न्यायालय में उठाया जा सकता है।
गवाह प्रभावित करने के आरोप और पुलिस को निर्देश
गौरतलब है कि इससे पहले 7 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने आशीष मिश्रा उर्फ मोनू के विरुद्ध गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों की जाँच के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया था। शिकायतकर्ता की ओर से एफआईआर दर्ज न होने पर अदालत ने पुलिस पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि यदि शिकायतकर्ता स्वयं थाने आने में हिचकिचा रहा है, तो पुलिस को खुद जाँच अधिकारी भेजना चाहिए।
अदालत ने लखनऊ के पुलिस अधीक्षक को इस मामले में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। साथ ही निचली अदालत को निर्देश दिया गया था कि वह 20 अगस्त तक अधिक से अधिक गवाहों की गवाही पूरी करे।
प्रशांत भूषण ने गवाहों को धमकाने का आरोप लगाते हुए आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने की माँग की थी। इसके जवाब में आशीष मिश्रा के अधिवक्ता ने कहा कि इन आरोपों का कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और बार-बार निराधार शिकायतें की जा रही हैं।
लखीमपुर खीरी हिंसा की पृष्ठभूमि
यह मामला 3 अक्टूबर 2021 को हुई उस हिंसा से जुड़ा है, जब लखीमपुर खीरी में किसानों के प्रदर्शन के दौरान चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। आरोप है कि आशीष मिश्रा के काफिले की एक गाड़ी ने प्रदर्शनकारी किसानों को कुचला था। इसके बाद आक्रोशित किसानों की भीड़ ने कुछ लोगों की पिटाई की, जिसमें एक पत्रकार की भी जान चली गई। यह ऐसे समय में हुआ था जब तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन अपने चरम पर था।
आगे क्या होगा
निचली अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया जारी है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 20 अगस्त तक गवाहों की गवाही पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हलफनामा दाखिल होने के बाद गवाह प्रभावित करने के आरोपों की जाँच की दिशा स्पष्ट होगी।