मन की बात के 137वें एपिसोड में PM मोदी ने की मुंबई के कृष्णा शेषाद्री की तारीफ, इतिहास वेबसाइट को बताया 'दिलचस्प'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में मुंबई निवासी कृष्णा शेषाद्री की विशेष सराहना की। शेषाद्री ने एक ऐसी वेबसाइट बनाई है जो भारत के इतिहास को सरल और रोचक तरीके से प्रस्तुत करती है — जिसमें कोई भी वर्ष चुनकर यह जान सकता है कि उस दौर में देश के किस हिस्से पर किसका शासन था।
मन की बात में क्या बोले PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में कहा, 'मन की बात' एक ऐसा मंच है जहाँ नए प्रयासों और नवोन्मेषी विचारों को सामने लाया जाता है। उन्होंने कहा, 'इनमें से कितने ही आइडियाज ऐसे होते हैं जिनके पीछे लोगों ने जीवन की अथक ऊर्जा लगाई होती है।' इसी संदर्भ में उन्होंने कृष्णा शेषाद्री के प्रयास का उल्लेख किया।
कैसे सामने आया यह प्रयास
पीएम मोदी ने बताया कि कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा गया था — 'आषाढी एकादशी के पावन अवसर पर मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि इतिहास को रोचक बनाने के अपने प्रयास का शुभारंभ कर रहा हूँ।' इस पोस्ट ने प्रधानमंत्री का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा, 'मुझे भी यह काफी दिलचस्प लगा।'
जाँच करने पर पता चला कि यह वेबसाइट मुंबई के कृष्णा शेषाद्री ने बनाई है। मोदी ने कहा, 'कृष्णा ने वेबसाइट का नाम भी बहुत सरल रखा है।' उन्होंने इस जानकारी को देशवासियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से सीधे कृष्णा से बात करने का निर्णय लिया।
कृष्णा शेषाद्री ने क्या बताया
प्रधानमंत्री ने कृष्णा से पूछा कि तकनीक क्षेत्र से होने के बावजूद उन्होंने इतिहास की वेबसाइट बनाने की प्रेरणा कैसे पाई। इस पर कृष्णा शेषाद्री ने बताया, 'मैं एक इंजीनियर था। मैंने एमबीए किया और मार्केट सेक्टर में नौकरी की। मुझे बचपन से इतिहास में रुचि थी। मुझे लगता था कि हम जैसे इतिहास सिखाते हैं, उसमें हम बहुत सुधार कर सकते हैं, बदलाव ला सकते हैं और इतिहास को कहानी के रूप में लोगों तक पहुँचा सकते हैं।'
वेबसाइट की विशेषता
वेबसाइट की संकल्पना अत्यंत सरल है — उपयोगकर्ता कोई भी एक वर्ष चुनें और तुरंत जान सकते हैं कि उस समय भारत के किस भू-भाग पर किस शासक या राजवंश का नियंत्रण था। यह इंटरेक्टिव प्रारूप इतिहास को पाठ्यपुस्तकों की सीमाओं से बाहर निकालकर आम नागरिकों तक सुलभ बनाता है। गौरतलब है कि तकनीक और इतिहास के इस संगम को 'मन की बात' जैसे राष्ट्रीय मंच से मान्यता मिलना इस पहल को व्यापक पहचान दिलाएगा।
आगे की संभावनाएँ
प्रधानमंत्री की सराहना के बाद इस वेबसाइट पर देशभर से ध्यान केंद्रित होने की संभावना है। यह प्रयास दर्शाता है कि कैसे व्यक्तिगत नवोन्मेष, बिना किसी सरकारी संसाधन के, शिक्षा और इतिहास-बोध को नई दिशा दे सकता है। आने वाले समय में इस तरह की तकनीक-आधारित इतिहास-शिक्षा पहलों को और प्रोत्साहन मिल सकता है।