देवघर चारा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद की जमानत बरकरार रखी, हाईकोर्ट को 6 महीने में अपील निपटाने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2025 को देवघर कोषागार चारा घोटाले से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को झारखंड उच्च न्यायालय से मिली राहत बरकरार रखी। न्यायालय ने साथ ही झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले में लंबित आपराधिक अपील का निपटारा छह महीने के भीतर करे। यह फैसला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस याचिका पर आया, जिसमें हाईकोर्ट के 12 जुलाई 2019 के आदेश को चुनौती दी गई थी।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मंगलवार को कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को करीब सात साल बीत चुके हैं, इसलिए इस स्तर पर उसमें हस्तक्षेप उचित नहीं है। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2018 से लंबित आपराधिक अपील पर अब शीघ्र सुनवाई होनी चाहिए।
गौरतलब है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में झारखंड हाईकोर्ट ने यह मानते हुए उन्हें जमानत दी थी कि वह आधी से अधिक सजा काट चुके हैं और इसी आधार पर अन्य सह-दोषियों को भी राहत मिल चुकी है।
सीबीआई की दलीलें
सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने तर्क दिया कि चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में दी गई सजाएं क्रमिक रूप से — यानी एक के बाद एक — चलनी चाहिए, जब तक न्यायालय अलग से कोई आदेश न दे। एजेंसी का कहना था कि आधी सजा पूरी होने की गणना सही नहीं थी, जिसके आधार पर सजा निलंबन का लाभ दिया गया।
बचाव पक्ष का पक्ष
लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस दलील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सजाएं साथ-साथ चलेंगी या अलग-अलग, इस पर निर्णय अपील की अंतिम सुनवाई के दौरान होना चाहिए। सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करते हुए लालू प्रसाद को वही राहत दी थी, जो आधी सजा पूरी कर चुके अन्य दोषियों को भी प्राप्त हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने सजा निलंबन का आदेश रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि झारखंड हाईकोर्ट लंबित आपराधिक अपील का निपटारा छह महीने के भीतर करे। यह मामला चारा घोटाले से जुड़े उन कई मुकदमों में से एक है, जो लालू प्रसाद के विरुद्ध वर्षों से न्यायालयों में चल रहे हैं।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, झारखंड हाईकोर्ट को अब 2018 से लंबित आपराधिक अपील की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करनी होगी। इस अपील में अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि सजाएं समवर्ती रूप से चलेंगी या क्रमिक रूप से — जो लालू प्रसाद की कुल सजा की अवधि और उनकी जमानत की स्थिति को सीधे प्रभावित करेगा।