6 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

लखीमपुर खीरी हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की पारिवारिक कार्यक्रम में जाने की अर्जी ठुकराई

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
लखीमपुर खीरी हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की पारिवारिक कार्यक्रम में जाने की अर्जी ठुकराई

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हिंसा के आरोपी आशीष मिश्रा को पारिवारिक कार्यक्रम में जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। साथ ही गवाह प्रभावित करने के आरोपों पर उत्तर प्रदेश पुलिस से हलफनामा तलब किया गया है और ट्रायल में तेजी के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 6 अगस्त को आशीष मिश्रा की लखीमपुर खीरी जाने की अर्जी खारिज की; जमानत शर्तों में कोई ढील नहीं।
अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि अभियोजन पक्ष महत्त्वपूर्ण गवाहों को सूची से हटा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा — ट्रायल कोर्ट में पहले शिकायत करें, फिर सर्वोच्च न्यायालय आएं।
उत्तर प्रदेश पुलिस को गवाह प्रभावित करने के आरोपों की जाँच और लखनऊ एसपी से हलफनामे का निर्देश।
निचली अदालत को 20 अगस्त तक अधिकतम गवाहों की गवाही पूरी करने का आदेश।
3 अक्टूबर 2021 की हिंसा में 8 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 4 किसान और 1 पत्रकार शामिल थे।

सर्वोच्च न्यायालय ने 6 अगस्त 2026 को 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के आरोपी आशीष मिश्रा की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति माँगी थी। अदालत ने मौजूदा जमानत शर्तों में किसी भी प्रकार की ढील देने से इनकार कर दिया।

क्या था आशीष मिश्रा का आवेदन

आशीष मिश्रा के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि जमानत की सख्त शर्तें उनके मुवक्किल को पारिवारिक आयोजनों में भाग लेने से रोक रही हैं — यहाँ तक कि अपनी बेटियों के जन्मदिन समारोह में भी वे शामिल नहीं हो पा रहे। इस आधार पर शर्तों में शिथिलता देने की माँग की गई थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया।

प्रशांत भूषण की आपत्ति और मुख्य न्यायाधीश का निर्देश

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ट्रायल प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि अभियोजन पक्ष महत्त्वपूर्ण गवाहों और प्रत्यक्षदर्शियों को गवाह सूची से हटा रहा है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि ऐसी शिकायतें पहले ट्रायल कोर्ट के समक्ष रखी जानी चाहिए — उसके बाद ही इन्हें सर्वोच्च न्यायालय में उठाया जा सकता है।

गवाह प्रभावित करने के आरोप और पुलिस को निर्देश

गौरतलब है कि इससे पहले 7 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने आशीष मिश्रा उर्फ मोनू के विरुद्ध गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों की जाँच के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया था। शिकायतकर्ता की ओर से एफआईआर दर्ज न होने पर अदालत ने पुलिस पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि यदि शिकायतकर्ता स्वयं थाने आने में हिचकिचा रहा है, तो पुलिस को खुद जाँच अधिकारी भेजना चाहिए।

अदालत ने लखनऊ के पुलिस अधीक्षक को इस मामले में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। साथ ही निचली अदालत को निर्देश दिया गया था कि वह 20 अगस्त तक अधिक से अधिक गवाहों की गवाही पूरी करे।

प्रशांत भूषण ने गवाहों को धमकाने का आरोप लगाते हुए आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने की माँग की थी। इसके जवाब में आशीष मिश्रा के अधिवक्ता ने कहा कि इन आरोपों का कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और बार-बार निराधार शिकायतें की जा रही हैं।

लखीमपुर खीरी हिंसा की पृष्ठभूमि

यह मामला 3 अक्टूबर 2021 को हुई उस हिंसा से जुड़ा है, जब लखीमपुर खीरी में किसानों के प्रदर्शन के दौरान चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। आरोप है कि आशीष मिश्रा के काफिले की एक गाड़ी ने प्रदर्शनकारी किसानों को कुचला था। इसके बाद आक्रोशित किसानों की भीड़ ने कुछ लोगों की पिटाई की, जिसमें एक पत्रकार की भी जान चली गई। यह ऐसे समय में हुआ था जब तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन अपने चरम पर था।

आगे क्या होगा

निचली अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया जारी है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 20 अगस्त तक गवाहों की गवाही पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हलफनामा दाखिल होने के बाद गवाह प्रभावित करने के आरोपों की जाँच की दिशा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि गवाह प्रभावित करने के आरोप अभी भी लंबित हैं। असली सवाल यह है कि तीन साल बाद भी ट्रायल इतनी धीमी गति से क्यों चल रहा है, और अभियोजन पक्ष द्वारा गवाहों को सूची से हटाने के आरोप यदि सत्य हैं, तो यह न्याय प्रक्रिया की गंभीर विफलता है। मुख्य न्यायाधीश का 'पहले ट्रायल कोर्ट जाओ' वाला निर्देश प्रक्रियागत दृष्टि से सही है, लेकिन पीड़ित पक्ष के लिए यह एक और लंबे इंतजार का संकेत भी है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की अर्जी क्यों खारिज की?
सर्वोच्च न्यायालय ने आशीष मिश्रा को पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया और मौजूदा जमानत शर्तों में कोई ढील नहीं दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रायल से जुड़ी शिकायतें पहले निचली अदालत में उठाई जानी चाहिए।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामला क्या है?
3 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी में किसान प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हुई थी। आरोप है कि आशीष मिश्रा के काफिले की गाड़ी ने किसानों को कुचला, जिसके बाद भड़की भीड़ ने कुछ लोगों की पिटाई की, जिसमें एक पत्रकार की भी जान गई।
गवाह प्रभावित करने के आरोपों पर अदालत ने क्या किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस को गवाह प्रभावित करने के आरोपों की जाँच का निर्देश दिया और लखनऊ के पुलिस अधीक्षक से हलफनामा तलब किया। एफआईआर दर्ज न होने पर अदालत ने पुलिस पर नाराजगी भी जताई।
ट्रायल में गवाहों की गवाही कब तक पूरी होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत को 20 अगस्त तक अधिक से अधिक गवाहों की गवाही पूरी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने ट्रायल में तेजी लाने पर जोर दिया है।
प्रशांत भूषण ने सुनवाई में क्या आरोप लगाए?
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि अभियोजन पक्ष महत्त्वपूर्ण गवाहों और प्रत्यक्षदर्शियों को गवाह सूची से हटा रहा है और आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने की माँग की। उन्होंने गवाहों पर दबाव डाले जाने का भी आरोप लगाया, जिसे आशीष मिश्रा के अधिवक्ता ने निराधार बताया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले