16 जुलाई 2026
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लखीमपुर खीरी गवाह धमकी मामला: UP पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया — अजय मिश्रा व आशीष के खिलाफ कोई सबूत नहीं

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लखीमपुर खीरी गवाह धमकी मामला: UP पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया — अजय मिश्रा व आशीष के खिलाफ कोई सबूत नहीं

सारांश

लखीमपुर खीरी गवाह-धमकी मामले में UP पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जाँच में अजय मिश्रा और आशीष मिश्रा के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला — चार्जशीट में केवल अमनदीप सिंह का नाम है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता को दो हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने को कहा।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि गवाह-धमकी जाँच में आशीष मिश्रा और अजय मिश्रा के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला।
गवाह-धमकी मामले में दाखिल चार्जशीट में केवल अमनदीप सिंह का नाम है; संबंधित अदालत ने संज्ञान ले लिया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता को स्टेटस रिपोर्ट के जवाब में दो सप्ताह के भीतर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 195-ए, 506 और 120-बी के तहत दर्ज थी, जो अदालत की फटकार के बाद शिकायतकर्ता बलजिंदर सिंह का बयान लेकर पंजीकृत की गई थी।
मूल मामला 3 अक्टूबर 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा से जुड़ा है, जिसमें 8 लोगों की मौत हुई थी; आशीष मिश्रा फिलहाल जमानत पर हैं।

सर्वोच्च न्यायालय में 16 जुलाई 2026 को लखीमपुर खीरी हिंसा से जुड़े गवाह-धमकी प्रकरण में अहम सुनवाई हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि जाँच में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जो आशीष मिश्रा अथवा उनके पिता व पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की इस मामले में संलिप्तता साबित कर सके। पुलिस की यह जानकारी आशीष मिश्रा की जमानत से जुड़ी सुनवाई के दौरान सामने आई।

मुख्य घटनाक्रम

आशीष मिश्रा के अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि गवाहों को धमकाने के मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, परंतु उसमें आशीष मिश्रा और अजय मिश्रा का नाम सम्मिलित नहीं है। न्यायालय ने इस बयान को औपचारिक रूप से रिकॉर्ड पर लिया।

राज्य सरकार की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि गवाह-धमकी से संबंधित एफआईआर की जाँच पूर्ण हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, अमनदीप सिंह के विरुद्ध चार्जशीट प्रस्तुत की गई है और संबंधित अदालत ने उसका संज्ञान भी ले लिया है। हालाँकि, अजय मिश्रा, आशीष मिश्रा तथा अन्य व्यक्तियों की कथित भूमिका की जाँच में उनके शामिल होने का कोई प्रमाण नहीं मिला।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता को राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट के उत्तर में दो सप्ताह के भीतर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला अब अगली सुनवाई तक के लिए स्थगित है।

एफआईआर की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि गवाहों को धमकाने के आरोप में उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष अक्टूबर में एफआईआर दर्ज की थी। यह कदम तब उठाया गया जब सर्वोच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता बलजिंदर सिंह की शिकायत पर कार्रवाई न होने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद अदालत के निर्देश पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पंजाब के मुक्तसर जाकर शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया और भारतीय दंड संहिता की धारा 195-ए, 506 और 120-बी के तहत मामला पंजीकृत किया गया।

मूल मामला: 3 अक्टूबर 2021 की हिंसा

मुख्य प्रकरण 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा से संबंधित है, जिसमें चार किसानों सहित कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। आरोप है कि आशीष मिश्रा से कथित तौर पर जुड़े वाहन-काफिले ने प्रदर्शन कर रहे किसानों को कुचल दिया था। आशीष मिश्रा इस मुख्य मामले में अभियुक्त हैं और फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रदत्त जमानत पर बाहर हैं।

आगे क्या होगा

शिकायतकर्ता के हलफनामे के बाद सर्वोच्च न्यायालय अगली सुनवाई में यह तय करेगा कि गवाह-धमकी के मामले में जाँच की दिशा पर्याप्त रही या नहीं। यह मामला लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों के लिए जाँच की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करने का आधार बनता है। शिकायतकर्ता के हलफनामे का इंतजार असली परीक्षा है — क्या न्यायालय स्टेटस रिपोर्ट को पर्याप्त मानेगा या पुनः जाँच का निर्देश देगा, यह लखीमपुर खीरी मामले की न्यायिक यात्रा का अगला निर्णायक मोड़ होगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखीमपुर खीरी गवाह धमकी मामले में सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
16 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में UP पुलिस ने बताया कि गवाह-धमकी जाँच में आशीष मिश्रा और अजय मिश्रा के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। चार्जशीट केवल अमनदीप सिंह के खिलाफ दाखिल की गई है।
गवाह धमकी मामले में एफआईआर कब और क्यों दर्ज हुई थी?
उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष अक्टूबर में यह एफआईआर दर्ज की थी। सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता बलजिंदर सिंह की शिकायत पर कार्रवाई न होने पर पुलिस को फटकार लगाई थी, जिसके बाद एक वरिष्ठ अधिकारी पंजाब के मुक्तसर गए और IPC की धारा 195-ए, 506 व 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया।
आशीष मिश्रा पर मुख्य मामले में क्या आरोप हैं?
आशीष मिश्रा पर आरोप है कि 3 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी में उनसे कथित तौर पर जुड़े वाहन-काफिले ने प्रदर्शनकारी किसानों को कुचल दिया, जिसमें चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हुई। वे इस मुख्य मामले में अभियुक्त हैं और सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर बाहर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को क्या निर्देश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता को राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट के जवाब में दो सप्ताह के भीतर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद अगली सुनवाई में मामले की आगे की दिशा तय होगी।
गवाह धमकी मामले में चार्जशीट में किसका नाम है?
राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, गवाह-धमकी मामले में केवल अमनदीप सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है और संबंधित अदालत ने उसका संज्ञान ले लिया है। अजय मिश्रा और आशीष मिश्रा का नाम इस चार्जशीट में नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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