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बकरीद पर मलाड की नूरानी मस्जिद में नमाज: नमाजियों ने कहा — भाईचारा टूटना हिंदुस्तान के लिए ठीक नहीं

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बकरीद पर मलाड की नूरानी मस्जिद में नमाज: नमाजियों ने कहा — भाईचारा टूटना हिंदुस्तान के लिए ठीक नहीं

सारांश

मलाड की नूरानी मस्जिद में बकरीद की नमाज के बाद नमाजियों ने एक सुर में कहा — भाईचारा तोड़ना हिंदुस्तान के हित में नहीं। AIMIM नेता वारिस पठान ने महाराष्ट्र में मुसलमानों के साथ कथित भेदभाव पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

मलाड की पठानवाड़ी नूरानी मस्जिद में 28 मई को बकरीद की नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हुई।
नमाजियों ने सभी धर्मों के आपसी सम्मान और गंगा-जमुनी तहज़ीब को बनाए रखने की अपील की।
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में मुसलमानों के सार्वजनिक नमाज पढ़ने पर कार्रवाई की जाती है।
नमाज के दौरान मलाड पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे; कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
नमाजियों ने भारत के लिए विशेष दुआएँ माँगीं और देशवासियों से प्यार व मोहब्बत से रहने का आग्रह किया।

महाराष्ट्र के मलाड स्थित पठानवाड़ी की नूरानी मस्जिद में 28 मई को बकरीद की नमाज अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में नमाजी शामिल हुए और शांति व सांप्रदायिक सद्भाव के लिए दुआएँ माँगी गईं। नमाज के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

नमाजियों का संदेश

नमाज के बाद नमाजियों ने एकता और आपसी सम्मान का आह्वान किया। एक नमाजी ने कहा, 'लोगों को आपस में मिलकर रहना चाहिए।' एक अन्य नमाजी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'किसी धर्म को तोड़ने का काम नहीं करना है, बल्कि जोड़ने का काम करना है। हिंदुस्तान में सबको मिलजुल कर रहना चाहिए। एक-दूसरे के धर्म का हम लोगों को सम्मान करना चाहिए। भाईचारा खत्म होना हिंदुस्तान के लिए अच्छी बात नहीं है।'

एक तीसरे नमाजी ने कुर्बानी की भावना को विस्तार से समझाते हुए कहा, 'कुर्बानी की असल मकसद है कि हमारे दिलों से गैरों का खौफ निकलकर सिर्फ एक अल्लाह का खौफ आ जाए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि नमाज में भारत के लिए विशेष दुआएँ की गईं और देश के सभी धर्मों के लोगों से प्यार और मोहब्बत के साथ रहने की अपील की।

गंगा-जमुनी तहज़ीब की पुकार

नमाजियों ने इस अवसर को भारत की बहु-धार्मिक संस्कृति की याद दिलाने के रूप में देखा। एक नमाजी ने कहा, 'इस देश में कई धर्म के लोग रहते हैं — देश के मुसलमान और बाकी धर्म के लोग भी इसमें शामिल हों। यही गंगा-जमुनी तहज़ीब है।' यह भावना ऐसे समय में और भी प्रासंगिक मानी जा रही है जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर सार्वजनिक विमर्श तेज़ हुआ है।

AIMIM नेता वारिस पठान का बयान

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने इस मौके पर कहा कि यदि किसी मुसलमान ने सोसायटी या सड़क के बाहर पाँच मिनट की नमाज पढ़ी होती, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी होती और उसे जेल भेज दिया गया होता। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी चीजें खासतौर पर महाराष्ट्र में की जा रही हैं, जबकि पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है।

सुरक्षा व्यवस्था

नमाज के दौरान मलाड पुलिस ने नूरानी मस्जिद और आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षाबल तैनात किया था। अधिकारियों के अनुसार, त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। गौरतलब है कि बकरीद के अवसर पर देशभर में इसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। आने वाले दिनों में सांप्रदायिक सद्भाव की यह भावना नीतिगत और सामाजिक विमर्श को दिशा देती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वारिस पठान का बयान एक गहरे तनाव की ओर इशारा करता है — जहाँ त्योहारी सद्भावना और ज़मीनी अनुभव के बीच की खाई को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है। महाराष्ट्र में सार्वजनिक धार्मिक आचरण को लेकर कथित दोहरे मानदंडों के सवाल केवल एक समुदाय की चिंता नहीं, बल्कि संवैधानिक समानता की कसौटी हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर उत्सव के दृश्य तक सीमित रह जाती है — जो असहज सवाल उठाए गए, उन पर विमर्श ज़रूरी है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मलाड की नूरानी मस्जिद में बकरीद की नमाज कब और कैसे हुई?
28 मई को महाराष्ट्र के मलाड स्थित पठानवाड़ी की नूरानी मस्जिद में बकरीद की नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हुई। बड़ी संख्या में नमाजी शामिल हुए और पुलिस ने पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए थे।
नमाजियों ने बकरीद पर क्या संदेश दिया?
नमाजियों ने सभी धर्मों के आपसी सम्मान और भाईचारे की अपील की। उन्होंने कहा कि भाईचारा टूटना हिंदुस्तान के लिए अच्छी बात नहीं और गंगा-जमुनी तहज़ीब को बनाए रखना ज़रूरी है।
वारिस पठान ने महाराष्ट्र को लेकर क्या आरोप लगाए?
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि यदि कोई मुसलमान सोसायटी या सड़क के बाहर पाँच मिनट नमाज पढ़ता, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होती और उसे जेल भेजा जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी चीजें खासतौर पर महाराष्ट्र में की जा रही हैं।
कुर्बानी का असल मकसद क्या बताया गया?
एक नमाजी ने समझाया कि कुर्बानी का असल मकसद दिलों से दूसरों का डर निकालकर केवल अल्लाह के प्रति समर्पण लाना है। यह आत्मशुद्धि और ईश्वर के प्रति पूर्ण निष्ठा का प्रतीक है।
बकरीद के मौके पर सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी?
मलाड पुलिस ने नूरानी मस्जिद और आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षाबल तैनात किया था। अधिकारियों के अनुसार त्योहार बिना किसी अप्रिय घटना के शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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