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नितेश राणे का 'वर्चुअल बकरीद' वाला बयान: कंप्यूटर पर फोटो लगाकर त्योहार मनाने की सलाह

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नितेश राणे का 'वर्चुअल बकरीद' वाला बयान: कंप्यूटर पर फोटो लगाकर त्योहार मनाने की सलाह

सारांश

महाराष्ट्र मंत्री नितेश राणे ने बकरीद पर 'वर्चुअल बकरीद' मनाने की सलाह देकर नई बहस छेड़ दी है। उनका तर्क है कि हिंदू त्योहारों पर पर्यावरण की दुहाई देने वाले बकरीद पर चुप रहते हैं — यह बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया का केंद्र बन गया है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र मंत्री नितेश राणे ने 24 मई को एक कार्यक्रम में 'वर्चुअल बकरीद' मनाने की सलाह दी।
राणे ने कहा कि होली-दीपावली पर पर्यावरण की सलाह देने वाले बकरीद पर 'चुप हो जाते हैं।' उन्होंने तंज कसा — 'कंप्यूटर पर बकरी की फोटो लगाकर दिखाइए कि हम बकरी काट रहे हैं।' राणे ने वीर सावरकर का हवाला देते हुए बयान को वैचारिक आधार देने की कोशिश की।
बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।

महाराष्ट्र सरकार में मत्स्य पालन एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने 24 मई को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बकरीद को लेकर विवादास्पद बयान दिया, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह हिंदू त्योहारों पर पर्यावरण संरक्षण की अपील की जाती है, उसी तर्ज पर बकरीद पर भी 'वर्चुअल तरीके' से त्योहार मनाने की सलाह दी जानी चाहिए। कणकवली विधानसभा सीट से विधायक राणे के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है।

मुख्य बयान क्या था

नितेश राणे ने कार्यक्रम में कहा कि होली पर 'ड्राय होली' और दीपावली पर पटाखे न फोड़ने की सलाह देने वाले लोग बकरीद के वक्त 'चुप हो जाते हैं।' उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'कंप्यूटर पर बकरी की फोटो लगाकर दिखाइए कि हम बकरी काट रहे हैं। आखिर जानवरों को क्यों परेशान किया जा रहा है?' राणे ने यह भी सवाल उठाया कि पर्यावरण के नाम पर सलाह देने वाले क्या बकरीद पर भी इसी तरह की अपील करने की 'हिम्मत' दिखाएंगे।

सावरकर का संदर्भ और राजनीतिक संकेत

राणे ने अपने बयान में वीर सावरकर का उल्लेख करते हुए कहा कि सावरकर ने कहा था कि हिंदुओं को कुछ अपने ही लोगों से खतरा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो व्यक्ति बकरीद पर इस तरह की 'वर्चुअल बकरीद' की अपील करेगा, उसे अंजाम का अंदाज़ा हो जाएगा — जिसे आलोचकों ने अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति उकसावे वाली भाषा के रूप में देखा है।

राणे का राजनीतिक परिचय

नितेश राणे महाराष्ट्र सरकार में मत्स्य पालन और बंदरगाह विकास मंत्री हैं और कणकवली विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के पुत्र हैं और अपने बेबाक बयानों के लिए पहले भी चर्चा में रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब उनके किसी वक्तव्य ने राज्य की राजनीति में हलचल मचाई हो।

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया

बयान सामने आने के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित कर सकते हैं और एक जिम्मेदार मंत्री पद पर बैठे व्यक्ति के लिए यह उचित भाषा नहीं है। सोशल मीडिया पर बयान को लेकर तीखी बहस जारी है, जहाँ समर्थन और विरोध दोनों तरफ से तर्क दिए जा रहे हैं।

आगे क्या

राणे के इस बयान पर विपक्षी दलों की औपचारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। यह देखना होगा कि क्या महाराष्ट्र सरकार इस विवाद पर कोई स्पष्टीकरण देती है या राणे स्वयं अपने बयान पर कोई सफाई पेश करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका निशाना स्पष्ट रूप से एक धार्मिक अनुष्ठान है। असली सवाल यह है कि क्या एक कैबिनेट मंत्री का यह दायित्व है कि वह धार्मिक समानता की बात करे या समुदायों के बीच तुलनात्मक तंज कसे। यह बयान महाराष्ट्र की गठबंधन राजनीति में ध्रुवीकरण की उस प्रवृत्ति को दर्शाता है जो चुनावी मौसम के बाहर भी जारी रहती है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नितेश राणे ने 'वर्चुअल बकरीद' के बारे में क्या कहा?
नितेश राणे ने कहा कि बकरीद पर पर्यावरण प्रेमियों को 'वर्चुअल बकरीद' मनाने की सलाह देनी चाहिए — यानी कंप्यूटर पर बकरी की फोटो लगाकर त्योहार मनाएं। उनका तर्क था कि होली और दीपावली पर जो पर्यावरण संबंधी अपीलें होती हैं, वही बकरीद पर क्यों नहीं होतीं।
नितेश राणे कौन हैं और महाराष्ट्र सरकार में उनकी क्या भूमिका है?
नितेश राणे महाराष्ट्र सरकार में मत्स्य पालन और बंदरगाह विकास मंत्री हैं। वे कणकवली विधानसभा सीट से विधायक हैं और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के पुत्र हैं।
राणे के बयान पर किस तरह की प्रतिक्रियाएँ आई हैं?
बयान के बाद राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का कहना है कि यह बयान सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुँचा सकता है, जबकि समर्थक इसे 'पर्यावरण में दोहरे मानदंड' के विरुद्ध आवाज़ बता रहे हैं।
राणे ने वीर सावरकर का उल्लेख क्यों किया?
राणे ने वीर सावरकर का हवाला देते हुए कहा कि सावरकर ने कहा था कि हिंदुओं को कुछ अपने ही लोगों से खतरा है। इस संदर्भ का उपयोग उन्होंने अपने बयान को वैचारिक आधार देने के लिए किया।
क्या यह पहली बार है जब नितेश राणे किसी विवादित बयान की वजह से चर्चा में आए हैं?
नहीं, नितेश राणे इससे पहले भी अपने बेबाक और विवादास्पद बयानों के लिए सुर्खियों में रह चुके हैं। यह उनके उन बयानों की श्रृंखला में एक और कड़ी है जो राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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