मदरसा शिक्षकों की नियुक्ति-वेतन पर अखिलेश के बयान का काजी नज्म अली ने किया स्वागत, घोषणापत्र में शामिल करने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
मिर्जापुर में काजी नज्म अली ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के उस बयान का स्वागत किया है, जिसमें मदरसों की समस्याओं के समाधान तथा शिक्षकों की नियुक्ति और वेतन बहाली की बात कही गई है। काजी नज्म अली ने कहा कि मदरसों से जुड़े मुद्दे केवल आधुनिकीकरण शिक्षकों तक सीमित नहीं हैं — डिग्री मान्यता, नियुक्ति, पेंशन और संस्था-अनुमोदन जैसी कई परतें इस संकट में शामिल हैं।
अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया
काजी नज्म अली ने कहा कि अखिलेश यादव ने मदरसों को अपनी प्राथमिकता में रखा और आधुनिकीकरण शिक्षकों से जुड़े मुद्दे पर स्पष्ट बयान दिया — यह सराहनीय कदम है। उन्होंने हालाँकि यह भी रेखांकित किया कि केवल एक वर्ग के शिक्षकों की बात करने से समस्या का समग्र समाधान नहीं होगा। मदरसा तंत्र को एक साथ कई मोर्चों पर राहत की दरकार है।
कामिल और फाजिल डिग्री का संकट
काजी नज्म अली ने कामिल और फाजिल की डिग्रियों के निरस्त होने के मुद्दे को विशेष रूप से उठाया। उनका कहना है कि यदि समाजवादी पार्टी की पिछली सरकारों ने समय रहते किसी विश्वविद्यालय की स्थापना कर इन डिग्रियों को वैधानिक मान्यता दिलाने की व्यवस्था की होती, तो आज यह संकट उत्पन्न नहीं होता। उन्होंने इस मुद्दे को पार्टी के राजनीतिक घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल करने की माँग की।
नियुक्ति, वेतन और पेंशन की समस्याएँ
काजी नज्म अली के अनुसार, वर्तमान में मदरसों में रिक्त पदों पर नई नियुक्तियाँ नहीं हो रही हैं। सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों के स्थान पर नए शिक्षकों की तैनाती न होने से शिक्षण व्यवस्था बाधित हो रही है। इसके अतिरिक्त, पेंशन का मामला और नए मदरसों को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया में अड़चनें भी लंबे समय से अनसुलझी हैं।
सपा से घोषणापत्र में शामिल करने की अपील
काजी नज्म अली ने समाजवादी पार्टी से अपील की कि वह इन सभी मुद्दों — डिग्री मान्यता, शिक्षक नियुक्ति, वेतन बहाली, पेंशन और संस्था-अनुमोदन — को अपने मंसूर, दस्तूर और चुनावी घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से शामिल करे। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी सरकार बनने की स्थिति में इन समस्याओं के समाधान का ठोस वादा करती है, तो यह मदरसा समुदाय के व्यापक हित में होगा।
आगे की राह
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को लेकर कानूनी और प्रशासनिक विवाद जारी हैं। मुस्लिम समाज के एक बड़े वर्ग की निगाहें अब इस पर हैं कि सपा अपने आगामी चुनावी दस्तावेज़ में इन माँगों को किस रूप में जगह देती है।