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सपा शासन में मदरसा शिक्षा सबसे ज्यादा खराब हुई — आंकड़े बताते हैं: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश अंसारी

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सपा शासन में मदरसा शिक्षा सबसे ज्यादा खराब हुई — आंकड़े बताते हैं: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश अंसारी

सारांश

2027 चुनावों से पहले अखिलेश यादव के मदरसा-सुधार वादों पर भाजपा मंत्री दानिश अंसारी ने पलटवार किया — आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सपा के अपने कार्यकाल में मदरसा शिक्षा की हालत सबसे खराब रही। यूपी की राजनीति में मदरसा मुद्दा एक बार फिर केंद्र में है।

मुख्य बातें

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश अंसारी ने कहा कि 2012-2017 में सपा शासन के दौरान मदरसा शिक्षा की स्थिति सबसे खराब थी।
अखिलेश यादव ने 2027 विधानसभा चुनावों से पहले मदरसा शिक्षकों का बकाया वेतन देने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और शिक्षामित्रों को नियमित सुविधाएँ देने का वादा किया।
भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने अखिलेश पर मुस्लिम बच्चों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने संविधान और लोकतंत्र के आधार पर मदरसा विकास का स्वागत करते हुए भाजपा पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि अखिलेश को वादों से पहले सरकार बनानी होगी।

उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश अंसारी ने 29 सितंबर 2026 को कहा कि आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि 2012 से 2017 के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के शासनकाल में मदरसा शिक्षा की स्थिति सबसे अधिक खराब हुई। यह प्रतिक्रिया सपा प्रमुख अखिलेश यादव के उन वादों के जवाब में आई, जिनमें उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले मदरसा शिक्षकों का बकाया वेतन देने और मदरसा शिक्षा में सुधार लाने का संकल्प जताया था।

अखिलेश यादव के वादे और सपा का एजेंडा

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को कई घोषणाएँ कीं, जिनमें पुरानी पेंशन योजना को लागू करना, शिक्षामित्रों को नियमित शिक्षकों के समान सुविधाएँ देना और आधुनिक मदरसों में शिक्षकों का बकाया वेतन चुकाना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत स्कूलों से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाया जाएगा। यह घोषणाएँ 2027 विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में की गई हैं, जिससे इनका राजनीतिक महत्व स्पष्ट है।

मंत्री दानिश अंसारी की तीखी प्रतिक्रिया

मंत्री दानिश अंसारी ने सपा की घोषणा को 'अच्छा कदम' कहते हुए भी पूछा कि जब सपा 2012 से 2017 तक सत्ता में थी, तब यही काम क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा, 'सरकार कागजात से चलती है, बातों से नहीं। न तो आपकी नीतियाँ अच्छी थीं और न ही राज्य के मुसलमानों के विकास का आपका कोई इरादा था।' उनके अनुसार, सपा के शासनकाल के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि उस दौर में मदरसा शिक्षा की हालत सबसे बुरी रही।

भाजपा और कांग्रेस की प्रतिक्रियाएँ

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि वे केवल मदरसों पर ध्यान केंद्रित कर मुस्लिम बच्चों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा दिलाने और उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर व प्रोफेसर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि यदि मदरसों और अन्य संस्थाओं का विकास लोकतंत्र और संविधान की भावना के अनुरूप किया जाए, तो इसका स्वागत होना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सांप्रदायिक तनाव भड़काने के उद्देश्य से ही मदरसों का नाम सबसे पहले लिया।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की राय

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि अखिलेश यादव को वादे करने से पहले सरकार बनानी होगी। उन्होंने जोर दिया कि मदरसों सहित सभी शैक्षणिक संस्थाओं का विकास इसलिए होना चाहिए ताकि वंचित वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सके।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही शिक्षा, विशेषकर अल्पसंख्यक शिक्षा, एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। यह बहस ऐसे समय में तेज हो रही है जब सपा, भाजपा और कांग्रेस — तीनों दल मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने की कोशिश में हैं। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सपा अपने वादों को ठोस नीतिगत प्रस्तावों में बदल पाती है, और क्या सत्तारूढ़ भाजपा अपने दावों को आंकड़ों से प्रमाणित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि न तो उन्होंने वे आंकड़े सार्वजनिक किए और न ही भाजपा सरकार के अपने कार्यकाल में मदरसा सुधार के कोई ठोस परिणाम सामने रखे। अखिलेश के वादे चुनावी हैं, यह स्पष्ट है — लेकिन भाजपा का 'मुसलमान बच्चे सिर्फ इमाम-मौलवी बनाना चाहते हो' वाला आरोप ध्रुवीकरण की पुरानी लिपि है। असली प्रश्न यह है कि उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों के बकाया वेतन की समस्या किस सरकार में कितनी हल हुई — इसका जवाब किसी भी दल ने आंकड़ों के साथ ईमानदारी से नहीं दिया।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दानिश अंसारी ने सपा के मदरसा शिक्षा पर क्या आरोप लगाया?
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश अंसारी ने कहा कि आंकड़ों के अनुसार 2012 से 2017 के बीच सपा शासनकाल में मदरसा शिक्षा की स्थिति सबसे खराब रही। उन्होंने सवाल उठाया कि सपा ने अपने कार्यकाल में मदरसों के विकास के लिए काम क्यों नहीं किया।
अखिलेश यादव ने 2027 चुनावों से पहले मदरसों को लेकर क्या वादा किया?
अखिलेश यादव ने वादा किया कि सपा की सरकार आने पर आधुनिक मदरसों के शिक्षकों का बकाया वेतन दिया जाएगा, पुरानी पेंशन योजना बहाल होगी और शिक्षामित्रों को नियमित शिक्षकों जैसी सुविधाएँ मिलेंगी। यह घोषणाएँ 2027 विधानसभा चुनावों को देखते हुए की गई हैं।
भाजपा ने अखिलेश यादव के मदरसा वादे पर क्या कहा?
भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि वे मदरसों पर ध्यान देकर मुस्लिम बच्चों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाकर डॉक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस का मदरसा विकास के मुद्दे पर क्या रुख है?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि यदि मदरसों और अन्य संस्थाओं का विकास संविधान और लोकतंत्र को आधार बनाकर होता है तो इसका स्वागत है। साथ ही, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सभी शैक्षणिक संस्थानों का विकास होना चाहिए ताकि वंचित बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके।
उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा का मुद्दा 2027 चुनावों में क्यों अहम है?
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता हैं और मदरसा शिक्षा सीधे अल्पसंख्यक समुदाय की शैक्षणिक स्थिति से जुड़ी है। 2027 चुनावों से पहले सपा, भाजपा और कांग्रेस तीनों दल इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर हमला करते हुए मुस्लिम और अन्य मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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