मणिपुर सीएम खेमचंद सिंह: विकास से पहले शांति, ह्मार प्रतिनिधिमंडल को दिया आश्वासन
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 30 सितंबर 2026 को इंफाल स्थित मुख्यमंत्री आवास पर ह्मार जनजातीय समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और स्पष्ट किया कि राज्य में विकास एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को गति देने के लिए सर्वप्रथम शांति और स्थिरता की बहाली अनिवार्य है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल की संरचना और मुलाकात का संदर्भ
तिपाइमुख विधानसभा क्षेत्र के विधायक नगुरसंगलुर सानाते के नेतृत्व में फेर्जावल जिले के जनजातीय बहुल क्षेत्रों के विभिन्न नागरिक संगठनों (सीएसओ) के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री से मिले। प्रतिनिधिमंडल में फेर्जावल और जिरीबाम की इंडिजिनस ट्राइब्स एडवोकेसी कमेटी (ITSAC), ह्मार इनपुई हमर्राम क्षेत्र और ह्मार इनपुई वेंगई क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल थे। ह्मार इनपुई वेंगई क्षेत्र के अध्यक्ष रोथांगखुम भी इस बैठक में उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि फेर्जावल जिला असम और मिजोरम के साथ अंतरराज्यीय सीमाएँ साझा करता है और यहाँ मुख्य रूप से ह्मार जनजातीय समुदाय निवास करता है। यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील होने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं की कमी से भी जूझ रहा है।
शांति पहल की पृष्ठभूमि
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब मणिपुर में जातीय तनाव की पृष्ठभूमि लंबे समय से राज्य के विकास को प्रभावित करती रही है। अप्रैल 2026 में जिरीबाम जिले में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मैतेई और ह्मार समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच एक शांति पहल संपन्न हुई थी। कथित तौर पर इस पहल ने दोनों समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखने में सकारात्मक योगदान दिया है और तब से दोनों समुदाय अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण ढंग से साथ रह रहे हैं।
मुख्यमंत्री का यह वक्तव्य कि 'शांति पहले, विकास बाद में' — राज्य सरकार की उस नीतिगत प्राथमिकता को दर्शाता है जिसमें स्थिरता को निवेश और बुनियादी ढाँचे की पूर्वशर्त माना जाता है।
मुख्य माँगें: सड़क, बिजली और बैंकिंग
प्रतिनिधिमंडल ने विधायक सानाते के माध्यम से तीन प्रमुख बुनियादी ढाँचागत माँगें रखीं। सड़क संपर्क के संदर्भ में जिरीबाम-तिपाइमुख मार्ग — जो वर्तमान में एक जिला सड़क है — को अपग्रेड कर राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देने की माँग की गई। प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग-37 और राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क कड़ी बन सकती है, जिससे जिरीबाम, तिपाइमुख और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा।
बिजली आपूर्ति के मामले में सिपुइकाउन पावर स्टेशन से परबुंग तक प्रस्तावित बिजली लाइन के कनेक्शन और अन्य क्षेत्रों तक आपूर्ति विस्तार की माँग प्रमुख रही। बैंकिंग सुविधाओं के अभाव को लेकर भी प्रतिनिधिमंडल ने चिंता जताई और क्षेत्र में बैंक शाखा स्थापित करने का अनुरोध किया, यह कहते हुए कि इसकी अनुपस्थिति में स्थानीय निवासियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
फेर्जावल एडीसी पर उठे सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने फेर्जावल स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) की स्थापना से जुड़े मुद्दे भी मुख्यमंत्री के सामने रखे। सदस्यों ने एडीसी को लेकर अपनी अपेक्षाएँ और चिंताएँ साझा कीं, जो जनजातीय क्षेत्रों में स्वशासन एवं प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत माँग है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि उनकी माँगों पर विचार किया जाएगा, हालाँकि किसी ठोस समयसीमा या तत्काल घोषणा का उल्लेख नहीं किया गया। यह बैठक राज्य सरकार के उन प्रयासों की कड़ी में है जिनके तहत जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा की शासन-प्रक्रिया से जोड़ने और उनकी शिकायतों के निवारण का प्रयास किया जा रहा है। मणिपुर में स्थायी शांति की दिशा में यह संवाद एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।