महाराष्ट्र: मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने विश्वविद्यालयों को प्रश्नपत्र लीक रोकने के दिशानिर्देश बनाने का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने 12 अगस्त 2026 को राज्य के सभी सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि वे परीक्षा प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार के ढाँचे पर आधारित व्यापक दिशानिर्देश तैयार करें और प्रकाशित करें। यह आदेश नीट सहित कई प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई लीक की घटनाओं के बाद देशभर में उठे युवा आक्रोश की पृष्ठभूमि में आया है।
बैठक में क्या हुआ
मंत्री पाटिल ने राज्यभर के सभी सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ एक ऑनलाइन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें महाराष्ट्र के उच्च शिक्षा क्षेत्र के प्रमुख शैक्षणिक और प्रशासनिक मुद्दों की समीक्षा की गई। बैठक के बाद जारी सरकारी विज्ञप्ति में कई महत्त्वपूर्ण निर्देशों का उल्लेख किया गया।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक आधिकारिक परिपत्र जारी किया जाए, जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सीधी जवाबदेही तय की जाए ताकि परीक्षाएँ लीक-मुक्त हों। साथ ही, परीक्षा नियंत्रण विभागों के प्रमुखों के लिए एक विशेष कार्यशाला आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया, जिसमें अन्य राज्यों में नई नीति के कार्यान्वयन की सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन किया जाएगा।
एनईपी और शैक्षणिक सुधार
मंत्री पाटिल ने विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक समान शैक्षणिक कैलेंडर अपनाने का निर्देश दिया। संस्थानों को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 और 2027-28 से चौथे वर्ष के ऑनर्स डिग्री कार्यक्रम शुरू करने के लिए एक व्यापक ढाँचा तैयार करना होगा।
छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए, कुलपतियों और प्रो-कुलपतियों को कम से कम 50 छात्रों के समूह के साथ साप्ताहिक रूप से सीधे संवाद सत्र आयोजित करने होंगे। इसके अतिरिक्त, संकाय, बुनियादी ढाँचे, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और शैक्षिक संसाधनों की साझेदारी के लिए कॉलेजों को क्लस्टर समूहों में वर्गीकृत किया जाएगा। मुंबई विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों के मौजूदा क्लस्टर पाठ्यक्रमों से प्रेरणा लेते हुए, प्रत्येक विश्वविद्यालय को हर महीने कम से कम एक क्लस्टर पहल लागू करनी होगी।
निजी कौशल विश्वविद्यालयों के लिए नया नियामक ढाँचा
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने स्व-वित्तपोषित निजी कौशल विश्वविद्यालयों के नियामक ढाँचे में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत विश्वविद्यालय-विशिष्ट अधिनियमों को एक एकीकृत विधायी ढाँचे से प्रतिस्थापित किया गया है। 5 फरवरी 2021 का पिछला सरकारी संकल्प निरस्त कर दिया गया है और भविष्य के संस्थान महाराष्ट्र निजी कौशल विश्वविद्यालय (स्थापना एवं विनियमन) अधिनियम, 2024 के अंतर्गत संचालित होंगे।
नए दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रायोजक निकायों को ₹1 करोड़ के अप्रतिदेय शुल्क के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्रस्तुत करनी होगी। आशय पत्र (LOI) मिलने के बाद प्रायोजकों के पास अनुपालन रिपोर्ट देने के लिए एक वर्ष का समय होगा। अधिकतम दो एक-वर्षीय विस्तार प्रति वर्ष ₹50 लाख (प्रारंभिक प्रस्ताव शुल्क का 50 प्रतिशत) के शुल्क पर दिए जा सकते हैं। निर्धारित समय सीमा में अनुपालन न करने पर LOI स्वतः रद्द हो जाएगा। विश्वविद्यालय के संविधान अधिनियम में किसी भी संशोधन के लिए ₹50 लाख का प्रसंस्करण शुल्क देय होगा।
भूमि और बुनियादी ढाँचे की अनिवार्यताएँ
मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार, स्व-वित्तपोषित निजी कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए भूमि की न्यूनतम आवश्यकताएँ इस प्रकार निर्धारित की गई हैं: ग्रामीण क्षेत्रों में 25 एकड़, तहसील/जिला मुख्यालयों में 15 एकड़, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और ठाणे नगर निगम को छोड़कर शहरी क्षेत्रों में 10 एकड़, और महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में भी 10 एकड़। इसके साथ ₹10 करोड़ का बंदोबस्ती कोष अनिवार्य होगा।
मुंबई शहर, मुंबई उपनगरों और ठाणे नगर निगम की सीमा में कम से कम 15,000 वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र वाली एक स्वतंत्र इमारत अनिवार्य होगी। यह इमारत स्वयं के स्वामित्व में हो सकती है या कम से कम 30 वर्षों के लिए पट्टे पर ली जा सकती है, लेकिन भूमि हस्तांतरण अधिकार निषिद्ध रहेंगे।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि नीट और अन्य परीक्षाओं में हुई लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। महाराष्ट्र सरकार के ये कदम राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन निर्देशों के क्रियान्वयन की निगरानी आने वाले महीनों में सरकार की प्राथमिकता रहेगी।