महाराष्ट्र लोकायुक्त में चार नए सदस्यों की नियुक्ति, राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने दिलाई शपथ
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र लोकायुक्त संस्था को 14 अगस्त 2026 को चार नए सदस्य मिले, जब राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई के लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में इन्हें पद की शपथ दिलाई। यह नियुक्तियाँ महाराष्ट्र लोकायुक्त अधिनियम 2023 के प्रावधानों के तहत की गई हैं और सभी सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक — जो भी पहले हो — निर्धारित किया गया है।
किन्हें मिली नियुक्ति
बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुरेंद्र पंढरीनाथ तवाडे और सेवानिवृत्त मुख्य जिला न्यायाधीश सुवर्णा किशोर केओले ने संस्था के न्यायिक सदस्य के रूप में शपथ ली। वहीं सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य सचिव ओम प्रकाश गुप्ता और महाराष्ट्र की सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला ने गैर-न्यायिक सदस्य के रूप में पद की शपथ ग्रहण की।
राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे ने समारोह में चारों सदस्यों की नियुक्ति के वारंट पढ़कर सुनाए। शपथ समारोह की शुरुआत और समापन राष्ट्र गीत तथा राष्ट्रगान के गायन के साथ हुई।
समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र लोकायुक्त जस्टिस विद्यासागर कनाडे (सेवानिवृत्त), मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह समारोह लोकायुक्त संस्था की संरचनात्मक मज़बूती की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वार्षिक रिपोर्ट और शिकायतों का ब्यौरा
इससे पहले 14 जुलाई को लोकायुक्त जस्टिस वी.एम. कनाडे (सेवानिवृत्त) ने राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से भेंट कर वर्ष 2025 के लिए लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त के कामकाज की 53वीं संयुक्त वार्षिक रिपोर्ट सौंपी थी।
लोकायुक्त कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 8,547 नई शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 3,869 शिकायतें — जो अन्य अधिकारियों को भेजे गए आवेदनों की प्रतियाँ थीं या जिन पर शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर नहीं थे — पंजीकृत नहीं की गईं। शेष 4,678 शिकायतें विधिवत दर्ज की गईं।
लंबित और निपटाए गए मामले
वर्ष 2025 की शुरुआत में पिछले वर्षों के 4,287 मामले पहले से लंबित थे, जिससे पूरे वर्ष निपटारे के लिए कुल 8,965 मामले कार्यालय के समक्ष थे। इनमें से 4,885 मामलों का निपटारा किया गया, जबकि वर्ष के अंत तक 4,080 मामले अभी भी लंबित रहे।
नए सदस्यों की नियुक्ति के बाद संस्था की क्षमता में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे लंबित मामलों के त्वरित निपटारे का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।