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मनोज बाजपेयी का समय रैना विवाद पर बयान: 'मजाक में हो तो दिक्कत नहीं, सम्मान भी जरूरी'

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मनोज बाजपेयी का समय रैना विवाद पर बयान: 'मजाक में हो तो दिक्कत नहीं, सम्मान भी जरूरी'

सारांश

समय रैना के शो में प्रवासियों पर जोक से उठे विवाद पर मनोज बाजपेयी ने कहा — हास्य और सम्मान साथ चलें तो कोई दिक्कत नहीं। उन्होंने दिल्ली में 18 साल की उम्र में बस ड्राइवर के 'ए बिहारी' कहने का निजी किस्सा सुनाकर बताया कि स्वस्थ समाज में खुद पर हंसना जरूरी है।

मुख्य बातें

मनोज बाजपेयी ने समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में प्रवासियों पर जोक विवाद पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि मजाक में हो और सम्मान बना रहे, तो एक-दूसरे पर हंसने में कोई बुराई नहीं।
शो में शेरोन वर्मा और समय रैना ने एक-दूसरे की क्षेत्रीय पृष्ठभूमि पर हास्य टिप्पणियाँ की थीं।
बाजपेयी ने दिल्ली में 18 साल की उम्र में बस ड्राइवर द्वारा 'ए बिहारी' कहे जाने का निजी किस्सा साझा किया।
उन्होंने कहा कि समस्या तब होती है जब हास्य किसी समुदाय के लिए परेशानी का कारण बने — उससे पहले खुद पर हंसना स्वस्थ समाज की निशानी है।

अभिनेता मनोज बाजपेयी ने कॉमेडियन समय रैना के चर्चित शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में प्रवासियों पर किए गए मजाक से उपजे विवाद पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि यदि हास्य की भावना से किया जाए और सम्मान बना रहे, तो एक-दूसरे पर हंसने में कोई बुराई नहीं। यह बयान उन्होंने अपनी आगामी फिल्म 'लास्ट मैन इन टॉवर' के प्रमोशन के दौरान दिया।

विवाद की पृष्ठभूमि

दरअसल, 'इंडियाज गॉट लेटेंट' शो में शेरोन वर्मा और समय रैना ने हास्य के अंदाज में एक-दूसरे की क्षेत्रीय पृष्ठभूमि पर टिप्पणियाँ की थीं, जिसमें प्रवासियों को लेकर किए गए जोक्स ने विवाद को जन्म दिया। इस घटना ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी कि हास्य की आड़ में क्षेत्रीय या सामुदायिक पहचान पर की गई टिप्पणियाँ कहाँ तक उचित हैं।

मनोज बाजपेयी का पक्ष

बाजपेयी ने स्पष्ट किया, 'हमें खुद पर और साथ में भी हंसना सीखना चाहिए। किसी को भावनाओं को आहत किए बिना एक-दूसरे पर हंसना चाहिए और फिर बुरा नहीं मानना चाहिए। हमारे अंदर खुद को लेकर ह्यूमर होना चाहिए, लेकिन साथ ही सम्मान भी होना चाहिए — न सिर्फ अपने लिए, बल्कि उस व्यक्ति के लिए भी जिसके साथ आप बैठे हैं और वह व्यक्ति कहाँ से आया है, इसके लिए भी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब दो लोग एक-दूसरे के साथ सहज होते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे पर हंसते हैं।

दिल्ली वाला किस्सा

अपनी बात को और स्पष्ट करने के लिए बाजपेयी ने दिल्ली में अपने शुरुआती दिनों का एक निजी अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया, 'जब मैं दिल्ली में था, तब मैं 18 साल का था और बस में सामने वाले दरवाजे से चढ़ने की कोशिश कर रहा था क्योंकि यह मेरा पहला अनुभव था। ड्राइवर ने मेरी तरफ देखा और चिल्लाया, 'ए बिहारी, पिछले गेट से चढ़ो'।' उन्होंने बताया कि उन्हें बुरा इसलिए नहीं लगा क्योंकि वे वाकई बिहार से थे और शहर में नए होने के कारण नियम नहीं जानते थे।

हास्य और सम्मान की सीमा

बाजपेयी ने यह भी स्वीकार किया कि हास्य की एक सीमा होती है। उनके अनुसार, 'समस्या तब होती है जब कोई बाहर से आकर आपके लिए या समुदाय के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। उससे पहले तो हमें एक-दूसरे पर और खुद पर भी हंसने में सक्षम होना चाहिए — यह एक बहुत ही स्वस्थ समाज की निशानी है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत में क्षेत्रीय पहचान और हास्य की सीमाओं को लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो रही है।

आगे क्या

मनोज बाजपेयी की फिल्म 'लास्ट मैन इन टॉवर' जल्द रिलीज होने वाली है। इस विवाद पर उनकी संतुलित प्रतिक्रिया ने उन्हें एक परिपक्व सार्वजनिक आवाज के रूप में स्थापित किया है, जो हास्य और जिम्मेदारी दोनों को साथ लेकर चलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल को अनुत्तरित छोड़ती है — क्या मंच पर 'मजाक' और दर्शकों तक पहुँचने वाला संदेश हमेशा एक ही होता है? 'इंडियाज गॉट लेटेंट' जैसे शो लाखों दर्शकों तक पहुँचते हैं, जहाँ क्षेत्रीय पहचान पर हास्य आसानी से रूढ़िवादिता को सामान्य बना सकता है। बाजपेयी का 'सम्मान के साथ हंसो' का सूत्र सैद्धांतिक रूप से सही है, पर व्यवहार में इसकी कसौटी कौन तय करे — यह सवाल बना रहता है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में क्या विवाद हुआ था?
शो में कॉमेडियन समय रैना और शेरोन वर्मा ने हास्य के अंदाज में एक-दूसरे की क्षेत्रीय पृष्ठभूमि और प्रवासियों पर टिप्पणियाँ कीं, जिससे सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के जोक क्षेत्रीय भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं।
मनोज बाजपेयी ने इस विवाद पर क्या कहा?
मनोज बाजपेयी ने कहा कि यदि मजाक की भावना से और सम्मान के साथ हो, तो एक-दूसरे पर हंसने में कोई दिक्कत नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि समस्या तब होती है जब हास्य किसी समुदाय के लिए वास्तविक परेशानी का कारण बने।
मनोज बाजपेयी ने दिल्ली बस वाला किस्सा क्यों सुनाया?
उन्होंने यह किस्सा यह समझाने के लिए सुनाया कि क्षेत्रीय पहचान पर की गई टिप्पणी हमेशा आहत करने वाली नहीं होती। 18 साल की उम्र में दिल्ली आने पर एक बस ड्राइवर ने उन्हें 'ए बिहारी' कहा था, जिसे उन्होंने बुरा नहीं माना क्योंकि वे वाकई बिहार से थे और शहर में नए थे।
मनोज बाजपेयी के अनुसार हास्य और सम्मान में क्या संतुलन होना चाहिए?
बाजपेयी के अनुसार, हास्य में खुद पर और एक-दूसरे पर हंसने की क्षमता होनी चाहिए, लेकिन साथ ही उस व्यक्ति की पृष्ठभूमि और भावनाओं का सम्मान भी जरूरी है। यह संतुलन तभी संभव है जब दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ सहज हों।
मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म कौन सी है?
मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म 'लास्ट मैन इन टॉवर' है, जिसके प्रमोशन के दौरान उन्होंने यह बयान दिया। फिल्म की रिलीज डेट की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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