गांधी जयंती पर मोहन यादव: मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया से साकार हो रहा स्वदेशी का सपना
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर कहा कि महात्मा गांधी के स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के विचार आज मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया अभियानों के रूप में मूर्त रूप ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को इन्हीं पहलों के माध्यम से साकार कर रहा है।
पुष्पांजलि और श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री यादव ने भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने ओल्ड विधानसभा चौराहे पर जाकर पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न से सम्मानित स्व. लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।
दो महान नायकों की विरासत
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि यह सौभाग्य और गर्व का विषय है कि देश एक साथ दो महान स्वतंत्रता सेनानियों की जयंती मना रहा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया, वहीं स्व. लाल बहादुर शास्त्री ने सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा के आदर्श स्थापित किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन महापुरुषों के विचार आज भी देश को प्रेरणा देते हैं।
स्वदेशी को प्रोत्साहन और नई संसद
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि लंबे समय तक एक दल विशेष के शासन में औपनिवेशिक सोच और व्यवस्थाओं को बनाए रखा गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी को प्रोत्साहन देकर देश को आत्मनिर्भर बनाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने नई संसद के निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भी स्वदेशी भावना का प्रतीक है।
कैप्टन स्मित मच्छार की वीरता की सराहना
मुख्यमंत्री यादव ने भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छार की साहसिक भूमिका की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि यात्री विमान में इजरायली यात्रियों की जान बचाने और आतंकवादियों के मंसूबों को विफल करने में कैप्टन स्मित ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि यह कार्य मानवता, कर्तव्यनिष्ठा और साहस का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है और इससे समस्त भारतीयों का सिर गर्व से ऊँचा हुआ है। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी देशवासियों की ओर से कैप्टन स्मित को बधाई दी है।
गांधी जयंती और शास्त्री जयंती का यह अवसर एक बार फिर स्मरण कराता है कि स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के मूल्य आज की नीतियों में किस रूप में प्रतिबिंबित हो रहे हैं — और आने वाले दिनों में इन अभियानों की सफलता ही इन महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।