मीरा-भायंदर सोसाइटी विवाद: मुस्लिम निवासियों ने कहा — बकरीद पर बकरे लाना दस साल पुरानी परंपरा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर की 'पूनम क्लस्टर-1' सोसाइटी में बकरीद के अवसर पर बकरे लाने को लेकर उठे विवाद पर मुस्लिम निवासियों ने स्पष्ट पक्ष रखा है। उनका कहना है कि यह परंपरा नई नहीं, बल्कि कई वर्षों से निर्बाध रूप से चली आ रही है और पहले कभी इस पर किसी ने आपत्ति नहीं जताई थी। निवासियों के अनुसार इस मुद्दे को बेवजह सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है।
निवासियों का पक्ष
सोसाइटी में सात वर्षों से रह रहे एक मुस्लिम निवासी ने बताया कि उनके भाई लगभग दस वर्षों से इसी सोसाइटी में रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान हिंदू, मुस्लिम और ईसाई — तीनों समुदायों के त्योहार आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाए जाते रहे हैं। बकरीद के दौरान भी वर्षों से सोसाइटी परिसर में बकरे लाए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार पहली बार इस पर विवाद खड़ा हुआ है।
निवासी के शब्दों में, 'अब तक कभी ऐसा माहौल नहीं बना। हर त्योहार को शांति और एकता के साथ मनाया गया है। बकरीद के दौरान भी कई वर्षों से सोसाइटी में बकरे लाए जाते रहे हैं, लेकिन पहले किसी ने इस पर आपत्ति नहीं जताई थी।'
एजीएम में मिली थी मंजूरी
एक अन्य मुस्लिम निवासी ने बताया कि सोसाइटी की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में बकरों के लिए अस्थायी शेड बनाने की अनुमति पहले ही दी जा चुकी थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए सोसाइटी परिसर का उपयोग होता है, उसी प्रक्रिया के तहत बकरीद के लिए भी शेड की अनुमति ली गई थी।
उन्होंने स्पष्ट किया, 'सोसाइटी के नियमों के तहत यह निर्णय एजीएम में लिया गया था। इसमें किसी प्रकार की गोपनीयता नहीं थी। बकरों की संख्या को लेकर भी कोई विशेष प्रतिबंध तय नहीं किया गया था। हम सभी लोग नियमों का पालन करते हुए त्योहार मनाना चाहते हैं।'
सामाजिक सौहार्द की अपील
मुस्लिम समुदाय के निवासियों ने इस मामले को धार्मिक विवाद की बजाय आपसी समझदारी और संवाद से सुलझाने की अपील की है। उनका मानना है कि सोसाइटी में वर्षों से कायम सौहार्द को बनाए रखना सभी समुदायों के हित में है।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि मीरा-भायंदर महाराष्ट्र का एक मिश्रित आबादी वाला शहरी क्षेत्र है जहाँ विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ रहते हैं। आवासीय सोसाइटियों में त्योहारों के दौरान जगह और अनुमति को लेकर विवाद नए नहीं हैं, लेकिन मुस्लिम निवासियों का कहना है कि इस सोसाइटी में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी थी। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में आवासीय परिसरों में धार्मिक आयोजनों को लेकर कभी-कभी तनाव की खबरें आती रहती हैं।
आगे की राह
निवासियों ने उम्मीद जताई है कि सोसाइटी प्रबंधन और सभी समुदायों के प्रतिनिधि मिलकर इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालेंगे, ताकि आने वाले त्योहारों पर भी पुराना भाईचारा बना रहे।