रोहन गुप्ता का कांग्रेस पर पलटवार: 'विरोध का हक है, पर PM के पिता पर टिप्पणी अस्वीकार्य'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने 26 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जब राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता पर की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्षी माँगों के चलते राजनीतिक बयानबाज़ी पहले से ही चरम पर है।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
रोहन गुप्ता ने कहा, 'मल्लिकार्जुन खड़गे बड़े नेता हैं, लेकिन उनकी भाषा देखें — हताशा साफ दिखाई देती है। लोकतंत्र में विरोध सभी का अधिकार है, लेकिन वह व्यक्तिगत टिप्पणी में चले जाते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि 'जनता के दरबार में जिनकी हार होती है, वही ऐसी गतिविधि में मजबूर होते हैं।' गुप्ता ने यह भी जोड़ा कि देश की जनता नफरत नहीं चाहती और कांग्रेस को देश के इतिहास से सबक लेना चाहिए।
1 नवंबर की रैली पर सवाल
1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को लेकर भी रोहन गुप्ता ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि दीपावली के समय — जो व्यापारियों के लिए सबसे अहम अवधि होती है — कांग्रेस का रैली आयोजन उसकी 'हताशा' को दर्शाता है। CTI (कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से यह रैली कुछ दिन टालने की अपील की थी, जिसे कांग्रेस ने अनसुना कर दिया। गुप्ता के अनुसार, व्यापारियों की इस चिट्ठी को नज़रअंदाज़ करना कांग्रेस की जनविरोधी मानसिकता को उजागर करता है।
सिख समाज और ऐतिहासिक संदर्भ
रोहन गुप्ता ने 1 नवंबर की तारीख को लेकर एक और तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस राज में 1 नवंबर को जिस प्रकार से सिख समाज के खिलाफ गतिविधियाँ की गई थीं, क्या कांग्रेस पार्टी उसे भूल गई?' गौरतलब है कि 1 नवंबर 1984 को सिख विरोधी दंगों की शुरुआत हुई थी, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे। इस ऐतिहासिक संदर्भ को उठाकर भाजपा ने कांग्रेस की रैली की तारीख पर सियासी दबाव बनाने की कोशिश की है।
कांग्रेस सांसद का बचाव और भाजपा का जवाब
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने खड़गे की टिप्पणी का बचाव किया था, जिस पर रोहन गुप्ता ने कहा कि पूरा आंदोलन जनता के लिए नहीं बल्कि 'तख्तापलट' के लिए था। उन्होंने इसे बांग्लादेश की राजनीतिक उथल-पुथल से जोड़ते हुए कहा कि भारत की जनता ऐसे षड्यंत्र में नहीं फँसेगी। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सरकार पर हमलावर है।
न्यायिक रास्ते की अपील
रोहन गुप्ता ने विपक्ष को सलाह दी कि यदि उनके पास कोई साक्ष्य है तो वे सर्वोच्च न्यायालय या राष्ट्रपति के समक्ष जाएँ। उन्होंने कहा, 'दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता।' उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय लोकतंत्र में किसी दल का यह अधिकार नहीं है कि वह चुनावी हार के बाद संस्थाओं को अपना कार्यालय समझे। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक वाकयुद्ध और तेज होने की संभावना है।