पाकिस्तान में 6.51 लाख बच्चे टीकाकरण से वंचित, पीएमए ने जारी किया राष्ट्रीय रेड अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (पीएमए) ने 16 जुलाई को एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा कि पाकिस्तान एक विनाशकारी महामारी संकट के कगार पर है, क्योंकि देश में 6.51 लाख शिशु नियमित टीकाकरण व्यवस्था से पूरी तरह बाहर हैं और उन्हें डिप्थीरिया, टेटनस व काली खाँसी से बचाव वाली डीटीपी1 वैक्सीन की पहली खुराक तक नहीं मिली है। पीएमए ने इसे औपचारिक रूप से 'राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित किया है।
जीरो-डोज संकट क्या है
'जीरो-डोज' बच्चे वे शिशु होते हैं जिन्हें बुनियादी टीकाकरण की एक भी खुराक नहीं मिली होती। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र के कुल जीरो-डोज बच्चों में से 90 प्रतिशत केवल पाँच देशों — सूडान, यमन, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और सोमालिया — में केंद्रित हैं। इनमें से सूडान, यमन और सोमालिया सक्रिय युद्ध और शासन-पतन की स्थिति में हैं, जबकि पाकिस्तान का इस सूची में शामिल होना मुख्यतः प्रशासनिक लापरवाही और शासन विफलता को बताया गया है।
पीएमए की चेतावनी और विशेषज्ञ राय
पीएमए के महासचिव डॉ. अब्दुल गफूर शोरों ने कहा, 'चिकित्सकीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य के नजरिये से देखें तो 5 लाख से अधिक जीरो-डोज बच्चों की मौजूदगी प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती है।' उन्होंने आगे कहा, 'इन भयावह आँकड़ों के पीछे एक गहरी और व्यवस्थित समस्या है, जिसने देश के स्वास्थ्य ढाँचे को कमज़ोर कर दिया है।'
शोरों ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि 'किसी गैर-संघर्ष वाले देश में क्षेत्र के कुल जीरो-डोज बच्चों में से 14 प्रतिशत का होना शासन व्यवस्था की ऐसी विफलता है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।'
संकट की जड़ें: भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उपेक्षा
पीएमए ने इस संकट के लिए कई संरचनात्मक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है — प्रशासनिक नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद, विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) की कमज़ोर कार्यप्रणाली, दूरदराज के इलाकों तक सुरक्षित पहुँच का अभाव और वैक्सीन को लेकर जनता की आशंकाओं को दूर करने में विफलता। एसोसिएशन के अनुसार, '6.51 लाख जीरो-डोज बच्चों का होना दशकों से चली आ रही भ्रष्ट प्रथाओं, प्रशासनिक उपेक्षा और लगातार सरकारों की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का सीधा परिणाम है।'
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही पोलियो उन्मूलन में विफलता के कारण अंतरराष्ट्रीय आलोचना झेल रहा है। गौरतलब है कि यह क्षेत्र की एकमात्र ऐसी स्थिति है जहाँ युद्ध नहीं, बल्कि शासन-विफलता इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को टीकाकरण से वंचित कर रही है।
सामूहिक प्रतिरक्षा को खतरा
पीएमए ने चेतावनी दी है कि टीकाकरण में इतनी बड़ी कमी से सामूहिक प्रतिरक्षा (हर्ड इम्युनिटी) बनाए रखने की सीमा प्रभावित हो गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में रोकी जा सकने वाली बीमारियों के अनियंत्रित प्रसार का खतरा बढ़ गया है। इसमें डिप्थीरिया, खसरा और काली खाँसी जैसी बीमारियाँ शामिल हैं जो बच्चों के लिए जानलेवा हो सकती हैं।
पीएमए की माँगें और आगे की राह
एसोसिएशन ने सरकार से वैक्सीन आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक बनाने, तापमान-नियंत्रण में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने, लंबित भुगतान सुधारने और स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर वेतन, उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण तथा सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की माँग की है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो पाकिस्तान में रोके जा सकने वाले रोगों से बच्चों की मौतों में तेज़ वृद्धि अवश्यंभावी है।