14 जुलाई 2026
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देवघर चारा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद की जमानत बरकरार रखी, हाईकोर्ट को 6 महीने में अपील निपटाने का निर्देश

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देवघर चारा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद की जमानत बरकरार रखी, हाईकोर्ट को 6 महीने में अपील निपटाने का निर्देश

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने देवघर चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव की जमानत से इनकार नहीं किया — लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। झारखंड हाईकोर्ट को छह महीने में अपील निपटाने का निर्देश मिला है, जो तय करेगा कि सजाएं समवर्ती चलेंगी या क्रमिक — और यही असली दांव है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2025 को लालू प्रसाद यादव की जमानत और सजा निलंबन बरकरार रखा।
झारखंड हाईकोर्ट को 6 महीने के भीतर 2018 से लंबित आपराधिक अपील का निपटारा करने का निर्देश।
सीबीआई ने 12 जुलाई 2019 के हाईकोर्ट आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें आधी सजा पूरी होने की गणना पर सवाल उठाया था।
सुंदरेश व न्यायमूर्ति पी.बी.
वराले की पीठ ने कहा — 7 साल बाद हस्तक्षेप उचित नहीं।
देवघर कोषागार मामले में विशेष अदालत ने लालू को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2025 को देवघर कोषागार चारा घोटाले से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को झारखंड उच्च न्यायालय से मिली राहत बरकरार रखी। न्यायालय ने साथ ही झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले में लंबित आपराधिक अपील का निपटारा छह महीने के भीतर करे। यह फैसला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस याचिका पर आया, जिसमें हाईकोर्ट के 12 जुलाई 2019 के आदेश को चुनौती दी गई थी।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मंगलवार को कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को करीब सात साल बीत चुके हैं, इसलिए इस स्तर पर उसमें हस्तक्षेप उचित नहीं है। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2018 से लंबित आपराधिक अपील पर अब शीघ्र सुनवाई होनी चाहिए।

गौरतलब है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में झारखंड हाईकोर्ट ने यह मानते हुए उन्हें जमानत दी थी कि वह आधी से अधिक सजा काट चुके हैं और इसी आधार पर अन्य सह-दोषियों को भी राहत मिल चुकी है।

सीबीआई की दलीलें

सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने तर्क दिया कि चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में दी गई सजाएं क्रमिक रूप से — यानी एक के बाद एक — चलनी चाहिए, जब तक न्यायालय अलग से कोई आदेश न दे। एजेंसी का कहना था कि आधी सजा पूरी होने की गणना सही नहीं थी, जिसके आधार पर सजा निलंबन का लाभ दिया गया।

बचाव पक्ष का पक्ष

लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस दलील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सजाएं साथ-साथ चलेंगी या अलग-अलग, इस पर निर्णय अपील की अंतिम सुनवाई के दौरान होना चाहिए। सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करते हुए लालू प्रसाद को वही राहत दी थी, जो आधी सजा पूरी कर चुके अन्य दोषियों को भी प्राप्त हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने सजा निलंबन का आदेश रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि झारखंड हाईकोर्ट लंबित आपराधिक अपील का निपटारा छह महीने के भीतर करे। यह मामला चारा घोटाले से जुड़े उन कई मुकदमों में से एक है, जो लालू प्रसाद के विरुद्ध वर्षों से न्यायालयों में चल रहे हैं।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, झारखंड हाईकोर्ट को अब 2018 से लंबित आपराधिक अपील की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करनी होगी। इस अपील में अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि सजाएं समवर्ती रूप से चलेंगी या क्रमिक रूप से — जो लालू प्रसाद की कुल सजा की अवधि और उनकी जमानत की स्थिति को सीधे प्रभावित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न सीबीआई की — यह एक स्थगन है। असली प्रश्न अभी अनुत्तरित है: क्या चारा घोटाले के विभिन्न मामलों की सजाएं समवर्ती चलेंगी या क्रमिक? इस एक प्रश्न का उत्तर लालू प्रसाद की कुल सजा की अवधि को निर्णायक रूप से बदल सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और RJD अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश में है। झारखंड हाईकोर्ट पर अब छह महीने की समय-सीमा है — और उसका फैसला महज़ एक कानूनी मसला नहीं, एक राजनीतिक घड़ी भी होगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2025 को लालू प्रसाद यादव की जमानत और सजा निलंबन बरकरार रखा तथा झारखंड हाईकोर्ट को छह महीने के भीतर लंबित आपराधिक अपील निपटाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने सीबीआई की याचिका पर हाईकोर्ट के 2019 के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया।
देवघर कोषागार चारा घोटाले में लालू प्रसाद को क्या सजा हुई थी?
सीबीआई की विशेष अदालत ने देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी।
सीबीआई ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को क्यों चुनौती दी?
सीबीआई का तर्क था कि आधी सजा पूरी होने की गणना गलत थी, जिसके आधार पर लालू प्रसाद को सजा निलंबन का लाभ दिया गया। एजेंसी ने यह भी कहा कि चारा घोटाले के विभिन्न मामलों की सजाएं क्रमिक रूप से चलनी चाहिए, न कि एक साथ।
अब आगे क्या होगा — झारखंड हाईकोर्ट में?
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार झारखंड हाईकोर्ट को 2018 से लंबित आपराधिक अपील का निपटारा छह महीने के भीतर करना होगा। इस अपील में अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि सजाएं समवर्ती रूप से चलेंगी या क्रमिक रूप से।
कपिल सिब्बल ने लालू प्रसाद के बचाव में क्या दलील दी?
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सजाएं समवर्ती चलेंगी या क्रमिक, इस पर निर्णय अपील की अंतिम सुनवाई के दौरान होना चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने विवेकाधिकार का प्रयोग करते हुए लालू प्रसाद को वही राहत दी थी जो अन्य सह-दोषियों को भी मिली थी।
राष्ट्र प्रेस
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