लखीमपुर खीरी गवाह धमकी मामला: UP पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया — अजय मिश्रा व आशीष के खिलाफ कोई सबूत नहीं
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में 16 जुलाई 2026 को लखीमपुर खीरी हिंसा से जुड़े गवाह-धमकी प्रकरण में अहम सुनवाई हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि जाँच में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जो आशीष मिश्रा अथवा उनके पिता व पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की इस मामले में संलिप्तता साबित कर सके। पुलिस की यह जानकारी आशीष मिश्रा की जमानत से जुड़ी सुनवाई के दौरान सामने आई।
मुख्य घटनाक्रम
आशीष मिश्रा के अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि गवाहों को धमकाने के मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, परंतु उसमें आशीष मिश्रा और अजय मिश्रा का नाम सम्मिलित नहीं है। न्यायालय ने इस बयान को औपचारिक रूप से रिकॉर्ड पर लिया।
राज्य सरकार की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि गवाह-धमकी से संबंधित एफआईआर की जाँच पूर्ण हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, अमनदीप सिंह के विरुद्ध चार्जशीट प्रस्तुत की गई है और संबंधित अदालत ने उसका संज्ञान भी ले लिया है। हालाँकि, अजय मिश्रा, आशीष मिश्रा तथा अन्य व्यक्तियों की कथित भूमिका की जाँच में उनके शामिल होने का कोई प्रमाण नहीं मिला।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता को राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट के उत्तर में दो सप्ताह के भीतर अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला अब अगली सुनवाई तक के लिए स्थगित है।
एफआईआर की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि गवाहों को धमकाने के आरोप में उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष अक्टूबर में एफआईआर दर्ज की थी। यह कदम तब उठाया गया जब सर्वोच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता बलजिंदर सिंह की शिकायत पर कार्रवाई न होने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद अदालत के निर्देश पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पंजाब के मुक्तसर जाकर शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया और भारतीय दंड संहिता की धारा 195-ए, 506 और 120-बी के तहत मामला पंजीकृत किया गया।
मूल मामला: 3 अक्टूबर 2021 की हिंसा
मुख्य प्रकरण 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा से संबंधित है, जिसमें चार किसानों सहित कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। आरोप है कि आशीष मिश्रा से कथित तौर पर जुड़े वाहन-काफिले ने प्रदर्शन कर रहे किसानों को कुचल दिया था। आशीष मिश्रा इस मुख्य मामले में अभियुक्त हैं और फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रदत्त जमानत पर बाहर हैं।
आगे क्या होगा
शिकायतकर्ता के हलफनामे के बाद सर्वोच्च न्यायालय अगली सुनवाई में यह तय करेगा कि गवाह-धमकी के मामले में जाँच की दिशा पर्याप्त रही या नहीं। यह मामला लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।