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अमित शाह ने महाभारत से समझाई डेटा इंटेलिजेंस की शक्ति, 26वें फिंगरप्रिंट सम्मेलन में बोले

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अमित शाह ने महाभारत से समझाई डेटा इंटेलिजेंस की शक्ति, 26वें फिंगरप्रिंट सम्मेलन में बोले

सारांश

महाभारत में श्रीकृष्ण की भूमिका से डेटा इंटेलिजेंस का पाठ पढ़ाते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि NAFIS का केवल 10% उपयोग हो रहा है। 17,840 थानों में CCTNS, 37 करोड़ से अधिक FIR और 22,000 ई-कोर्ट — डेटा तैयार है, अब ज़रूरत है उसे इंटेलिजेंस में बदलने की।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 19 जून 2026 को नई दिल्ली में 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 को संबोधित किया।
शाह ने कहा कि NAFIS की क्षमता का अभी केवल 10 फीसदी उपयोग हो रहा है; हर अपराध स्थल के फिंगरप्रिंट से डेटा समृद्ध करना आवश्यक है।
CCTNS देश के सभी 17,840 थानों तक पहुँचा; 37 करोड़ 86 लाख FIR डेटाबेस में उपलब्ध।
ई-कोर्ट से 22,000 अदालतें जुड़ीं; ई-प्रिजन में 2 करोड़ 70 लाख और ई-फॉरेंसिक में 34 लाख 48 हजार मामलों का डेटा।
महाभारत में श्रीकृष्ण की भूमिका का उदाहरण देकर शाह ने AI के ज़रिये डेटा को इंटेलिजेंस में बदलने की अनिवार्यता समझाई।
तीन नए आपराधिक कानूनों में वैज्ञानिक साक्ष्य को न्यायालय में मान्यता दिलाने के प्रावधान शामिल किए गए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 19 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 को संबोधित किया और देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में डेटा को इंटेलिजेंस में बदलने की अनिवार्यता पर ज़ोर दिया। उन्होंने महाभारत के उदाहरण से यह समझाया कि सूचना को सही समय पर इंटेलिजेंस में परिवर्तित करने की क्षमता ही वास्तविक शक्ति है। सम्मेलन में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के निदेशक आलोक रंजन, केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) के निदेशक एस.के. जैन और NCRB के संयुक्त निदेशक संजय माथुर उपस्थित रहे, जबकि कई राज्यों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

महाभारत से डेटा इंटेलिजेंस का सबक

शाह ने कहा, "महाभारत में कौरव पांडवों से कहीं अधिक शक्तिशाली थे, लेकिन पांडवों के साथ श्रीकृष्ण थे — जो सूचना को इंटेलिजेंस में परिवर्तित करते थे। इसीलिए पांडव युद्ध जीत सके।" उन्होंने इस उपमा के ज़रिये पुलिस बल को यह संदेश दिया कि कच्चे डेटा की बहुलता से अधिक महत्वपूर्ण है उसका विश्लेषण कर सटीक निष्कर्ष निकालना। उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से डेटा का आकलन कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अपराधियों को पकड़ने में इसका प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।

NAFIS के उपयोग पर चिंता

गृह मंत्री ने राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) की क्षमता और उसके वास्तविक उपयोग के बीच के अंतर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि NAFIS का उपयोग अभी केवल 10 फीसदी ही हो रहा है। यह एक टू-वे सिस्टम है — जब तक हर अपराध स्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट से NAFIS का डेटा समृद्ध नहीं किया जाएगा, तब तक यह प्रणाली अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर सकती।" उन्होंने स्पष्ट किया कि NAFIS का उद्देश्य केवल अपराधी की पहचान करना नहीं, बल्कि अपराध को न्यायालय में सिद्ध करने का एक वैज्ञानिक आधार तैयार करना है।

आपराधिक न्याय प्रणाली में बदलाव की ज़रूरत

शाह ने कहा कि देश की आपराधिक न्याय प्रणाली एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुज़र रही है। उन्होंने थाने की भूमिका के ऐतिहासिक विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले थाना केवल कानून-व्यवस्था का उपकरण था, फिर अपराध नियंत्रण का केंद्र बना, और अब इसे नागरिकों को संवैधानिक अधिकार दिलाने का माध्यम बनाना होगा। उन्होंने तीन नए कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें वैज्ञानिक साक्ष्य को न्यायालय में मान्यता दिलाने के लिए आवश्यक प्रावधान समाहित किए गए हैं।

डिजिटल अवसंरचना के आंकड़े

गृह मंत्री ने देश में विकसित हो रही डिजिटल अपराध-नियंत्रण अवसंरचना के प्रमुख आंकड़े साझा किए। उनके अनुसार, अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (CCTNS) अब देश के सभी 17,840 थानों तक पहुँच चुका है और लेगेसी डेटा सहित 37 करोड़ 86 लाख एफआईआर उपलब्ध हैं। ई-कोर्ट से 22,000 अदालतें जुड़ चुकी हैं; ई-प्रिजन में 2 करोड़ 70 लाख डेटा रिकॉर्ड हैं; ई-फॉरेंसिक में 34 लाख 48 हजार मामलों का फॉरेंसिक डेटा संग्रहीत है; और 43 लाख 16 हजार का क्राइम अलर्ट डेटा भी उपलब्ध है।

प्रशिक्षण और अभियोजन पर जोर

शाह ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण केवल ऐप के उपयोग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्य सृजन से लेकर चार्जशीट तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "फिंगरप्रिंट, टेलीफोन रिकॉर्ड, चेहरा, आँख और डीएनए का मिलान होने के बाद यदि 250 साक्ष्यों के साथ कोर्ट में जाना पड़े तो तकनीक का क्या लाभ?" उन्होंने अभियोजन और न्यायपालिका को भी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेने के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया। शाह ने यह भी कहा कि NCRB और पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के बिना देश में अपराध नियंत्रण असंभव है और आने वाले दिनों में NCRB की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर क्षमता और उपयोग के बीच की यह खाई अब तक क्यों नहीं पाटी गई, इसका जवाब सम्मेलन में नहीं मिला। 37 करोड़ से अधिक FIR और 22,000 ई-कोर्ट के आंकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन डेटा की बहुलता और उसके प्रभावी उपयोग में फर्क होता है — जो कि सजा-दर के आंकड़ों में साफ दिखता है। महाभारत की उपमा प्रेरणादायक है, किंतु असली परीक्षा यह है कि जांच से लेकर दोषसिद्धि तक की पूरी श्रृंखला में तकनीक कब और कितनी गहराई से उतरती है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

26वाँ अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 क्या था?
यह 19 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन था, जिसमें फिंगरप्रिंट तकनीक, NAFIS और डेटा इंटेलिजेंस के ज़रिये अपराध नियंत्रण पर विमर्श हुआ। गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्य संबोधन दिया और NCRB, CFSL के वरिष्ठ अधिकारी तथा राज्यों के पुलिस अधिकारी इसमें शामिल हुए।
NAFIS क्या है और इसका उपयोग क्यों कम हो रहा है?
NAFIS यानी राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली एक केंद्रीय डेटाबेस है जो अपराध स्थलों से प्राप्त फिंगरप्रिंट को संग्रहीत अपराधी रिकॉर्ड से मिलाती है। अमित शाह के अनुसार इसकी क्षमता का केवल 10% उपयोग हो रहा है, क्योंकि हर अपराध स्थल से फिंगरप्रिंट डेटा नियमित रूप से NAFIS में दर्ज नहीं किया जाता।
अमित शाह ने महाभारत का उदाहरण किस संदर्भ में दिया?
शाह ने कहा कि महाभारत में कौरव बलशाली होने के बावजूद हारे क्योंकि पांडवों के पास श्रीकृष्ण थे जो सूचना को इंटेलिजेंस में बदलते थे। इसी उपमा से उन्होंने पुलिस को यह संदेश दिया कि कच्चे डेटा को AI के ज़रिये इंटेलिजेंस में परिवर्तित करना आधुनिक अपराध नियंत्रण की कुंजी है।
CCTNS और अन्य डिजिटल प्रणालियों की वर्तमान स्थिति क्या है?
CCTNS अब देश के सभी 17,840 थानों तक पहुँच चुका है और 37 करोड़ 86 लाख FIR उपलब्ध हैं। ई-कोर्ट से 22,000 अदालतें जुड़ी हैं, ई-प्रिजन में 2 करोड़ 70 लाख डेटा रिकॉर्ड हैं, और ई-फॉरेंसिक में 34 लाख 48 हजार मामलों का फॉरेंसिक डेटा संग्रहीत है।
तीन नए आपराधिक कानून फिंगरप्रिंट और फॉरेंसिक साक्ष्य को कैसे प्रभावित करते हैं?
शाह के अनुसार तीन नए कानूनों में वैज्ञानिक साक्ष्य — जैसे फिंगरप्रिंट, DNA, चेहरा पहचान — को न्यायालय में मान्यता दिलाने और अभियोजन प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रावधान शामिल किए गए हैं। इससे जांच से दोषसिद्धि तक की पूरी श्रृंखला में तकनीक की भूमिका बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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