मणिपुर CM खेमचंद सिंह का ऐलान: पहाड़ी इलाकों में अभी भी अशांति, सभी समुदायों से शांति की अपील
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 18 अक्टूबर 2026 को स्वीकार किया कि पहाड़ी जिलों के कुछ इलाकों में अभी भी अशांति बनी हुई है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों — विशेष रूप से कैथोलिक चर्च के नेताओं, शिक्षकों और छात्रों — से अपील की कि वे हिंसा से प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों में शांति और सद्भाव का संदेश फैलाने में आगे आएं।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री ने इंफाल के कांचीपुर स्थित कैथोलिक स्कूल में आयोजित कैथोलिक वैली स्कूल्स की खेल और साहित्यिक प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का विषय 'टुगेदर फॉर ए पीसफुल मणिपुर' (एक शांत मणिपुर के लिए एकजुट) था, जिसमें 13 कैथोलिक वैली स्कूलों ने भाग लिया। खेमचंद सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का विषय मणिपुर की मौजूदा स्थिति में बेहद सार्थक और प्रासंगिक है।
जातीय संघर्ष का असर: छात्र और मजदूर सबसे अधिक प्रभावित
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जातीय संघर्ष के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होने वालों में छात्र शामिल हैं, क्योंकि उनकी शिक्षा बुरी तरह बाधित हुई है। उन्होंने कहा कि बंद और नाकेबंदी ने न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि दिहाड़ी मजदूरों और समाज के उन वर्गों पर भी भारी आर्थिक बोझ डाला है जो रोज की कमाई पर निर्भर हैं।
गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा जारी है, जिसमें मेइती और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच टकराव ने राज्य के सामाजिक ताने-बाने को गहरा नुकसान पहुंचाया है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के बीच की खाई और गहरी होती दिखती है।
सामूहिक प्रयास और सुलह की पुकार
खेमचंद सिंह ने लोगों से अतीत की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को पीछे छोड़ने और क्षमा, सुलह और आपसी समझ की भावना अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शांति बहाल करने और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयासों की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मणिपुर को देश के बाकी हिस्सों के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए, और लगातार हो रही बाधाएं युवा पीढ़ी के भविष्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती हैं।
विकसित भारत 2047 का संदर्भ
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित 'विकसित भारत 2047' के विजन का उल्लेख करते हुए मणिपुर के नागरिकों से अपील की कि वे एक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मणिपुर को भी देश की प्रगति में योगदान देना होगा।
आगे की राह
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के इस सार्वजनिक संबोधन को राज्य सरकार की ओर से संवाद बहाल करने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। शांति प्रक्रिया में धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं को शामिल करने की यह पहल संकेत देती है कि सरकार नागरिक समाज के माध्यम से सुलह की दिशा में प्रयास तेज कर रही है।