26 अक्टूबर 2026
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रोहन गुप्ता का कांग्रेस पर पलटवार: 'विरोध का हक है, पर PM के पिता पर टिप्पणी अस्वीकार्य'

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रोहन गुप्ता का कांग्रेस पर पलटवार: 'विरोध का हक है, पर PM के पिता पर टिप्पणी अस्वीकार्य'

सारांश

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग और खड़गे की विवादित टिप्पणी के बीच भाजपा के रोहन गुप्ता ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। 1 नवंबर की रैली पर व्यापारियों की आपत्ति को नज़रअंदाज़ करना और 1984 के सिख दंगों का ऐतिहासिक संदर्भ — भाजपा ने एक साथ कई मोर्चों पर हमला बोला।

मुख्य बातें

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने 26 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद में कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया।
मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा PM मोदी के पिता पर की गई टिप्पणी को गुप्ता ने 'व्यक्तिगत हमला' और 'अस्वीकार्य' करार दिया।
CTI ने राहुल गांधी से 1 नवंबर की रैली टालने की अपील की थी, जिसे कांग्रेस ने नज़रअंदाज़ किया।
गुप्ता ने 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों का संदर्भ देते हुए कांग्रेस की रैली की तारीख पर सवाल उठाए।
विवाद का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्षी माँग से जुड़ा है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने 26 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जब राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता पर की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्षी माँगों के चलते राजनीतिक बयानबाज़ी पहले से ही चरम पर है।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

रोहन गुप्ता ने कहा, 'मल्लिकार्जुन खड़गे बड़े नेता हैं, लेकिन उनकी भाषा देखें — हताशा साफ दिखाई देती है। लोकतंत्र में विरोध सभी का अधिकार है, लेकिन वह व्यक्तिगत टिप्पणी में चले जाते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि 'जनता के दरबार में जिनकी हार होती है, वही ऐसी गतिविधि में मजबूर होते हैं।' गुप्ता ने यह भी जोड़ा कि देश की जनता नफरत नहीं चाहती और कांग्रेस को देश के इतिहास से सबक लेना चाहिए।

1 नवंबर की रैली पर सवाल

1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को लेकर भी रोहन गुप्ता ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि दीपावली के समय — जो व्यापारियों के लिए सबसे अहम अवधि होती है — कांग्रेस का रैली आयोजन उसकी 'हताशा' को दर्शाता है। CTI (कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से यह रैली कुछ दिन टालने की अपील की थी, जिसे कांग्रेस ने अनसुना कर दिया। गुप्ता के अनुसार, व्यापारियों की इस चिट्ठी को नज़रअंदाज़ करना कांग्रेस की जनविरोधी मानसिकता को उजागर करता है।

सिख समाज और ऐतिहासिक संदर्भ

रोहन गुप्ता ने 1 नवंबर की तारीख को लेकर एक और तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस राज में 1 नवंबर को जिस प्रकार से सिख समाज के खिलाफ गतिविधियाँ की गई थीं, क्या कांग्रेस पार्टी उसे भूल गई?' गौरतलब है कि 1 नवंबर 1984 को सिख विरोधी दंगों की शुरुआत हुई थी, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे। इस ऐतिहासिक संदर्भ को उठाकर भाजपा ने कांग्रेस की रैली की तारीख पर सियासी दबाव बनाने की कोशिश की है।

कांग्रेस सांसद का बचाव और भाजपा का जवाब

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने खड़गे की टिप्पणी का बचाव किया था, जिस पर रोहन गुप्ता ने कहा कि पूरा आंदोलन जनता के लिए नहीं बल्कि 'तख्तापलट' के लिए था। उन्होंने इसे बांग्लादेश की राजनीतिक उथल-पुथल से जोड़ते हुए कहा कि भारत की जनता ऐसे षड्यंत्र में नहीं फँसेगी। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सरकार पर हमलावर है।

न्यायिक रास्ते की अपील

रोहन गुप्ता ने विपक्ष को सलाह दी कि यदि उनके पास कोई साक्ष्य है तो वे सर्वोच्च न्यायालय या राष्ट्रपति के समक्ष जाएँ। उन्होंने कहा, 'दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता।' उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय लोकतंत्र में किसी दल का यह अधिकार नहीं है कि वह चुनावी हार के बाद संस्थाओं को अपना कार्यालय समझे। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक वाकयुद्ध और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जनता का ध्यान असली मुद्दे से भटकाती है। 1984 के दंगों का संदर्भ राजनीतिक रूप से धारदार ज़रूर है, लेकिन यह उस मूल सवाल का जवाब नहीं देता कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर उठाई गई आपत्तियाँ कितनी वाजिब हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है, वह यह है कि दोनों पक्ष संस्थागत जवाबदेही के बजाय चुनावी आरोप-प्रत्यारोप में उलझे हैं।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहन गुप्ता ने खड़गे की किस टिप्पणी पर आपत्ति जताई?
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रोहन गुप्ता ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता पर की गई टिप्पणी को 'व्यक्तिगत हमला' और 'अस्वीकार्य' करार दिया। उनके अनुसार लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन इस प्रकार की निजी टिप्पणी हताशा का प्रतीक है।
1 नवंबर की कांग्रेस रैली पर विवाद क्यों है?
CTI (कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) ने राहुल गांधी से 1 नवंबर की रैली दीपावली के व्यावसायिक मौसम को देखते हुए टालने की अपील की थी। भाजपा ने यह भी याद दिलाया कि 1 नवंबर 1984 को सिख विरोधी दंगों की शुरुआत हुई थी, और कांग्रेस का इस तारीख को रैली करना उस इतिहास के प्रति संवेदनहीनता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विवाद क्या है?
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग की है, जिसके कारण राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा इस माँग को 'तख्तापलट की कोशिश' बता रही है, जबकि विपक्ष चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठा रहा है।
क्या कांग्रेस ने खड़गे की टिप्पणी का बचाव किया?
हाँ, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने खड़गे की टिप्पणी का बचाव किया। इस पर भाजपा के रोहन गुप्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस की यह 'बौखलाहट' जनता के सामने उजागर हो रही है।
भाजपा ने विपक्ष को क्या सलाह दी?
रोहन गुप्ता ने कहा कि यदि विपक्ष के पास कोई साक्ष्य है तो वे सर्वोच्च न्यायालय या राष्ट्रपति के समक्ष जाएँ। उन्होंने कहा कि 'दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा' — संस्थागत रास्ते अपनाने की जगह सड़क पर आंदोलन करना लोकतांत्रिक मर्यादा के विरुद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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