अमित शाह ने महाभारत से समझाई डेटा इंटेलिजेंस की शक्ति, 26वें फिंगरप्रिंट सम्मेलन में बोले
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 19 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 को संबोधित किया और देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में डेटा को इंटेलिजेंस में बदलने की अनिवार्यता पर ज़ोर दिया। उन्होंने महाभारत के उदाहरण से यह समझाया कि सूचना को सही समय पर इंटेलिजेंस में परिवर्तित करने की क्षमता ही वास्तविक शक्ति है। सम्मेलन में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के निदेशक आलोक रंजन, केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) के निदेशक एस.के. जैन और NCRB के संयुक्त निदेशक संजय माथुर उपस्थित रहे, जबकि कई राज्यों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
महाभारत से डेटा इंटेलिजेंस का सबक
शाह ने कहा, "महाभारत में कौरव पांडवों से कहीं अधिक शक्तिशाली थे, लेकिन पांडवों के साथ श्रीकृष्ण थे — जो सूचना को इंटेलिजेंस में परिवर्तित करते थे। इसीलिए पांडव युद्ध जीत सके।" उन्होंने इस उपमा के ज़रिये पुलिस बल को यह संदेश दिया कि कच्चे डेटा की बहुलता से अधिक महत्वपूर्ण है उसका विश्लेषण कर सटीक निष्कर्ष निकालना। उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से डेटा का आकलन कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अपराधियों को पकड़ने में इसका प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।
NAFIS के उपयोग पर चिंता
गृह मंत्री ने राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) की क्षमता और उसके वास्तविक उपयोग के बीच के अंतर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि NAFIS का उपयोग अभी केवल 10 फीसदी ही हो रहा है। यह एक टू-वे सिस्टम है — जब तक हर अपराध स्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट से NAFIS का डेटा समृद्ध नहीं किया जाएगा, तब तक यह प्रणाली अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर सकती।" उन्होंने स्पष्ट किया कि NAFIS का उद्देश्य केवल अपराधी की पहचान करना नहीं, बल्कि अपराध को न्यायालय में सिद्ध करने का एक वैज्ञानिक आधार तैयार करना है।
आपराधिक न्याय प्रणाली में बदलाव की ज़रूरत
शाह ने कहा कि देश की आपराधिक न्याय प्रणाली एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुज़र रही है। उन्होंने थाने की भूमिका के ऐतिहासिक विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले थाना केवल कानून-व्यवस्था का उपकरण था, फिर अपराध नियंत्रण का केंद्र बना, और अब इसे नागरिकों को संवैधानिक अधिकार दिलाने का माध्यम बनाना होगा। उन्होंने तीन नए कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें वैज्ञानिक साक्ष्य को न्यायालय में मान्यता दिलाने के लिए आवश्यक प्रावधान समाहित किए गए हैं।
डिजिटल अवसंरचना के आंकड़े
गृह मंत्री ने देश में विकसित हो रही डिजिटल अपराध-नियंत्रण अवसंरचना के प्रमुख आंकड़े साझा किए। उनके अनुसार, अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (CCTNS) अब देश के सभी 17,840 थानों तक पहुँच चुका है और लेगेसी डेटा सहित 37 करोड़ 86 लाख एफआईआर उपलब्ध हैं। ई-कोर्ट से 22,000 अदालतें जुड़ चुकी हैं; ई-प्रिजन में 2 करोड़ 70 लाख डेटा रिकॉर्ड हैं; ई-फॉरेंसिक में 34 लाख 48 हजार मामलों का फॉरेंसिक डेटा संग्रहीत है; और 43 लाख 16 हजार का क्राइम अलर्ट डेटा भी उपलब्ध है।
प्रशिक्षण और अभियोजन पर जोर
शाह ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण केवल ऐप के उपयोग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्य सृजन से लेकर चार्जशीट तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "फिंगरप्रिंट, टेलीफोन रिकॉर्ड, चेहरा, आँख और डीएनए का मिलान होने के बाद यदि 250 साक्ष्यों के साथ कोर्ट में जाना पड़े तो तकनीक का क्या लाभ?" उन्होंने अभियोजन और न्यायपालिका को भी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेने के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया। शाह ने यह भी कहा कि NCRB और पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के बिना देश में अपराध नियंत्रण असंभव है और आने वाले दिनों में NCRB की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।