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माजिद मेमन का नितेश राणे पर हमला: 'बयान गैर-जिम्मेदाराना', GDP दावों और वोटर लिस्ट पर भी उठाए सवाल

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माजिद मेमन का नितेश राणे पर हमला: 'बयान गैर-जिम्मेदाराना', GDP दावों और वोटर लिस्ट पर भी उठाए सवाल

सारांश

पूर्व राज्यसभा सांसद माजिद मेमन ने एक साथ कई मोर्चे खोले — नितेश राणे के बयानों को 'भड़काऊ' बताया, 7.8% GDP वृद्धि के दावों को महंगाई-बेरोज़गारी के बीच खोखला कहा, और महाराष्ट्र में 2 करोड़ मतदाता नाम हटाने को संविधान का उल्लंघन करार देते हुए सेवानिवृत्त जजों से जांच की माँग की।

मुख्य बातें

पूर्व राज्यसभा सांसद माजिद मेमन ने 2 सितंबर 2026 को मंत्री नितेश राणे के बयानों को 'गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ' करार दिया।
मेमन ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के सरकारी दावों को ज़मीनी हकीकत से परे बताया।
महाराष्ट्र में 2 करोड़ और बंगाल में BJP-विरोधी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का आरोप लगाया।
विपक्ष की माँग — सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में मतदाता सूची पुनरीक्षण की स्वतंत्र जाँच।
नीट पेपर लीक मामले में निष्पक्ष जाँच और सभी दोषियों की पहचान की माँग भी दोहराई।

पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता माजिद मेमन ने 2 सितंबर 2026 को मुंबई में मंत्री नितेश राणे के बयानों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें 'गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ' करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के सरकारी दावों को ज़मीनी हकीकत से परे बताया और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग उठाई।

नितेश राणे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

मेमन ने मंत्री राणे को लेकर कहा, 'हमें नितेश राणे के बयानों को बहुत ज़्यादा महत्व नहीं देना चाहिए। उनके बयान हमेशा बहुत गैर-जिम्मेदाराना, भड़काऊ और अक्सर स्वीकार्य स्तर से नीचे होते हैं। वे हमेशा मुसलमानों के खिलाफ टिप्पणी करने में सबसे आगे रहते हैं। वे जो कहते हैं वह उनकी अपनी राय है, लेकिन हमारी नज़र में उनकी राय का कोई महत्व नहीं है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र की राजनीति में सांप्रदायिक बयानबाज़ी को लेकर विपक्ष पहले से आक्रामक है।

जीडीपी के सरकारी दावों पर सवाल

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के सरकारी आँकड़ों को मेमन ने अपर्याप्त बताया। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री भले ही अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन सिर्फ जीडीपी के आँकड़ों से यह दावा नहीं कर सकते कि देश की हालत सुधर गई है। जमीनी सच्चाई कुछ और है। महंगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार काफी बढ़ गया है। ऐसे में सरकार का दावा सिर्फ कागज़ी आँकड़ों तक ही सीमित है।' आलोचकों का कहना है कि जीडीपी वृद्धि और आम नागरिक की क्रय-शक्ति के बीच की खाई लगातार गहरी होती जा रही है।

वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर संवैधानिक चिंता

मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने के मसले पर मेमन ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया, 'बंगाल में वे तमाम नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) को समर्थन नहीं देते। महाराष्ट्र में दो करोड़ नाम निकाल दिए गए — सबसे बड़े मताधिकार को छीन लिया गया। यह संविधान का उल्लंघन है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों की माँग है कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति कर पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच कराई जाए।

अन्य मुद्दों पर मेमन का रुख

अभिनेत्री स्वरा भास्कर पर हो रही टिप्पणियों के बारे में मेमन ने कहा कि वे एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं और किसी ऐतिहासिक फिल्म में त्रुटियाँ होने पर आलोचना स्वाभाविक है। नीट पेपर लीक मामले पर उन्होंने निष्पक्ष जाँच और सभी दोषियों की पहचान की माँग दोहराई। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के धार्मिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

आगे क्या

मेमन के इन बयानों से महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा होने की संभावना है। वोटर लिस्ट विवाद और जीडीपी बनाम ज़मीनी हकीकत का मुद्दा आने वाले विधानसभा सत्र में भी गूंजने की उम्मीद है। विपक्ष की माँग है कि सरकार मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर श्वेत-पत्र जारी करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों की विश्वसनीयता को एक साथ चुनौती दे रही है। महाराष्ट्र में 2 करोड़ नाम हटाने का आरोप गंभीर है, लेकिन इसे सत्यापित करने के लिए स्वतंत्र डेटा अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ — विपक्ष की माँग जायज़ है, पर दावे अभी कथित ही हैं। GDP वृद्धि और आम नागरिक की क्रय-शक्ति के बीच की खाई एक वास्तविक नीतिगत बहस है, जिसे केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखना इसकी गंभीरता को कम करता है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माजिद मेमन ने नितेश राणे के बारे में क्या कहा?
माजिद मेमन ने नितेश राणे के बयानों को 'गैर-जिम्मेदाराना, भड़काऊ और स्वीकार्य स्तर से नीचे' बताया। उनके अनुसार राणे के बयानों का उनकी नज़र में कोई महत्व नहीं है।
मेमन ने 7.8% GDP वृद्धि के दावे पर क्या आपत्ति जताई?
मेमन का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के आँकड़े ज़मीनी सच्चाई को नहीं दर्शाते, क्योंकि महंगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार बढ़ा है। उनके अनुसार ये दावे केवल कागज़ी आँकड़ों तक सीमित हैं।
वोटर लिस्ट विवाद में विपक्ष की क्या माँग है?
विपक्षी दलों — जिनमें कांग्रेस प्रमुख है — की माँग है कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति कर मतदाता सूची से नाम हटाने के पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच कराई जाए। मेमन के अनुसार महाराष्ट्र में 2 करोड़ और बंगाल में BJP-विरोधी मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
स्वरा भास्कर विवाद पर मेमन का क्या रुख है?
मेमन ने स्वरा भास्कर को एक सक्रिय अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता बताया। उनका कहना है कि किसी ऐतिहासिक फिल्म में गलतियाँ होने पर आलोचना स्वाभाविक है, और स्वरा के मामले में भी यही हो रहा है।
नीट पेपर लीक पर मेमन ने क्या कहा?
माजिद मेमन ने नीट पेपर लीक मामले में पूरी तरह निष्पक्ष जाँच और इससे जुड़े सभी लोगों की पहचान की माँग की। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मसला बताया।
राष्ट्र प्रेस
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