लखनऊ में इन्फ्लुएंसर मानसी की संदिग्ध मौत, पति सागर राजपूत सहित 6 पर दहेज हत्या का मामला दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक युवा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मानसी की 1 जून 2026 को ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने पति सागर राजपूत और उसके परिवार के कई सदस्यों पर हत्या की साजिश रचने तथा शव को आत्महत्या जैसा दिखाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने परिवार की लिखित शिकायत के आधार पर 6 आरोपियों के विरुद्ध दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
मामले का घटनाक्रम
कानपुर मूल की मानसी ने 2024 में सागर राजपूत से विवाह किया था। दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय थे। परिवार के अनुसार, विवाह के समय बड़ी मात्रा में नकद राशि, घरेलू सामान और उपहार दिए गए थे, फिर भी ससुराल पक्ष संतुष्ट नहीं था और अतिरिक्त दहेज — जिसमें कार की माँग भी शामिल थी — के लिए लगातार दबाव बनाता रहा।
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, माँगें पूरी न होने पर मानसी को भावनात्मक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। मानसी ने अपने परिजनों को कई बार ससुराल में हो रही परेशानियों से अवगत कराया था, जिसके बाद रिश्तेदार विवाद सुलझाने के लिए कई बार लखनऊ भी आए।
मौत की सूचना और परिवार का आरोप
शनिवार को मानसी के परिवार को उसकी मृत्यु की सूचना दी गई। शुरुआत में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया, लेकिन परिजनों ने इसका पुरजोर खंडन करते हुए आरोप लगाया कि मानसी की हत्या की गई और बाद में शव को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। परिजनों के इस बयान को पुलिस ने दर्ज कर जाँच शुरू की।
एफआईआर में नामजद आरोपी
पीड़िता के परिवार की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने 6 सदस्यों के विरुद्ध दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर में पति सागर राजपूत, ससुर राजेश, देवर अनु, ननद बरखा, ननद चांदनी और बुआ आशा को आरोपी बनाया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सागर राजपूत से फिलहाल पूछताछ जारी है और मौत की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए आगे की जाँच की जा रही है।
दहेज हत्या: राष्ट्रीय परिदृश्य
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों के अनुसार, भारत में 2024 में दहेज से संबंधित 5,737 मौतें दर्ज की गईं — यानी औसतन प्रतिदिन लगभग 16 मौतें। इनमें उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर रहा, जहाँ 2,038 मामले दर्ज हुए। बिहार में 1,078 मामलों के साथ दूसरा स्थान रहा। मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में भी बड़ी संख्या में मामले सामने आए।
यह ऐसे समय में आया है जब दहेज निषेध अधिनियम और धारा 304-B जैसे कानूनी प्रावधानों के बावजूद दहेज उत्पीड़न की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रहीं। मानसी का मामला इस त्रासदी की एक और कड़वी याद दिलाता है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय और आत्मनिर्भर दिखने वाली महिलाएँ भी घरेलू हिंसा की शिकार हो सकती हैं।
आगे की जाँच
पुलिस के अनुसार, मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों की जाँच की जा रही है। जाँच के नतीजों पर परिवार और सामाजिक संगठनों की नज़र बनी हुई है।