मनन मिश्रा का राहुल गांधी पर बयान: कांशीराम मुद्दे पर कोई महत्व नहीं
सारांश
Key Takeaways
- मनन मिश्रा ने राहुल गांधी के बयानों को महत्वहीन बताया।
- कांशीराम के संदर्भ में राहुल का बयान चर्चा का विषय बना।
- नेहरू और अंबेडकर के संबंधों की ओर इशारा किया गया।
- केरल में चुनावी स्थिति पर टिप्पणी की गई।
- भारत की विदेश नीति की सराहना की गई।
नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के राज्यसभा सदस्य मनन कुमार मिश्रा ने विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान को लेकर तीखी टिप्पणी की और कहा कि राहुल गांधी अक्सर बिना सोचे-समझे बयान देते रहते हैं।
कांशीराम के संबंध में राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि अब राहुल गांधी की बातों का कोई खास महत्व नहीं रह गया है।
उन्होंने कहा, "राहुल गांधी जो भी बिना सोचे-समझे कहते हैं, उसका अब कोई खास मतलब नहीं रह गया है।"
मिश्रा ने इस दौरान देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया था।
उन्होंने कहा, "नेहरू के जमाने में अंबेडकर की जो स्थिति हुई, वह सब जानते हैं। नेहरू जी ने उन्हें दो-दो बार चुनाव हरवाया और बाद में उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा। राहुल गांधी इसी तरह की अनर्गल बातें करते रहते हैं।" ध्यान दें कि राहुल गांधी ने कहा था कि यदि नेहरूजी जीवित होते, तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते।
वहीं, मनन कुमार मिश्रा ने केरल की वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव का समय नजदीक है, इसलिए केरल सरकार जो भी बयान दे या हाईकोर्ट में कोई हलफनामा दाखिल करे, उसका अब कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सबरीमाला मंदिर का मुद्दा वहां की जनता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और लोग इस पर अपने विचार बना चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि सबरीमाला मंदिर के मुद्दे पर जनता ने अपना निर्णय ले लिया है। इस बार वहां सरकार बदलने वाली है और केरल में भाजपा-एनडीए समर्थित सरकार बनने की संभावना है।
मनन कुमार मिश्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दुनिया युद्ध और तेल संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन ऐसे समय में भारत की विदेश नीति अत्यधिक प्रभावी साबित हुई है।
उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बाधित होने के बावजूद भारत ने अपने जहाजों को सुरक्षित वापस लाने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा, "आज दुनिया युद्ध और तेल संकट से जूझ रही है। ऐसे मुश्किल समय में हमारी विदेश नीति बहुत प्रभावी रही है। उदाहरण के लिए होर्मुज में जहां अंतरराष्ट्रीय जहाजों का रास्ता बंद हो गया था, वहां से हमारे दो जहाज ईरान से भारत पहुंच चुके हैं और एलपीजी लेकर आने वाले कई और जहाज रास्ते में हैं।"