3 अक्टूबर 2026
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महागठबंधन में दरार पर मंत्री अशोक चौधरी बोले: 'आपसी समझ की कमी से बिगड़ते हैं हालात'

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महागठबंधन में दरार पर मंत्री अशोक चौधरी बोले: 'आपसी समझ की कमी से बिगड़ते हैं हालात'

सारांश

बिहार मंत्री अशोक चौधरी ने महागठबंधन में कांग्रेस एमएलसी उम्मीदवार विवाद को 'नई बात नहीं' कहकर खारिज किया और नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति का केंद्र बिंदु बताया। 700 से 8,700 मेगावाट बिजली और सवा लाख किलोमीटर सड़क का हवाला देकर उन्होंने नीतीश राज के बदलाव का दावा किया।

मुख्य बातें

बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने 3 अक्टूबर 2026 को रोहतास में महागठबंधन के मतभेदों पर बयान दिया।
कांग्रेस के एमएलसी उम्मीदवार को लेकर उभरी खींचतान को उन्होंने 'आपसी समझ की कमी' का नतीजा बताया।
बिहार में बिजली खपत 700 मेगावाट से बढ़कर 8,700 मेगावाट हुई; सवा लाख किलोमीटर से अधिक सड़कें बनीं।
राज्य की नई उद्योग नीति में कैपिटल सब्सिडी, जीएसटी और बिजली में छूट शामिल।
14 करोड़ की आबादी को रोज़गार देने के लिए सात निश्चय-3 के तहत उद्योग आकर्षित करने पर ज़ोर।

बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने 3 अक्टूबर 2026 को रोहतास में कांग्रेस के एमएलसी उम्मीदवार को लेकर महागठबंधन में उभरे मतभेदों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन के भीतर असहमति कोई नई परिघटना नहीं है और इसकी जड़ आपसी समझ की कमी में है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार और देश की राजनीति की 'धुरी' बताया।

महागठबंधन में मतभेद: मंत्री का बयान

चौधरी ने कहा, 'यह कोई नई बात नहीं है; विधानसभा चुनाव के दौरान भी ऐसी स्थिति देखने को मिली थी। आपसी समझ की कमी के कारण ही इस तरह के हालात बनते हैं।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के एमएलसी उम्मीदवार को लेकर महागठबंधन के घटक दलों के बीच खींचतान सार्वजनिक हो चुकी है।

नीतीश कुमार की छवि: 'विश्वकर्मा से गांधी तक'

मंत्री अशोक चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास कार्यों की जमकर तारीफ की। उनके अनुसार, 'बिहार और देश की राजनीति में नीतीश कुमार एक धुरी हैं। अपने कार्यों के कारण ही आज प्रदेश की जनता उन्हें बिहार का विश्वकर्मा, विकास पुरुष, बिहार का गांधी और मानस पिता कहती है।' उन्होंने कहा कि नीतीश की दूरदर्शिता से किए गए कार्यों के परिणाम 10 से 15 वर्षों में दिखे हैं।

बिहार का पुराना दौर बनाम आज की तस्वीर

चौधरी ने उस दौर की याद दिलाई जब बिहार में 118 नरसंहार हुए थे और सांप्रदायिक व जातीय तनाव चरम पर था। उन्होंने कहा कि उस वक्त शाम 7 बजे के बाद गाँव और बाज़ार बंद हो जाते थे और बिजली का नामोनिशान नहीं था। उन्होंने आँकड़ा दिया कि तब बिहार में मात्र 700 मेगावाट बिजली की खपत होती थी, जो अब बढ़कर 8,700 मेगावाट तक पहुँच गई है।

बुनियादी ढाँचे में बदलाव

मंत्री ने बताया कि नीतीश सरकार ने सवा लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण कराया है। उन्होंने कहा, 'सवा लाख किलोमीटर सड़क बनाना कोई मामूली बात नहीं है।' पुलों के निर्माण और बेहतर कनेक्टिविटी से आवागमन की स्थिति में आमूलचूल बदलाव आया है।

उद्योग नीति और रोज़गार की राह

चौधरी ने बताया कि बिहार सरकार की नई उद्योग नीति देश में सबसे बेहतर है, जिसमें कैपिटल सब्सिडी, जीएसटी और बिजली — तीनों में छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि बिहार दुनिया में प्रति वर्ग किलोमीटर सबसे घनी आबादी वाला प्रदेश है और 14 करोड़ की इस बड़ी आबादी को रोज़गार देने के लिए उद्योगों को आकर्षित करना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि सरकार इस दिशा में नीतीश कुमार द्वारा तैयार सात निश्चय-3 पर लगातार काम कर रही है। समृद्ध बिहार के लिए यह नीतिगत यात्रा जारी रहने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह उस गहरी असुविधा को छुपाने की कोशिश है जो महागठबंधन के भीतर सीट-बँटवारे को लेकर बनी हुई है। 'नई बात नहीं' कहकर मतभेद को सामान्य करने की यह राजनीतिक चाल इस सवाल को अनुत्तरित छोड़ती है कि अगर यह पुरानी समस्या है, तो अब तक हल क्यों नहीं हुई। नीतीश कुमार की तारीफ में जो शब्द चुने गए — 'विश्वकर्मा', 'गांधी', 'मानस पिता' — वे चुनावी मौसम में एनडीए की आंतरिक ब्रांडिंग की झलक देते हैं, विकास के तटस्थ आकलन की नहीं। बिजली और सड़क के आँकड़े प्रभावशाली हैं, पर बेरोज़गारी और पलायन जैसी चुनौतियाँ उतनी ही बड़ी हैं — जिन पर मंत्री ने केवल 'उद्योग लाने' की सामान्य बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महागठबंधन में कांग्रेस एमएलसी उम्मीदवार को लेकर विवाद क्या है?
महागठबंधन के घटक दलों के बीच कांग्रेस के एमएलसी उम्मीदवार को लेकर सीट-बँटवारे पर खींचतान सामने आई है। मंत्री अशोक चौधरी के अनुसार, यह आपसी समझ की कमी से उपजी स्थिति है, जो पहले विधानसभा चुनाव के दौरान भी देखने को मिली थी।
अशोक चौधरी ने नीतीश कुमार को 'बिहार का गांधी' क्यों कहा?
चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार की दूरदर्शिता और विकास कार्यों के चलते जनता स्वयं उन्हें विश्वकर्मा, विकास पुरुष, बिहार का गांधी और मानस पिता कहती है। उनके अनुसार इन कार्यों के परिणाम 10 से 15 वर्षों में दिखे हैं।
बिहार में बिजली खपत में कितना बदलाव आया है?
मंत्री अशोक चौधरी के अनुसार, पहले बिहार में मात्र 700 मेगावाट बिजली की खपत होती थी, जो अब बढ़कर 8,700 मेगावाट हो गई है। यह आँकड़ा नीतीश सरकार के कार्यकाल में ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलाव को दर्शाता है।
बिहार की नई उद्योग नीति में क्या खास है?
चौधरी ने बताया कि बिहार सरकार की नई उद्योग नीति में कैपिटल सब्सिडी, जीएसटी और बिजली — तीनों क्षेत्रों में छूट दी गई है। सरकार का दावा है कि यह देश की सबसे बेहतर उद्योग नीतियों में से एक है।
सात निश्चय-3 क्या है और इसका बिहार के रोज़गार से क्या संबंध है?
सात निश्चय-3 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा तैयार की गई नीतिगत रूपरेखा है, जिसके तहत राज्य सरकार उद्योगों को आकर्षित कर बिहार की 14 करोड़ की आबादी को रोज़गार देने पर काम कर रही है। मंत्री चौधरी के अनुसार बिहार दुनिया में प्रति वर्ग किलोमीटर सबसे घनी आबादी वाला प्रदेश है, इसलिए रोज़गार सृजन सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राष्ट्र प्रेस
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