चारा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की जमानत बरकरार रखी, झारखंड हाई कोर्ट को 6 महीने में अपील निपटाने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को 15 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली, जब न्यायालय ने चारा घोटाला मामले में उनकी जमानत रद्द करने और सजा निलंबन समाप्त करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। पटना स्थित अपने कौटिल्य नगर आवास से बाहर निकलने पर समर्थकों की भीड़ से घिरे यादव ने पत्रकारों से कहा, 'हाँ, मैं खुश हूँ।'
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा कि झारखंड हाई कोर्ट के उस फैसले को करीब सात वर्ष बीत चुके हैं, इसलिए इस स्तर पर उसमें हस्तक्षेप उचित नहीं होगा। पीठ ने झारखंड हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि 2018 से लंबित आपराधिक अपील का निपटारा छह महीने के भीतर किया जाए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला झारखंड के देवघर कोषागार से अवैध निकासी से जुड़ा है। झारखंड हाई कोर्ट ने 12 जुलाई 2019 के अपने आदेश में लालू प्रसाद यादव को जमानत देते हुए अंतिम फैसला आने तक सजा निलंबित रखी थी। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने हाई कोर्ट के इसी आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
सीबीआई और बचाव पक्ष की दलीलें
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने सीबीआई की ओर से दलील दी कि चारा घोटाले के विभिन्न मामलों में सुनाई गई सजाएँ क्रमवार चलनी चाहिए, जब तक अदालत अन्यथा आदेश न दे। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आधी सजा पूरी होने की गणना सही नहीं की गई थी, जिसके आधार पर सजा निलंबन का लाभ दिया गया।
दूसरी ओर, लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सजाएँ एक साथ चलेंगी या अलग-अलग, इस पर निर्णय अपील की अंतिम सुनवाई में होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने अपने विवेकाधिकार से यादव को वही राहत दी थी, जो आधी सजा पूरी कर चुके अन्य दोषियों को भी दी जाती है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अब झारखंड हाई कोर्ट को छह महीने की समयसीमा में लंबित अपील का निपटारा करना होगा। यह सुनवाई तय करेगी कि लालू प्रसाद यादव की जमानत और सजा निलंबन की स्थिति आगे किस दिशा में जाती है। गौरतलब है कि चारा घोटाले के अन्य मामलों में भी अदालती प्रक्रियाएँ अलग-अलग चरणों में चल रही हैं।