मसूरी-देहरादून मार्ग पर ट्रक 100 मीटर खाई में गिरा, चालक मुबारिक की मौत, हेल्पर साजिद घायल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मसूरी-देहरादून मार्ग पर बुधवार, 6 मई की तड़के एक भीषण सड़क हादसे में राशन और कोल्ड ड्रिंक से लदा एक ट्रक मसूरी झील से लगभग 200 मीटर आगे करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में ट्रक चालक मुबारिक, निवासी टिमली, थाना सहसपुर, देहरादून, की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि हेल्पर साजिद गंभीर रूप से घायल हो गया।
हादसे का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, सुबह करीब 5:30 बजे ट्रक देहरादून रेलवे स्टेशन से कोल्ड ड्रिंक, तेल और अन्य राशन सामग्री लेकर उत्तरकाशी की ओर जा रहा था। इसी दौरान वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया और सड़क किनारे गहरी खाई में जा गिरा। मसूरी कोतवाल देवेन्द्र चौहान ने बताया कि प्रारंभिक जाँच में चालक को नींद का झोंका आने की आशंका जताई जा रही है, जिससे ट्रक का नियंत्रण बिगड़ा।
राहत एवं बचाव अभियान
घटना की सूचना मिलते ही मसूरी पुलिस, फायर सर्विस, 108 एंबुलेंस और उप जिला चिकित्सालय की टीम तत्काल मौके पर पहुँची। खाई की गहराई और दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में कठिनाई आई, जिसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम को भी बुलाया गया। सभी एजेंसियों ने मिलकर कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को खाई से बाहर निकाला।
मृतक और घायल की स्थिति
रेस्क्यू के बाद घायल हेल्पर साजिद को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। मृतक चालक मुबारिक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। कोतवाल चौहान ने बताया कि मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है और हादसे की जाँच के लिए एक टीम का गठन किया गया है।
यातायात और स्थानीय प्रतिक्रिया
हादसे के बाद कुछ समय के लिए मसूरी-देहरादून मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल देखा गया। यह ऐसे समय में आया है जब पहाड़ी सड़कों पर दुर्घटनाओं की संख्या को लेकर पहले से ही चिंता व्यक्त की जाती रही है। क्षेत्रीय निवासियों ने प्रशासन से पहाड़ी मार्गों पर सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की माँग की है।
आगे क्या होगा
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए उचित प्रबंध किए जा रहे हैं। जाँच टीम हादसे के सटीक कारणों की पड़ताल करेगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड के पहाड़ी मार्गों पर थके हुए या नींद में वाहन चलाने से होने वाले हादसे एक बार-बार सामने आने वाली समस्या बन चुके हैं, जिस पर ठोस नीतिगत कदम की प्रतीक्षा है।