महिला आरक्षण बिल पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की राय: इस्लाम और राजनीति
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया गया है।
- इस्लाम महिलाओं को राजनीति में आने से रोकता है।
- राजनीति में इज्जत और सुरक्षा की चिंता।
- प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन।
- भारत और ईरान के रिश्ते मजबूत।
बरेली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने महिला आरक्षण बिल पर अपनी अलग राय व्यक्त की है। उन्होंने इस बिल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि इस्लाम मुस्लिम महिलाओं को राजनीति के क्षेत्र में आने से रोकता है, क्योंकि इसमें उनकी इज्जत, सम्मान और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
मौलाना रजवी ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं और 33 प्रतिशत आरक्षण के जरिए लोकसभा और विधानसभाओं में नेतृत्व का अवसर प्रदान करना चाहते हैं। मैं इस पहल का समर्थन करता हूं।
उन्होंने कहा कि इस्लाम मुस्लिम महिलाओं को राजनीति के दलदल में नहीं उतरने की सलाह देता है, क्योंकि इसमें उनकी इज्जत, सम्मान और सुरक्षा को खतरा हो सकता है। आज की राजनीति एक दलदल की तरह है, जिसमें फंसने का जोखिम बना रहता है। इस्लाम ने महिलाओं को घर की शान बताया है, इसलिए मैं मुस्लिम महिलाओं को सलाह दूंगा कि वे राजनीति से दूर रहें।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई बातचीत पर भी कहा कि ईरान-अमेरिका के बीच चल रही तनावपूर्ण स्थिति के चलते मुख्य चर्चा इसी विषय पर रही होगी। जंग से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता। समस्या का समाधान बातचीत और आमने-सामने बैठकर ही किया जा सकता है। जहां अमन और शांति होती है, वहां व्यापार अच्छे से चलता है, लोगों का जीवन सुचारू रूप से चलता है और देश तरक्की करता है। भारत ने हमेशा संतुलित कदम उठाए हैं, जिससे भारत और ईरान के रिश्ते मजबूती के साथ जुड़े हैं और भविष्य में और भी मजबूत होंगे।
ट्रंप पर व्यंग्य करते हुए मौलाना बरेलवी ने कहा कि उनकी बातों पर कोई भरोसा नहीं कर सकता। उनका रंग गिरगिट की तरह बदलता रहता है। वे किसी भी समय अपनी नीति बदल सकते हैं। भारत पर टैरिफ लगाकर उन्होंने हमारे निर्यात-आयात को प्रभावित किया है। भारत ने ईरान के साथ संबंध मजबूत किए, लेकिन अमेरिका ने उस पर भी ब्रेक लगा दिया। अमेरिका भारत के हितों को ध्यान में नहीं रखता, जबकि ईरान ऐसा करता है।