एनएचआरसी का पंजाब सरकार और डीजीपी को नोटिस, मानसा में दलजीत सिंह की संदिग्ध मौत पर दो सप्ताह में माँगी रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पंजाब के मानसा जिले के भम्मे कलां गाँव निवासी दलजीत सिंह की संदिग्ध मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत इस मामले का संज्ञान लिया है।
शिकायत में लगाए गए आरोप
शिकायतकर्ता हरमनदीप सिंह मेहता ने आयोग को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि दलजीत सिंह की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई और उनके परिवार ने मृत्यु के कारणों को लेकर गंभीर चिंता जताई है, जिसमें ड्रग्स से संभावित संबंध का उल्लेख भी किया गया है। परिवार के सदस्यों और समर्थकों ने जवाबदेही की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था।
शिकायत के अनुसार, जब यह जुलूस रामदित्तेवाला चौक के निकट पहुँचा, तो पुलिस ने उसे रोक दिया और कथित तौर पर मृतक का शव जबरन अपने कब्ज़े में ले लिया। इस घटना के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
पुलिस बल प्रयोग के आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया और कई लोगों को हिरासत में भी लिया। हालाँकि, पुलिस ने अपनी कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा कि उसने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पुलिसकर्मियों पर कथित हमले की प्रतिक्रिया में कदम उठाए। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में ड्रग्स से जुड़ी मौतों और पुलिस कार्रवाई पर पहले से ही व्यापक बहस जारी है।
एनएचआरसी की कार्रवाई
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पीड़ित के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत करते हैं। आयोग की विधि प्रभाग द्वारा जारी आदेश केस नंबर 1596/19/11/2026 पर आधारित है। यह आदेश सहायक रजिस्ट्रार (विधि) बृजिंदर सिंह द्वारा जारी किया गया है।
आयोग ने इस मामले की जानकारी गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (आईएस-II और आईसी डिवीजन) को भी प्रेषित की है, जो इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करती है। गौरतलब है कि एनएचआरसी का स्वतः संज्ञान तब लिया जाता है जब मानवाधिकार उल्लंघन की आशंका प्रथम दृष्टया स्पष्ट हो।
आगे क्या होगा
पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस मिलने के बाद अब सरकार की ओर से दो सप्ताह के भीतर एटीआर प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित समय-सीमा में रिपोर्ट नहीं मिली, तो आयोग अगला कदम उठा सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों का स्पष्टीकरण अहम भूमिका निभाएगा।