मणिपुर सीएम काफिले पर हमला: NIA ने जंगमिनलुन सिंगसन और थांगजोएल हाओकिप को गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मणिपुर के मुख्यमंत्री के काफिले पर 10 जून 2024 को हुए सशस्त्र हमले की जांच में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान जंगमिनलुन सिंगसन उर्फ फ्रेंकी (44) और थांगजोएल हाओकिप उर्फ थांगबोई (21) के रूप में हुई है। इन दोनों को थोउबल स्थित मणिपुर की स्पेशल कोर्ट (NIA मामलों के लिए) में पेश किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
जंगमिनलुन सिंगसन बेथेल का निवासी है, जबकि थांगजोएल हाओकिप चुराचांदपुर के गम्फाजांग तुइबोंग क्षेत्र का रहने वाला है। दोनों को स्पेशल कोर्ट ने 8 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। जांच में सामने आया है कि ये दोनों अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हमले की साजिश बनाने और उसे अंजाम देने में शामिल थे।
गौरतलब है कि इन दोनों को इससे पहले NIA ने एक अन्य मामले में पहले ही गिरफ्तार किया था। इस बार हमले के पीछे की बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने के उद्देश्य से इन्हें काफिले पर हमले के मामले में भी गिरफ्तार किया गया है।
हमले की पृष्ठभूमि
10 जून 2024 को अज्ञात हथियारबंद बदमाशों ने मणिपुर के कांगपोकपी जिले में के. सिनाम गांव के समीप एनएच-37 पर मुख्यमंत्री के काफिले को निशाना बनाया था। इस हमले में दो सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा था। यह मामला शुरू में न्यू केइथेलमानबी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।
यह ऐसे समय में हुआ था जब मणिपुर में जातीय संघर्ष और हिंसा पहले से तनावपूर्ण माहौल बना चुकी थी। मुख्यमंत्री के काफिले पर सीधे हमला राज्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देखा गया था।
NIA की जांच प्रक्रिया
एजेंसी ने इस मामले को 11 जुलाई 2024 को फिर से दर्ज किया था और तब से जांच जारी है। NIA के अनुसार, जांच में दोनों आरोपियों के साजिश में शामिल अन्य सदस्यों के साथ संबंध भी स्थापित हुए हैं। आगे की जांच में उनकी विशिष्ट भूमिकाओं का पता लगाने और अन्य संदिग्धों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
आगे क्या होगा
NIA के अधिकारियों के अनुसार, 8 दिन की पुलिस कस्टडी के दौरान दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जाएगी, ताकि हमले के पीछे के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। एजेंसी अब तक इस मामले में कई गिरफ्तारियां कर चुकी है और साजिश में शामिल बाकी लोगों की पहचान एवं गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है। यह मामला मणिपुर में कानून-व्यवस्था और आतंकवाद-विरोधी एजेंसियों की कार्यक्षमता की कसौटी बना हुआ है।