महिलाएं अब चुनावों में निर्णायक शक्ति, भविष्य को संवारने में सक्रिय भूमिका चाहती हैं: किरण बेदी
सारांश
Key Takeaways
- महिलाएं अब चुनावी राजनीति में निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं।
- महिला आरक्षण बिल का पारित होना आवश्यक है।
- महिलाओं की भागीदारी से सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
- ठोस बदलाव की आवश्यकता है, केवल प्रतीकात्मकता नहीं।
- महिलाओं की संख्या बढ़ने से नीतियों में संतुलन आएगा।
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण संशोधन बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर देशभर में बहस तेज हो गई है। इसी संदर्भ में पूर्व आईपीएस अधिकारी और दिल्ली की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने अपनी राय व्यक्त की है। उनका मानना है कि महिलाएं अब चुनावी प्रक्रिया में एक निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं। सिर्फ दिखावे के लिए उन्हें खुश करना अब पर्याप्त नहीं है; वे भारत के भविष्य के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका चाहती हैं।
किरण बेदी ने इस विषय पर अपनी बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उनका कहना है कि यदि संसद इस महिला आरक्षण बिल को पारित करने में चूक जाती है, तो महिला मतदाता उन राजनीतिक दलों का समर्थन कर सकती हैं जो 2029 के आम चुनावों और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई महिला प्रतिनिधित्व का आश्वासन देंगे। उनके अनुसार, आज की महिला मतदाता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं होती, बल्कि ठोस परिणाम चाहती हैं।
किरण बेदी ने कहा कि महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक रूप से संतुष्ट करना पर्याप्त नहीं, उन्हें असली निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना बेहद आवश्यक है। उनके अनुसार, देश के भविष्य को सुधारने के लिए महिलाओं की प्रत्यक्ष और सक्रिय भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
पिछले दिनों राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ने से समाज की आवश्यकताओं को देखने का दृष्टिकोण और अधिक व्यापक हो जाएगा। जब निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाएं अधिक होंगी, तो नीतियों में भी संतुलन और व्यावहारिकता आएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से केवल राजनीतिक संतुलन ही नहीं बनेगा, बल्कि समाज में सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी। इससे विकास की प्रक्रिया भी अधिक समावेशी बन सकेगी, जिसमें सभी वर्गों की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाएगा।