लद्दाख में ड्रग्स का खतरा: एलजी वीके सक्सेना ने डीजीपी को दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश, 298 नए मामले सामने आए
सारांश
मुख्य बातें
लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने केंद्र शासित प्रदेश में नशीले पदार्थों की बढ़ती समस्या पर गहरी चिंता जताते हुए 26 मई 2026 को डीजीपी को ड्रग तस्करों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के माध्यम से बताया कि लद्दाख में हाल के महीनों में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के 298 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जो एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
उपराज्यपाल सक्सेना ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि 298 नए मामलों में 101 मामले सिंथेटिक ओपिओइड से जुड़े हैं, जबकि 40 मामले कैनाबिस और पॉली-सब्सटेंस के दुरुपयोग के हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि यह खतरा लगभग हर आयु वर्ग को प्रभावित कर रहा है। गौरतलब है कि सबसे अधिक परेशान करने वाली बात यह है कि नाबालिग और लड़कियाँ भी तेज़ी से नशे की गिरफ्त में आ रही हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
सक्सेना ने कहा कि उन्होंने डीजीपी को निर्देश दिया है कि ड्रग तस्करों के ठिकानों को नष्ट किया जाए और तस्करी या नशे के उपयोग में संलिप्त किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध बिना किसी ढील के कार्रवाई की जाए। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई अन्य पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी नशे की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है।
समाज से अपील
उपराज्यपाल ने सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और शैक्षिक संस्थानों तथा उनके नेताओं से आग्रह किया कि वे माता-पिता और युवाओं के बीच नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाएँ। उन्होंने कहा कि यह खतरा हमारे बच्चों का भविष्य बर्बाद कर सकता है, इसलिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी ज़रूरी है।
आम जनता पर असर
सक्सेना ने लद्दाख के प्रत्येक नागरिक से अपील की कि यदि उन्हें ड्रग तस्करी या नशे के दुरुपयोग की कोई भी जानकारी मिले, तो वे तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। यह जन-भागीदारी की अपील दर्शाती है कि प्रशासन केवल पुलिसिया कार्रवाई तक सीमित न रहकर समुदाय को भी इस लड़ाई में शामिल करना चाहता है।
क्या होगा आगे
डीजीपी को दिए गए निर्देशों के बाद अब यह देखना होगा कि लद्दाख पुलिस किस गति से ड्रग नेटवर्क के विरुद्ध अभियान चलाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण लद्दाख में तस्करी के रास्तों पर नज़र रखना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, और इसके लिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय आवश्यक होगा।