4 नवंबर 2026
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दिल्ली-नोएडा-गाजियाबाद में AQI 450 पार, 'गंभीर' श्रेणी में हवा; सड़क निर्माण की धूल ने बढ़ाई मुसीबत

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दिल्ली-नोएडा-गाजियाबाद में AQI 450 पार, 'गंभीर' श्रेणी में हवा; सड़क निर्माण की धूल ने बढ़ाई मुसीबत

सारांश

दिल्ली-NCR में इस नवंबर की शुरुआत जहरीली हवा के साथ हुई — IIT दिल्ली में AQI 453 तक पहुँचा। नोएडा में सड़क निर्माण की उड़ती धूल ने संकट और गहरा किया, जबकि प्राधिकरण निष्क्रिय दिखे। 9 नवंबर तक ठंड बढ़ेगी, लेकिन साफ आसमान प्रदूषण को दूर नहीं करेगा।

मुख्य बातें

CPCB के आँकड़ों के अनुसार 4 नवंबर 2026 को IIT दिल्ली में AQI 453 और जहाँगीरपुरी में 450 दर्ज — 'गंभीर' श्रेणी।
नोएडा सेक्टर-62 में AQI 426 ; गाजियाबाद के लोनी, संजय नगर और वेव सिटी में 300–312 के बीच।
नोएडा में जारी सड़क निर्माण कार्य से उड़ती धूल AQI को और अधिक खराब कर रही है।
नोएडा प्राधिकरण और नोएडा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।
IMD के अनुसार 9 नवंबर तक न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है; आसमान साफ रहेगा।
डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और श्वास रोगियों को बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी।

नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की हवा बुधवार को 'गंभीर' श्रेणी में पहुँच गई, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में 450 के पार दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आँकड़ों के अनुसार, IIT दिल्ली में AQI 453 रहा — जो NCR में दर्ज सर्वाधिक स्तरों में से एक है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस स्तर का प्रदूषण बुजुर्गों, बच्चों और श्वास व हृदय रोगियों के लिए अत्यंत खतरनाक है।

प्रमुख इलाकों में AQI के आँकड़े

CPCB के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली के जहाँगीरपुरी में AQI 450, IIT दिल्ली में 453, अलीपुर में 422, ITO में 421 और बवाना में 411 रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम परिसर में AQI 411, बुराड़ी क्रॉसिंग में 393, आया नगर में 382 और अशोक विहार में 348 दर्ज हुआ।

आनंद विहार (302) समेत राजधानी के किसी भी प्रमुख क्षेत्र में AQI 'संतोषजनक' या 'मध्यम' श्रेणी में नहीं रहा। 400 से ऊपर के AQI को CPCB 'गंभीर' श्रेणी में वर्गीकृत करता है, जिसमें स्वस्थ व्यक्तियों को भी बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है।

नोएडा और गाजियाबाद की स्थिति

दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर-62 में AQI 426 तक पहुँचा, जबकि सेक्टर-150 में 351, सेक्टर-110 में 349 और सेक्टर-39 में 321 रहा। तुलनात्मक रूप से बेहतर सेक्टर-125 (243) और सेक्टर-116 (261) में भी हवा 'खराब' श्रेणी में ही बनी रही।

गाजियाबाद में लोनी का AQI 304, संजय नगर का 308 और वेव सिटी का 312 रिकॉर्ड किया गया — ये सभी 'बहुत खराब' श्रेणी में हैं।

सड़क निर्माण की धूल — एक बड़ा कारण

नोएडा में प्रदूषण की एक प्रमुख वजह शहर के अनेक हिस्सों में जारी सड़क निर्माण कार्य है। खुदाई और निर्माण सामग्री से उड़ने वाली धूल हवा में घुलकर PM2.5 और PM10 की मात्रा को और अधिक बढ़ा रही है। गौरतलब है कि इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नोएडा प्राधिकरण और नोएडा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कोई ठोस कदम उठाया जाता नहीं दिख रहा — जो आलोचकों के अनुसार प्रशासनिक उदासीनता का प्रमाण है।

यह ऐसे समय में आया है जब सर्दियों की शुरुआत के साथ हवा की गति मंद पड़ने लगती है और पराली दहन का मौसम भी चरम पर होता है, जिससे NCR में प्रदूषण का संकट हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर में तीव्र हो जाता है।

मौसम पूर्वानुमान: तापमान में धीरे-धीरे गिरावट

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार, 4 नवंबर को दिल्ली का अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस रहेगा। 5 और 6 नवंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। 7 नवंबर से तापमान में फिर गिरावट शुरू होगी और 9 नवंबर तक न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की संभावना है। IMD के अनुसार 4 से 9 नवंबर के बीच आसमान मुख्यतः साफ रहेगा, लेकिन हवा की रफ्तार धीमी रहने से प्रदूषण फैलने की जगह नहीं मिलेगी।

स्वास्थ्य पर असर और विशेषज्ञों की चेतावनी

डॉक्टरों के अनुसार, 400 से ऊपर का AQI बुजुर्गों, छोटे बच्चों तथा अस्थमा और हृदय रोगियों के लिए अत्यंत घातक है। इस स्तर पर थोड़े समय की बाहरी गतिविधि भी फेफड़ों और हृदय पर गंभीर दबाव डाल सकती है। विशेषज्ञों ने NCR निवासियों को बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनने और घरों के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने की सलाह दी है।

प्रदूषण के इस स्तर पर यदि प्रशासनिक हस्तक्षेप तत्काल नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में NCR की हवा और अधिक दमघोंटू हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी ज़मीनी तैयारी उतनी ही अपर्याप्त रहती है। नोएडा में सड़क निर्माण की धूल और प्राधिकरण की निष्क्रियता यह साबित करती है कि GRAP जैसे नियामक ढाँचे कागज पर मज़बूत हैं, लागू करने में कमज़ोर। जब तक निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण को वास्तविक दंड से नहीं जोड़ा जाता और स्थानीय बोर्डों की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक AQI के आँकड़े चेतावनी नहीं, वार्षिक रिवाज बन जाते हैं।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली-NCR में AQI 'गंभीर' श्रेणी का क्या मतलब है?
CPCB के वर्गीकरण के अनुसार, 400 से ऊपर का AQI 'गंभीर' श्रेणी में आता है, जिसमें स्वस्थ व्यक्तियों को भी बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है। 4 नवंबर को दिल्ली के IIT दिल्ली में AQI 453 और जहाँगीरपुरी में 450 तक पहुँच गया।
नोएडा में प्रदूषण इतना अधिक क्यों है?
नोएडा में सड़क निर्माण कार्य से उड़ती धूल वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण बनी हुई है। सेक्टर-62 में AQI 426 तक पहुँच गया है और नोएडा प्राधिकरण व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
दिल्ली-NCR में अगले कुछ दिनों का मौसम कैसा रहेगा?
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार 4 से 9 नवंबर तक आसमान मुख्यतः साफ रहेगा। 4 नवंबर को अधिकतम तापमान 28°C और न्यूनतम 15°C रहेगा, जबकि 9 नवंबर तक न्यूनतम तापमान 14°C तक पहुँचने की संभावना है।
इस प्रदूषण का स्वास्थ्य पर क्या असर होता है?
डॉक्टरों के अनुसार 400 से ऊपर का AQI बुजुर्गों, छोटे बच्चों और अस्थमा व हृदय रोगियों के लिए अत्यंत घातक है। इस स्तर पर थोड़े समय की बाहरी गतिविधि भी फेफड़ों और हृदय पर गंभीर दबाव डाल सकती है।
गाजियाबाद में AQI किस स्तर पर है?
CPCB के आँकड़ों के अनुसार गाजियाबाद के लोनी में AQI 304, संजय नगर में 308 और वेव सिटी में 312 दर्ज किया गया, जो सभी 'बहुत खराब' श्रेणी में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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