19 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मणिपुर CM खेमचंद सिंह का ऐलान: पहाड़ी इलाकों में अभी भी अशांति, सभी समुदायों से शांति की अपील

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मणिपुर CM खेमचंद सिंह का ऐलान: पहाड़ी इलाकों में अभी भी अशांति, सभी समुदायों से शांति की अपील

सारांश

मणिपुर के मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने खुलकर माना — पहाड़ी जिलों में अशांति अभी खत्म नहीं हुई। कैथोलिक स्कूलों के मंच से उन्होंने क्षमा और सुलह की पुकार लगाई, छात्रों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहे असर को रेखांकित किया — और 'विकसित भारत 2047' के विजन से मणिपुर को जोड़ा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 18 अक्टूबर 2026 को स्वीकार किया कि मणिपुर के पहाड़ी जिलों में अभी भी अशांति बनी हुई है।
उन्होंने इंफाल के कांचीपुर स्थित कैथोलिक स्कूल में 'टुगेदर फॉर ए पीसफुल मणिपुर' थीम पर आयोजित 13 कैथोलिक वैली स्कूलों की प्रतियोगिता का उद्घाटन किया।
बंद और नाकेबंदी से छात्रों की शिक्षा और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है।
सीएम ने सभी समुदायों से क्षमा, सुलह और आपसी समझ की भावना अपनाने की अपील की।
उन्होंने PM मोदी के 'विकसित भारत 2047' विजन का हवाला देते हुए मणिपुर के नागरिकों को राष्ट्र की प्रगति में भागीदार बनने का आह्वान किया।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 18 अक्टूबर 2026 को स्वीकार किया कि पहाड़ी जिलों के कुछ इलाकों में अभी भी अशांति बनी हुई है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों — विशेष रूप से कैथोलिक चर्च के नेताओं, शिक्षकों और छात्रों — से अपील की कि वे हिंसा से प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों में शांति और सद्भाव का संदेश फैलाने में आगे आएं।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री ने इंफाल के कांचीपुर स्थित कैथोलिक स्कूल में आयोजित कैथोलिक वैली स्कूल्स की खेल और साहित्यिक प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का विषय 'टुगेदर फॉर ए पीसफुल मणिपुर' (एक शांत मणिपुर के लिए एकजुट) था, जिसमें 13 कैथोलिक वैली स्कूलों ने भाग लिया। खेमचंद सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का विषय मणिपुर की मौजूदा स्थिति में बेहद सार्थक और प्रासंगिक है।

जातीय संघर्ष का असर: छात्र और मजदूर सबसे अधिक प्रभावित

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जातीय संघर्ष के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होने वालों में छात्र शामिल हैं, क्योंकि उनकी शिक्षा बुरी तरह बाधित हुई है। उन्होंने कहा कि बंद और नाकेबंदी ने न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि दिहाड़ी मजदूरों और समाज के उन वर्गों पर भी भारी आर्थिक बोझ डाला है जो रोज की कमाई पर निर्भर हैं।

गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा जारी है, जिसमें मेइती और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच टकराव ने राज्य के सामाजिक ताने-बाने को गहरा नुकसान पहुंचाया है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के बीच की खाई और गहरी होती दिखती है।

सामूहिक प्रयास और सुलह की पुकार

खेमचंद सिंह ने लोगों से अतीत की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को पीछे छोड़ने और क्षमा, सुलह और आपसी समझ की भावना अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शांति बहाल करने और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयासों की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मणिपुर को देश के बाकी हिस्सों के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए, और लगातार हो रही बाधाएं युवा पीढ़ी के भविष्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती हैं।

विकसित भारत 2047 का संदर्भ

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित 'विकसित भारत 2047' के विजन का उल्लेख करते हुए मणिपुर के नागरिकों से अपील की कि वे एक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मणिपुर को भी देश की प्रगति में योगदान देना होगा।

आगे की राह

मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के इस सार्वजनिक संबोधन को राज्य सरकार की ओर से संवाद बहाल करने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। शांति प्रक्रिया में धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं को शामिल करने की यह पहल संकेत देती है कि सरकार नागरिक समाज के माध्यम से सुलह की दिशा में प्रयास तेज कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि सरकारें अक्सर संघर्ष की गंभीरता को सार्वजनिक मंचों पर कम करके आंकती हैं। हालांकि, कैथोलिक स्कूल के एक आयोजन में शांति की अपील और 'विकसित भारत 2047' के विजन को जोड़ना प्रतीकात्मक तो है, पर असली सवाल यह है कि क्या सरकार के पास पहाड़ी और घाटी समुदायों के बीच विश्वास बहाल करने की कोई ठोस और समयबद्ध कार्य योजना है। मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं और हजारों विस्थापित हुए हैं — ऐसे में केवल संवाद की अपील पर्याप्त नहीं, जवाबदेही और पुनर्वास के ठोस कदमों की दरकार है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में अभी क्या स्थिति है?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 18 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक रूप से माना कि पहाड़ी जिलों के कुछ इलाकों में अभी भी अशांति बनी हुई है। मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष के कारण राज्य में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
सीएम खेमचंद सिंह ने शांति के लिए किससे अपील की?
उन्होंने कैथोलिक चर्च के नेताओं, शिक्षकों और छात्रों से विशेष रूप से अशांति से प्रभावित पहाड़ी इलाकों में शांति और सद्भाव का संदेश फैलाने की अपील की। उन्होंने सभी समुदायों से क्षमा, सुलह और आपसी समझ की भावना अपनाने का आग्रह किया।
मणिपुर में जातीय संघर्ष से सबसे ज्यादा कौन प्रभावित हुए हैं?
सीएम के अनुसार, छात्र और दिहाड़ी मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। बंद और नाकेबंदी से छात्रों की शिक्षा बाधित हुई है, जबकि रोज की कमाई पर निर्भर मजदूरों को भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
'टुगेदर फॉर ए पीसफुल मणिपुर' कार्यक्रम क्या है?
यह इंफाल के कांचीपुर स्थित कैथोलिक स्कूल में आयोजित कैथोलिक वैली स्कूल्स की खेल और साहित्यिक प्रतियोगिता है, जिसका उद्घाटन 18 अक्टूबर को मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने किया। इसमें 13 कैथोलिक वैली स्कूलों ने भाग लिया।
मणिपुर को 'विकसित भारत 2047' से कैसे जोड़ा गया?
मुख्यमंत्री ने PM नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन का उल्लेख करते हुए मणिपुर के नागरिकों से अपील की कि वे देश की प्रगति में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि लगातार बाधाएं युवा पीढ़ी और राज्य के विकास दोनों को नुकसान पहुंचाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले